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डॉक्टर जिले के बाहर, ओटी की चाभी घर पर

AmbedkarNagar Updated Mon, 20 Aug 2012 12:00 PM IST
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अंबेडकरनगर। धरती का भगवान कहे जाने वाले चिकित्सकों की संवेदनहीनता देखिए। दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल युवक दर्द से लगभग एक घंटे तक तड़पता रहा, लेकिन उसका इलाज नहीं किया जा सका। आन कॉल चिकित्सक ने अपने को जनपद से बाहर कहकर पल्ला झाड़ लिया, तो ओटी की चाभी अपने पास रखकर स्टाफ नर्स आवास में बैठी रहीं। यह दृश्य रविवार को जिला चिकित्सालय में उस समय दिखाई दिया, जब ट्रेन दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल एक युवक को उसके परिजन लेकर पहुंचे। यहां ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक ने प्राथमिक उपचार करने का भरसक प्रयास किया, लेकिन स्टाफ नर्स एवं एक अन्य चिकित्सक की लापरवाही के चलते ऐसा नहीं हो सका। लगभग एक घंटे के बाद उसका प्राथमिक उपचार कर उसे लखनऊ के लिए रेफर कर दिया गया। मालीपुर थाना अंतर्गत कबूलपुर निवासी प्रमोद कुमार 25 पुत्र संतराम प्रजापति दिल्ली में नौकरी करता है। रविवार को वह कैफियत एक्सप्रेस से वापस घर आ रहा था। जब ट्रेन मालीपुर स्टेशन पर रुकी, तो उसके बगल बैठे एक अन्य यात्री ने उसे उसका स्टेशन आने की सूचना दी। इस पर वह हड़बड़ाकर उठा। जैसे ही वह बाहर उतरा, वह अनियंत्रित हो गया और ट्रेन के नीचे आ गया। इस बीच ट्रेन चल दी, जिसकी चपेट में उसके दोनों पैर आ गए। आननफानन में इसकी सूचना आरपीएफ द्वारा उसके परिजनों को दी गई। गंभीर रूप से घायल प्रमोद को लेकर परिजन जिला चिकित्सालय पहुंचे। यहां इमरजेंसी में डॉ. मेजर विश्राम की ड्यूटी लगी हुई थी। युवक की हालत को देखते हुए उन्होंने ड्यूटी पर तैनात आर्थोचिकित्सक डॉ. फूलबदन को फोन किया। आर्थो चिकित्सक द्वारा बताया गया कि वह इस समय जनपद के बाहर हैं, वह चिकित्सालय नहीं पहुंच सकते। प्रमोद के साथ आए ग्रामीणों ने उनसे प्राथमिक उपचार करने का निवेदन किया। इस पर डॉ. मेजर ने फार्मासिस्ट संग्राम मौर्य से ओटी खोलने के लिए कहा। वहां ताला लटका था। स्टाफ नर्स प्रमिला उपाध्याय ने बताया कि इमरजेंसी ओटी कक्ष की चाभी स्टाफ नर्स रचना श्रीवास्तव के पास है। इस पर डॉ. मेजर ने रचना को फोन किया, लेकिन कई बार काॅल करने के बाद भी फोन नहीं उठा। परिजनों का आक्रोश बढ़ता देख डॉ. मेजर ने इसकी सूचना प्रभारी सीएमएस डॉ. ओंकारनाथ को दी। सीएमएस ने चिकित्सालय पहुंचकर फर्मासिस्ट को स्टाफ नर्स के घर जाकर चाभी लाने का निर्देश दिया। बताया जाता है कि पहले तो उसने चाभी देने से ही इंकार कर दिया। बाद में एक अन्य स्टाफ नर्स अंजू सिंह के हाथ चिकित्सालय में भेज दी। इस बीच बड़ी मात्रा में खून का रिसाव हो गया था। लगभग एक घंटे बाद प्रमोद का प्राथमिक उपचार किया गया। इसके बाद उसे लखनऊ रेफर कर दिया गया।
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