खेलों के नाम पर यहां हो रहा सिर्फ मजाक

AmbedkarNagar Updated Wed, 29 Aug 2012 12:00 PM IST
अंबेडकरनगर। यह कहना शायद गलत नहीं होगा कि जिले में खेलों के नाम पर सिर्फ मजाक हो रहा है। ऐसा न होता, तो तरणताल के बगैर ही यहां तैराकी की प्रतियोगिताएं प्रत्येक वर्ष संपन्न न हो पातीं। गांव-गांव पायका योजना के तहत बनने वाले ज्यादातर खेल मैदानों का अस्तित्व ही नहीं दिखता। जिनका अस्तित्व है भी वे जंगली घासफूस से घिरे हैं। कहने को तो जिले में एक खेल स्टेडियम है, लेकिन उसका मैदान इन दिनों धान की रोपाई करने वाले किसी खेत जैसा दृश्य उत्पन्न करता है। इसी स्टेडियम में तरणताल, वेटलिफ्टिंग हाल व जूडो हाल लगभग बनकर तैयार है, लेकिन उसका कोई लाभ खिलाड़ियों को मिल नहीं पा रहा है।
29 अगस्त को हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले ध्यानचंद के जन्मदिवस को ही खेल दिवस के रूप में जाना जाता है। यूं तो खेल विभाग ने इस मौके पर बुधवार को हॉकी प्रतियोगिता का आयोजन कराया है, लेकिन इससे इतर एक दूसरी हकीकत यह है कि जिले में खेल प्रतिभाओं को निखारने की फिक्र किसी को नहीं है। ऐसे कुछ आयोजन जब तब हो जाते हैं, लेकिन इसका कोई लाभ नहीं हो पाता। कारण यह कि खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए जिस सतत प्रयास व अभ्यास की जरूरत होती है, वह जिले में शून्य पड़ी है। इसका बड़ा कारण विभाग से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक की बेफिक्री है। खिलाड़ियों के भविष्य को लेकर उपेक्षा इससे बड़ा सबूत और क्या होगा कि जिले में खेलों को बढ़ावा देने वाली पायका योजना ही पूरी तरह दम तोड़ चुकी है। गांव-गांव इस योजना के तहत 80 खेल मैदानों का चयन कर खेल सामग्रियों को भेजने की जिम्मेदारी निभा दी गई और क्रीड़ाश्री का चयन भी कर दिया गया। इसके बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि अधिकांश खेल मैदान नजर ही नहीं आते। एक तिहाई खेल मैदानों का अस्तित्व तो नजर आता है, लेकिन वह भी जंगली घासफूस से घिरे पड़े हैं। जिले में एकमात्र खेल स्टेडियम भी खिलाड़ियों की उम्मीदों को तार-तार कर रहा है। यहां बरसात के दिनों में पूरे फील्ड में घुटने भर पानी रहता है। मैदान को ऊंचा कराने का प्रस्ताव लंबे समय से धूल फांक रहा है। तरणताल व बैडमिंटन हाल तो बनकर तैयार है, लेकिन इसे खिलाड़ियों के लिए खोला नहीं जा सका। खेलों को लेकर जिले में किस तरह मनमानी का माहौल है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रत्येक वर्ष माध्यमिक विद्यालयों की जिलास्तरीय तैराकी प्रतियोगिता बगैर तरणताल के ही हो जाती है।

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