कन्या-भ्रूण हत्या के खिलाफ बग्गा ने फूंका बिगुल

AmbedkarNagar Updated Fri, 10 Aug 2012 12:00 PM IST
अंबेडकरनगर। टांडा नगर के रहने वाले धर्मवीर सिंह बग्गा ने समाजसेवा की ऐसी कमान संभाल रखी है, जो वास्तव में प्रेरणास्रोत है। इनके पूर्वज तेजाराम मूलरूप से पाकिस्तान के रहने वाले थे। भारत पाकिस्तान के बंटवारे के दौरान परिवार के कई सदस्यों की कुर्बानी देकर वे अन्य सदस्यों के साथ भारत चले आए। वे पाकिस्तान में सरपंच के पद पर थे। बाद में टांडा नगर में इस परिवार ने अपनी ख्याति अर्जित की। तेजाराम के पुत्र करतार सिंह समाजसेवा के मिसाल के रूप में उभरे। विभिन्न शैक्षिक व सामाजिक संस्थाओं की स्थापना का श्रेय उन्हें मिला। उनके पुत्र धर्मवीर ने इस राह को न सिर्फ आगे बढ़ाया, वरन एक ऐसा मुकाम प्रदान किया है, जहां से तमाम लोगों को प्रेरणा मिलती नजर आती है। मौजूदा दौर में जब अधिकांश घर में पुत्रों की अपेक्षा कन्याओं को लेकर दोयम दर्जे का व्यवहार सामने आता है और कन्या भ्रूण हत्या जैसा अभिशाप चरम पर है। तब इस पर अंकुश लगाने के लिए धर्मवीर का एक प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण नजर आता है। उन्होंने वर्ष 05 से अपने संसाधनों के बल पर गरीब कन्याओं के विवाह का जिम्मा संभाल रखा है। साल दर साल वे यह आयोजन अत्यंत धूमधाम से करते चले आ रहे हैं। जोड़ों का विवाह न सिर्फ उनके रीति रिवाज के अनुसार होता है, वरन बैंड बाजे से लेकर खाने पीने तक का प्रबंध होता है। नवविवाहित जोड़ों को तमाम जीवनोपयोगी उपहार भी दिए जाते हैं। बकौल बग्गा कन्या भ्रूण हत्या से बड़ा कोई अपराध नहीं है। इसे कम करने के लिए ही उन्होंने गरीब बालिकाओं के विवाह का निर्णय लिया। तेजाराम मेमोरियल ट्रस्ट के बैनरतले वे अब तक 349 शादियां करा चुके हैं। न कोई रसीद और न कोई चंदा। वे कहते हैं कि उनकी एक बेटी है। उसका विवाह वे तभी करेंगे, जब वे एक हजार शादियां करा चुके होंगे। मेडिकल छात्रों के हितार्थ देहदान की घोषणा कर चुके धर्मवीर का कहना है कि बेटियां भी पुत्रों के समान हैं। लोगों को यह सच स्वीकार करना होगा कि बेटियां मां बाप की ज्यादा सेवा करती हैं।

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