धन के अभाव में विकास की आठ परियोजनाएं ठप

AmbedkarNagar Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
अंबेडकरनगर। जिले में विकास कार्यों को गति प्रदान करने के लिए शासन प्रशासन कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जनपद में कई परियोजनाएं या तो धनाभाव के चलते ठप पड़ी हैं या फिर सुस्त रफ्तार का शिकार हैं। जिले में एक करोड़ रुपये से ऊपर की कुल 30 परियोजनाएं चल रही हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश परियोजनाएं शासन-प्रशासन की उपेक्षा का शिकार होकर रह गई हैं। जिन परियोजनाओं पर कार्य चल भी रहा है, उनमें कार्यदायी संस्था की लापरवाही लगातार सामने आ रही है। इसकी शिकायत आए दिन विभागीय अधिकारियों से की जाती है, लेकिन कोई सुध नहीं ली जा रही है। नतीजतन तमाम निर्माण कार्यों में मानकों की अनदेखी धड़ल्ले से जारी है।
25 सितंबर 1995 को अंबेडकरनगर जिला बनने के बाद लोगों को उम्मीद बंधी कि विकास कार्यों में तेजी आएगी। तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने जनपदवासियों को मायूस भी नहीं किया। जिले को तमाम सौगातें लगातार देती रहीं। हालांकि बीच में सरकार बदलने के चलते विकास कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ा। तमाम परियोजनाएं आधी-अधूरी ही बंद हो गईं, जो आगे बढ़ी भी, वो उनकी रफ्तार सुस्त हो गई। नतीजा ये हुआ कि जिस तेजी के साथ विकास कार्य प्रारंभ हुए थे, उनमें ब्रेक लगने लगा। इसमें शासन-प्रशासन की उपेक्षा लगातार सामने आई। प्रशासनिक अधिकारियों की उपेक्षा का पूरा लाभ कार्यदायी संस्थाएं उठा रही हैं। तमाम निर्माण कार्यों में लगातार मानकों की अनदेखी की जा रही है। इसकी शिकायतें भी आए दिन संबंधित अधिकारियों से की जाती हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
जिले में उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निर्माण निगम की आठ, उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम की छह, सीएनडीएस की चार, पैक्फेड की छह, यूपीपीसीएल यूनिट की 11 द्वारा तीन, पुलिस आवास निर्माण निगम की एक तथा निर्माण खंड उत्तर प्रदेश जल निगम की दो परियोजनाएं चल रही हैं।
मगर इनमें से कई धनाभाव के चलते बंद पड़ी हैं। जो परियोजनाएं चल रही हैं उनकी रफ्तार भी बेहद सुस्त है।

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