पुलिसकर्मियों की कायरता से हुई खाकी शर्मशार

AmbedkarNagar Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
अंबेडकरनगर। रुस्तमपुर अखईपट्टी गांव में थानाध्यक्ष की पिटाई मामले में पुलिसकर्मियों की कायरता सामने आयी है। दरअसल गुरुवार सायं ग्रामीणों की घेराबंदी के बाद रात के अंधेरे में जब एसओ पानी से भरे एक गड्ढे में गिर पड़े तब पुलिसकर्मी उन्हें बचाने की बजाय अकेला छोड़कर वहां से भाग निकले। ताज्जुब तो यह यह कि पीएसी व सिविल पुलिसकर्मियों की संख्या उस समय 20 से अधिक थी। इसके बाद भी थानाध्यक्ष को पिटते देखने पर उनमें सिर्फ मौके पर खड़े हो जाने तक का साहस नहीं हो सका। अधिकारियों ने इसके लिए पीएसी व पुलिस के जवानों को कड़ी फटकार लगायी है, लेकिन वर्दी पर जो दाग लगना था, वह लग चुका है। थानाध्यक्ष की पिटाई को लेकर प्रशासन को जिस असहज स्थिति का शिकार होना पड़ा है, उसके लिए ग्रामीणों के दु:साहस से कहीं ज्यादा पुलिसकर्मियों की कायरता जिम्मेदार है। बताया जाता है कि दलित बस्ती के लोग पहले से ही मारपीट के लिए योजनाबद्ध ढंग से तैयार थे। कई ग्रुप में बंटकर वे लाठी डंडों व ईंट के टुकड़ों से लैस थे। पुलिस टीम देर सायं जब बस्ती तक पहुंची तो ग्रामीणों ने अंधेरे का फायदा उठाते हुए एक साथ हमला बोल दिया। ग्रामीणों को एकजुट देख पुलिसकर्मी रक्षात्मक मुद्रा में आग गये। इसी बीच कुछ घंटे पहले ही एसओ बनाये सुरेश पटेल का पैर फिसल गया और वे पानी से भरे एक गड्ढे में गिर पड़े। इसके बाद एक दु:साहसी ग्रामीण ने उनका हाथ पकड़ लिया जबकि अन्य ग्रामीणों ने लाठी डंडों से पिटाई शुरू कर दी। एसओ को पिटता देख उन्हें बचाने की बजाय साथ गये पीएसी व पुलिस के जवान वहां से भाग खड़े हुए। उस समय पुलिसकर्मियों की संख्या भी दो चार नहीं बल्कि 20 से भी अधिक थी। सभी के पास हथियार थे, और खाकी वर्दी भी थी, लेकिन इन सब पर कायरता भारी पड़ गयी। आम तौर पर सभी का मानना है कि यदि पुलिसकर्मी अपनी जगह खड़े भर हो गये होते और असलहों को तान लेते तो थानाध्यक्ष को पिटने व उसका हाथ टूटने से बचाया जा सकता था। एएसपी राजीव मल्होत्रा ने कहा कि घायल दरोगा के बयान के आधार पर बाद में पुलिसकर्मियों को चिह्नित किया जायेगा। फिलहाल दरोगा इलाज के लिए लखनऊ गया हुआ है।

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