लूट में इस्तेमाल बाइक प्राथमिकी से गायब

AmbedkarNagar Updated Mon, 27 Aug 2012 12:00 PM IST
अंबेडकरनगर। जलालपुर लूटकांड में पुलिस का एक हैरतअंगेज कारनामा सामने आया है। सैकड़ों लोगों ने बदमाशों को लूट के बाद बाइक से भागते देखा था, लेकिन पुलिस की प्राथमिकी से बाइक ही नदारद है। सवाल यह है कि पुलिस ने आखिर ऐसा क्यों किया? कारण सिर्फ एक नजर आता है कि एक मंत्री का इस मामले में घटना वाले दिन से ही पुलिस पर जो दबाव है। उसके चलते अन्य अभियुक्तों को बचाने के लिए ही बाइक को प्राथमिकी से गायब कर दिया गया। दिन के उजाले में हुई घटना में बदमाशों को बाइक के साथ देखने वाले लोगों के बीच पुलिस के इस कृ त्य से खाकी वर्दी की छवि को लेकर कई नये सवाल खड़े हो गये हैं। जलालपुर में धागा व्यवसायी से बीते दिनों हुई साढ़े 12 लाख रुपये की लूट में पुलिस ने भले ही बड़ी सफलता प्राप्त कर ली हो, लेकिन इसमें उसके द्वारा किये गये कुछ गंभीर खेल की पोल एक-एक कर खुल रही है। सिर्फ ‘अमर उजाला’ ने बीते दिनों यह तथ्य उजागर किया था कि इस घटना में कम से कम 5 बदमाश शामिल थे। कई प्रत्यक्षदर्शियों का तो कहना था कि बदमाशों की कुल संख्या 6 थी। हालांकि पुलिस सिर्फ 4 बदमाशों को ही शामिल बताती आ रही है। एक को उसने मार गिराया जबकि 3 को रकम के साथ धर दबोचा। लूट के बाद 3 बदमाश कुछ दूर तक बाइक से ही भागे थे। बदमाशों की गिरफ्तारी के बाद भी बाइक की बरामदगी करने की जरूरत महसूस न करने की खबर भी ‘अमर उजाला’ ने ही विस्तार से तमाम सवाल खड़े करते हुए दी थी। लूटकांड में अब पुलिस का एक और कारनामे का खुलासा हुआ है। अब पता चला है कि इस घटना की जो प्राथमिकी जलालपुर थाने में दर्ज हुई है, उसमें तो बाइक का उल्लेख ही नहीं है। यह हाल तब है जबकि लूट के बाद सैकड़ों लोगों ने 3 बदमाश को एक बाइक से भागते देखा था। इनमें से दो बदमाश रामपुर चाड़ीडीहा के पास पहले से खड़ी स्कॉर्पियों में सवार हो गये, जबकि एक बदमाश बाइक लेकर फरार हो गया। अब यदि मान भी लिया जाए कि बदमाश लूट के बाद बाइक से फरार नहीं हुए तो सवाल खड़ा होता है कि क्या तीनों बदमाश स्कॉर्पियो तक पैदल भागकर पहुंचे। पुलिस लूट के बाद से लगातार दावा कर रही है कि घटना के 5 से 10 मिनट के भीतर उसने बदमाशों का पीछा शुरू कर दिया। एक सच्चाई यह है कि घटनास्थल से उस स्थान की दूरी लगभग 2 किमी. है, जहां पर स्कॉर्पियो खड़ी थी। सवाल उठता है कि आखिर लूट के बाद इतनी लंबी दूरी बदमाशों ने पुलिस के पहुंचने से पहले कैसे तय कर ली। निश्चित तौर पर पुलिस यहां सच स्वीकार करती नजर नही आ रही। सच यह है कि बदमाश लूट के बाद बाइक से भागे थे। सच यह भी है कि लूट वाले दिन से ही पुलिस प्रशासन एक मंत्री के दबाव में है। चर्चा है कि इसी मंत्री के दबाव में पुलिस ने उस बदमाश को लूटकांड में शामिल नहीं दिखाया जो बाइक लेकर भागा था। और अब यह खुलासा हुआ है कि बाइक मालिक को बचाने के लिए ही लूट की प्राथमिकी में उस बाइक को शामिल नहीं दिखाया गया, जिसे सैकड़ों लोगों ने देखा था। जाहिर तौर पर इससे पुलिस की भद्द पिट रही है। सूत्रों के मुताबिक पुलिस कार्रवाई करना चाहती थी, लेकिन मंत्री के अड़ जाने के कारण कदम पीछे खींचना पड़ा।

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