17 साल बाद भी ब्लड बैंक से महरूम जिला

AmbedkarNagar Updated Thu, 14 Jun 2012 12:00 PM IST
अंबेडकरनगर। फैजाबाद से अलग होकर नए जिले के रूप में स्थापित अंबेडकर नगर में करीब 17 साल बाद भी ब्लड बैंक की सुविधा लोगों को नहीं मिल पाई है। जिला अस्पताल में लगभग डेढ़ वर्ष से ब्लड बैंक का भवन तो बनकर तैयार है, लेकिन उसके संचालन की अनुमति अभी तक नहीं मिली है। नतीजतन खून की जरूरत के लिए अभी भी लोगों को फैजाबाद, लखनऊ या इलाहाबाद आदि शहरों की दौड़ लगानी पड़ रही है। कई बार समय से खून न मिल पाने के कारण मरीजों की मौत तक हो जाती है, लेकिन जिला मुख्यालय पर ब्लड बैंक शुरू कराने को लेकर प्रशासनिक अधिकारी या जनप्रतिनिधि कोई भी गंभीर नजर नहीं आता। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री व स्वास्थ्य राज्यमंत्री इसी जिले से हैं। उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले दिनों में ब्लड बैंक जिला मुख्यालय पर भी शुरू होगा और तब इसका प्रयोग कर कई जिंदगी बचाई जा सकेगी।
29 सितंबर 1995 को फैजाबाद जनपद विभाजित कर जब अंबेडकरनगर नाम से अलग जिला बना, तो यहां स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने के लिए जिला अस्पताल की स्थापना हुई। उसी समय से ब्लड बैंक की स्थापना की मांग की जाने लगी। लंबे समय बाद यह मांग पूरी हुई। जिला अस्पताल परिसर में ब्लड बैंक का भवन तो बनकर तैयार हो गया, लेकिन विभिन्न तकनीकी समस्याओं के चलते इसके संचालन की अनुमति डेढ़ वर्ष बाद तक नहीं मिल पाई है। नतीजा यह है कि खून के लिए गंभीर मामलों में मरीजों को यहां से रेफर करने के अलावा चिकित्सकों के पास कोई चारा नहीं रहता। फैजाबाद, लखनऊ, इलाहाबाद या आजमगढ़ ले जाए जाते समय कई बार मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। इसके बाद भी ब्लड बैंक शुरू कराने को लेकर कोई ठोस पहल नहीं हो पा रही है। निजी क्षेत्र में पहले से ही किसी ब्लड बैंक को लाइसेंस नहीं मिला है। ऐसे में यह जिला ब्लड बैंक विहीन बना हुआ है। हालांकि निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज में कहने को दो माह पूर्व एक ब्लड बैंक का संचालन शुरू किया गया है। लेकिन यहां भी अभी व्यवस्था पूरी तरह पटरी पर नहीं आ पाई है। प्राचार्य वीएन त्रिपाठी के अनुसार व्यवस्था को पटरी पर लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। यही वजह है कि जिला मुख्यालय पर ब्लड बैंक की सुविधा नहीं होने के कारण रक्तदान को लेकर भी कोई माहौल नहीं बन पा रहा। रक्तदान के लिए कभी कोई संगठन आगे आया भी, तो उसे काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। गत वर्ष ट्रैफिक पुलिस ने यातायात निरीक्षक आरके मिश्र के नेतृत्व में रक्तदान शिविर लगवाया था, तो इसके लिए भी उन्हें काफी पापड़ बेलने पड़े थे। ऐसे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि यदि कोई आम आदमी स्वेच्छा से रक्तदान करना चाहे भी तो वह कैसे संभव हो सकता है। जिले में अब तक जिन संस्थाओं ने रक्तदान कराया है, उसके लिए फैजाबाद अस्पताल से कर्मचारियों की टीम बुलवानी पड़ी थी।

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