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अक्षय तृतीया पर कराएं मां लक्ष्मी का 108 श्री सूक्तम पाठ एवं हवन, होगी अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति - 14 मई 2021
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अक्षय तृतीया पर कराएं मां लक्ष्मी का 108 श्री सूक्तम पाठ एवं हवन, होगी अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति - 14 मई 2021

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Digital Edition

प्रयागराज में युवती का अपहरण कर किया दुष्कर्म, आरोपी गिरफ्तार

करेली में एक युवती ने रिपोर्ट दर्ज कराई है कि 19 मार्च को उसका अपहरण कर युवक ने कई बार दुष्कर्म किया। विरोध करने पर उसे बेरहमी से पीटा भी। युवती किसी तरह चंगुल से छूटी तो उसने महिला आयोग को शिकायत भेजी। मंगलवार को आरोपी जैद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। बुधवार को उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

 करेली में रहने वाली युवती की तहरीर के मुताबिक 19 मार्च को जैद अली खान ने उसका अपहरण कर लिया था। अपहरण जैद उसे कहीं ले गया। उसे बंधक बनाकर रखा और कई बार दुष्कर्म किया। उसने विरोध की कोशिश की तो जैद ने उसे बेरहमी से पीटकर घायल कर दिया। कुछ दिन पहले युवती किसी तरह जैद के चंगुल से छूटकर अपने मायके आ गई।

जैद के खिलाफ महिला आयोग में पत्र भेजकर शिकायत की गई। आयोग से वह पत्र मंगलवार को करेली थाने पहुंच गया। इसके बाद पुलिस ने जैद के खिलाफ विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली। पुलिस ने युवती समेत घरवालों से बातचीत की। दरोगा कौशलेंद्र सिंह ने बताया कि जैद को आज गिरफ्तार कर लिया गया। युवती का मेडिकल कराया जाएगा। इसके बाद उसका भी बयान दर्ज किया जाएगा।
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नैनी में नवदंपती के आत्महत्या का दूसरे दिन भी नहीं हो सका खुलासा

डांडी बाजार में मंगलवार को शिवम और उसकी पत्नी नेहा की आत्महत्या की गुत्थी नहीं सुलझ पाई। न तो उनके काल रिकार्ड्स से कुछ पता चला न ही घर वालों से पूछताछ में। दो दिन पहले नेहा से मिलने उसके माता पिता आए थे। उन्होंने बताया कि वह अवसादग्रस्त लग रही थी। उन्होंने पूछा लेकिन उसने कुछ बताया नहीं था। बुधवार को दोनों घरों में लोग सांत्वना देने आते रहे।

नैनी कोतवाली के डांडी बाजार निवासी शंकरलाल केसरवानी का बड़ा पुत्र शिवम घर के पास ही कपड़े की दुकान चलाता था। पांच माह पहले घूरपुर निवासी श्याम लाल की पुत्री नेहा से उसकी शादी हुई थी। मंगलवार को कमरे के अंदर एक ही फंदे में दोनों ने फांसी लगा ली थी। शादी के पांच महीने में ही दोनों ने आत्मघाती कदम क्यूं उठाया इसको लेकर संशय बना हुआ है।

परिजन व पुलिस अभी तक दोनों के आत्महत्या के कारणों को नहीं  खोज पाई है। दोनों के मोबाइल फोन के रिकार्ड्स देखे गए। सोशल मीडिया प्रोफाइल भी चेक किया गया लेकिन कुछ पता नहीं चल पाया। पुलिस का कहना है कि अभी तक की जांच से इतना कहा जा सकता है कि शिवम और नेहा में आपस में ही कोई बात हुई थी। जिस कारण उन्होंने इतना बड़ा कदम उठाया। आत्महत्या के बाद नेहा के मायके वालों व शिवम के परिजनों के बीच मारपीट हुई थी। आरोप था कि शिवम के परिवार वाले दोनों पर कुछ अधिक ही बंदिश लगा रखे थे जिसके कारण वह डिप्रेशन में थे। लोगों ने बताया कि पोस्टमार्टम हाउस में भी नेहा के मायके पक्ष के किसी रिश्तेदार ने शिवम के पिता की पिटाई की थी। 

सोमवार की रात नेहा ने की थी अपनी बहन से बात

नेहा के पिता श्याम लाल ने बताया कि वह और उसकी पत्नी सुनीता देवी सोमवार रात को अपनी बेटी के घर गए थे। वह महेवा निवासी अपनी बहन के यहां वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल आए थे तो अपनी बेटी के यहां रूके थे। बातचीत में उन्होंने बताया कि बेटी अवसाद में थी लेकिन पूछने पर कुछ भी नहीं बताया। उनके लौटने के बाद नेहा ने अपनी बहन रीया को फोन किया था और बताया कि पापा मम्मी उससे मिलने आए थे।

शादी के पांच माह में एक सप्ताह भी मायके नहीं रही नेहा

दिसबंर में नेहा और शिवम की शादी हुई थी। लेकिन पांच माह में नेहा एक सप्ताह भी अपने मायके में नहीं रही। नेहा के पिता ने बताया शादी के बाद जब भी वह घर आई तो एक दो दिन में ही लौट गई। होली पर्व में वह उसका पति व देवर सौरभ घर आए थे और दो दिन तक थे। दो दिन बार शिवम और सौरभ चले गए। लेकिन कुछ घंटे बाद शिवम ने फोन करके नेहा को बुलाने की बात कही। इसको लेकर उन्होंने नाराजगी भी जताई थी लेकिन अधिक दबाव बनने पर उन्होंने नेहा का विदा कर दिया।

परिजनों ने की निष्पक्ष जांच की मांग

नेहा के मायके वालों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि किसी तरह की परेशानी नहीं होने पर भी इस तरह का आत्मघाती कदम उठाना समझ से परे है। कही से कोई भी दबाव या परेशानी रही होगी जो इन दोनों ने इतना बड़ा कदम उठाया। आत्महत्या का कारण स्पष्ट नहीं होने से दोनों परिवार परेशान है।
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कोरोना काल में 33 केंद्रों से इम्युनिटी बूस्टर आयुर्वेदिक दवाओं का नि: शुल्क वितरण

आयुष विभाग ने कोरोना काल में इम्युनिटी बूस्टर आयुर्वेदिक दवाओं का नि:शुल्क वितरण शुरू कराया गया है। जिले के 33 आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में शंसमनी बटी, आयुष 64, आयुष क्वाथ, अणुतेल आदि दवाओं की उपलब्धता करा दी गई है। प्रभारियों को टीम बनाकर घर-घर दवाओं का वितरण कराने का काम दिया गया है। 

क्षेत्रीय आयुर्वेदिक और यूनानी अधिकारी डॉ. शारदा प्रसाद के निर्देशन में करीब 15 दिन पहले इम्युनिटी बूस्टर दवाओं का वितरण शुरू कराया गया। अब ग्रामीण अंचलों में घर-घर दवाओं के वितरण ही नहीं लोगों का स्वास्थ्य भी जांचा जा रहा है। आयुर्वेद चिकित्सालय धीनपुर के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि संक्रमण से बचाव में आयुर्वेदिक दवाएं कारगर हैं। लोगों को संक्रमण से बचने के लिए जो इम्युनिटी बूस्टर दवाएं दी जा रही हैं, उनके उपयोग का तरीका और मास्क, सैनिटाइजर, हाथ धोने के फायदे भी बताए जा रहे हैं। लोगों को बताया जा रहा है कि यदि संक्रमण की पुष्टि होती है तो तुरंत एलथ्री या एलथ्री अस्पताल में इलाज कराएं। 
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Prayagraj Corona Update: 24 घंटे में 241 कोरोना संक्रमित, बढ़ने लगे मरीज, मरने वाले भी कम नहीं

कोरोना की दूसरी लहर जान पर अब भी भारी है। चार दिन से संक्रमितों की संख्या कम हो रही है, लेकिन जान गंवाने वालों का आंकड़ा नीचे नहीं आ रहा है। बृहस्पतिवार को पॉजिटिव मरीजों की संख्या 202 से बढ़कर तीसरे दिन फिर 241 पर आ गई। वहीं नौ मई से प्रतिदिन औसतन छह मरीजों की मौत चिंता बढ़ाने वाली है। स्वस्थ होने वालों की बढ़ती संख्या पर भी विराम लगा है। मई में बृहस्पतिवार को सबसे कम 399 मरीजों ने ही कोरोना को मात दी। 

कोरोना संक्रमण का कहर अब गांवों में ज्यादा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक प्रतिदिन साढ़े दस हजार लोगों की कोरोना जांच की जा रही है। संक्रमण शहरी क्षेत्र में बढ़ा तो होम आइसोलेशन में रहने वाले तेजी से संक्रमणमुक्त हुए। अब गांवों में ट्रेसिंग अभियान में चिह्नित संक्रमित गंभीर स्थिति में पाए जा रहे हैं। आठ मई से उपचार के दौरान कोरोना संक्रमितों में शहर और गांव का प्रतिशत क्रमश: 70 और तीस का है। साफ है कि गंभीर स्थिति में गांव से शहर के अस्पतालों में भर्ती हो रहे मरीजों में संक्रमण ज्यादा है। जान गंवाने वाले दो शहर के होते हैं तो पांच गांव के रहने वाले हैं। 

जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. ऋषि सहाय के मुताबिक बृहस्पतिवार को जिले में 10699 लोगों की कोरोना जांच की गई। 241 लोगों की कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई। 24 घंटे में सिर्फ 399 लोग संक्रमणमुक्त हुए, इनमें 50 विभिन्न कोविड अस्पतालों से डिस्चार्ज किए गए। वहीं उपचार के दौरान सात लोगों की मौत हो गई। संक्रमितों की घटती संख्या के बीच पांच दिन से मौत का आंकड़ा छह पर टिकी है। 

अस्पतालों में गंभीर मरीज, संक्रमितों के मुकाबले कम हो रहे डिस्चार्ज

कोरोना संक्रमण की इस दूसरी लहर में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को ठीक होने में छह से आठ दिन लग रहे हैं। फेफड़ों में सूजन और संक्रमण से ऑक्सीजन स्तर सुधरने में कम से कम छह दिन लग रहे हैं। बिना ऑक्सीजन प्रेशर के मरीज का एसपीओटू 70-72 से अधिक नहीं जा पा रहा है। चिकित्सकों के मुताबिक इलाज में लापरवाही भारी पड़ रही है। लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराकर उपचार शुरू कराने वाले जल्दी स्वस्थ हो रहे हैं। एसआरएन अस्पताल ही नहीं निजी अस्पतालों के आईसीयू के 90 फीसदी बेड फुल हैं। 
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prayagraj news : एसआरएन में मरीज को भर्ती कराने लेकर आते परिजन। prayagraj news : एसआरएन में मरीज को भर्ती कराने लेकर आते परिजन।

सिद्धार्थनाथ ने कोविड मरीजों के लिए एसआरएन में दिए 150 हाईटेक मॉनिटर

मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के एलथ्री एसआरएन अस्पताल में कोविड मरीजों के लिए सुविधाओं का क्रम जारी है। मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को मरीजों के बेहतर उपचार के लिए 150 हाईटेक मॉनिटर अस्पताल प्रशासन के सुपुर्द किए। उन्होंने चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ के सेवा भाव को सराहा। 

बृहस्पतिवार को तीसरा मौका था जब जनप्रतिनिधियों में अस्पताल पहुंचकर कोविड मरीजों के लिए जीवन रक्षक उपकरण मुहैया कराए। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या ने वेंटीलेटर, मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने मॉनिटर फिर मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने हाईटेक मॉनिटर उपलब्ध कराए। इस खास मौके पर मंत्री के साथ सांसद फूलपुर केसरी देवी पटेल भी मौजूद रहीं। जनप्रतिनिधियों ने अस्पताल की सुविधाओं में वृद्धि के लिए हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।

संक्रमित को परिवार का सदस्य मानकर करें इलाज

कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने एसआरएन अस्पताल में कोरोना संक्रमितों के इलाज की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कहा कि इस महामारी में डॉक्टर भगवान का रूप बनकर सामने आए। जीजान से मरीजों का उपचार किया। उन्होंने संक्रमण की घटती दर पर संतोष जताते हुए जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी, प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह के प्रयासों को सराहा। मंत्री ने कहा कि चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ मरीज को घर परिवार को सदस्य मानकर इलाज करें।

संभावित तीसरी कोरोना लहर से मुकाबला करने को संसाधन विकसित करने को प्रस्ताव दें। मुख्यमंत्री से बातकर सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी। प्राचार्य डॉ. सिंह ने मंत्री को कठिनाइयां तो बताई हीं साथ ही मरीजों और तीमारदारों को दी जा रही सुविधाओं के बारे में जानकारी दी। मॉनिटर लोकार्पण मौके पर सांसद फूलपुर केसरी देवी पटेल, भाजपा महानगर अध्यक्ष गणेश केसरवानी, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष भाजपा कमलेश कुमार, जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज डॉएसपी सिंह, उप प्रभारी कोविड डॉ. सुजीत वर्मा, डॉ. संतोष सिंह, एसआईसी डॉ. अजय सक्सेना, डिप्टी एसआईसी गौतम त्रिपाठी समेत अन्य चिकित्सकीय स्टाफ मौजूद रहे।
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दुकानों की बंदी से आबकारी विभाग को 20 करोड़ का झटका

कोरोना कर्फ्यू के चलते एक बार फिर शराब व्यवसायियों और आबकारी विभाग को तगड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। 13 दिनों की अवधि में लगभग 20 करोड़ का नुकसान हुआ है। यह आंकड़ा प्रतिदिन होने वाली औसत बिक्री के आधार पर निकाला गया है। हालांकि विभागीय जानकारों का कहना है कि दुकानें खुलने से अब राहत मिलने के आसार हैं। 

आबकारी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 2019-20 में मार्च में कुल 6.2 लाख लीटर अंग्रेजी शराब की बिक्री हुई। होली के चलते बिक्री के आंकड़े में लगभग 10 प्रतिशत अधिक था। मौजूदा साल में  भी इसमें करीब 10 फीसदी का इजाफा हुआ और इस बार लगभग 6.8 लाख लीटर शराब की बिक्री हुई। अंग्रेजी शराब की औसत कीमत 700 रुपये प्रति लीटर मान ली जाए तो मार्च के महीने में करीब 47.6 करोड़ की शराब बिकी। यानी औसतन करीब 1.5 करोड़ की अंग्रेजी शराब रोज बिकी। कोरोना कर्फ्यू के चलते 29 अप्रैल से ही शराब की दुकानें बंद हो गईं और यह सिलसिला 11 मई तक चला। इस तरह से हिसाब लगाया जाए तो पता चलता है कि 13 दिनों में केवल अंग्रेजी शराब की बिक्री न होने से आबकारी विभाग को 20 करोड़ की चपत लगी। 

देशी और बीयर में भी 20 लाख का नुकसान

इसी तरह देशी शराब की बात की जाए तो इस बार मार्च में करीब 10266 लीटर देशी शराब की बिक्री हुई। प्रति लीटर 350 रुपये की औसत कीमत मानी जाए तो इसका मूल्य करीब 35 लाख रुपये होता है। यानी औसतन एक लाख रुपये की देशी शराब रोज बिकी। इस तरह 13 दिनों की बंदी में हुए नुकसान की बात करें तो करीब 13 से 14 लाख रुपये होता है। बीयर की बात करें तो इस वर्ष मार्च में करीब बीयर की 13.5 हजार केन बिकीं। मूल्य की बात करें तो यह करीब 17 लाख रुपये के आसपास होता है। औसतन 56 हजार रुपये प्रतिदिन की बिक्री के हिसाब से बात की जाए तो 13 दिन में केवल बीयर से सात लाख से ज्यादा का नुकसान विभाग को हुआ। 

कारोबारी बोले, लाइसेंस फीस का ही नुकसान लाखों में

शराब के कारोबारी से जुड़े लोगों का कहना है कि केवल लाइसेंस फीस की ही बात करें तो बंदी के चलते लाखों का नुकसान हुआ है। प्रदेश भर में शराब का कारोबार करने वाली एक कंपनी के एरिया मैनेजर अजय प्रकाश मित्तल ने बताया कि उनकी कंपनी ने अपनी दुकानों के करीब 18 करोड़ की लाइसेंस फीस जमा की है। प्रति माह के हिसाब से यह 1.5 करोड़ के आसपास होती है। 13 दिन की बंदी की बात की जाए तो लगभग 75 लाख रुपये लाइसेेंस ड्यूटी का ही नुकसान हुआ। पिछली बार भी 45 दिनों की बंदी में तगड़ा नुकसान उठाना पड़ा था।
शराब वाली खबर का इनसेट

शराब व्यवसायी अभिषेक जायसवाल बताते हैं कि अन्य नुकसान तो अपनी जगह है, सबसे ज्यादा चिंताजनक लाइसेंस फीस का नुकसान है। लाइसेंस फीस वह शुल्क है जो मालिक एकमुश्त अदा करता है। शराब की बिक्री में 80 फीसदी के करीब लाइसेंस फीस ही हो जाती है। ऐसे में बंदी के चलते लाइसेंस फीस का ही तगड़ा नुकसान हुआ है। पिछली बार 40 दिनों की बंदी में भी शराब कारोबारियों को इसका नुकसान उठाना पड़ा था।
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UPPSC : कुछ परीक्षाएं टलने से पूरा कैलेंडर होगा प्रभावित

कोविड-19 के मद्देनजर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) अब तक छह परीक्षाएं स्थगित कर चुका है, लेकिन इसका असर आयोग के पूरे परीक्षा कैलेंडर पर पड़ेगा। प्रारंभिक परीक्षाएं स्थगित हो जाने से आयोग के लिए अब मुख्य परीक्षाओं का आयोजन भी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार करा पाना मुश्किल होगा। ऐसे में कैलेंडर में शामिल अन्य परीक्षाओं के टलने के आसार भी बढ़ गए हैं। यूपीपीएससी को आगे भी कई परीक्षाओं की तिथियों में परिवर्तन करना पड़ सकता है।

यूपीपीएससी ने अब तक जिन परीक्षाओं को स्थगित किया है, उनमें 17 अप्रैल को प्रस्तावित प्रवक्ता राजकीय डिग्री कॉलेज स्क्रीनिंग परीक्षा, 23 मई को प्रस्तावित प्रधानाचार्य श्रेणी-2/उप प्रधानाचाचार्य/सहायक निदेशक स्क्रीनिंग परीक्षा, 30 मई को प्रस्तावित सम्मिलित राज्य कृषि सेवा प्रारंभिक परीक्षा, 13 जून को प्रस्तावित पीसीएस-2021 की प्रारंभिक परीक्षा एवं सहायक वन संरक्षक (एसीएफ)/क्षेत्रीय वन अधिकारी (आरएफओ)-2021 की प्रारंभिक परीक्षा और 20 जून को प्रस्तावित प्रवक्ता राजकीय इंटर कॉलेज प्रारंभिक परीक्षा शामिल है। अगर हालात नहीं सुधरे तो आयोग को जुलाई में प्रस्तावित परीक्षाएं भी स्थगित करनी पड़ सकती हैं। हालांकि अब तक जितनी परीक्षाएं स्थगित की गई हैं, उनका असर कैलेंडर में शामिल बाकी परीक्षाओं पर भी पड़ेगा।

प्रारंभिक परीक्षाओं के लिए आयोग को केंद्र निर्धारण, पेपर सेटिंग जैसी प्रक्रिया पूरी करनी होती है। परीक्षा के बाद रिजल्ट जारी करने के लिए समय सीमा निर्धारित की जाती है। रिजट आने पर अभ्यर्थियों से मुख्य परीक्षा के लिए आवेदन लिए जाते हैं और इसके बाद मुख्य परीक्षा का आयोजन होता है। प्रारंभिक परीक्षाएं स्थगित होने से यह पूरा क्रम बिगड़ जाएगा। आयोग के कैलेंडर में पीसीएस-2021 की मुख्य परीक्षा तीन अक्तूबर से, एसीएफ/आरएफओ-2021 की मुख्य परीक्षा 22 अक्तूबर से, सम्मिलित राज्य कृषि सेवा मुख्य परीक्षा 13 नवंबर से और प्रवक्ता राजकीय इंटर कॉलेज मुख्य परीक्षा चार दिसंबर को प्रस्तावित है। लेकिन, अब इन सभी परीक्षाओं के आयोजन पर संकट मंडरा रहा है।
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सीएमओ संत कबीर नगर के खिलाफ फर्जी कोविड सर्टिफिकेट बनाने के मुकदमे पर रोक

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संत कबीर नगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के खिलाफ फर्जी कोविड सर्टिफिकेट बनाने के आरोप में आपराधिक षडयंत्र और धोखाधड़ी आदि धाराओं में दर्ज मुकदमे की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने सीएमओ डा. हरगोविंद सिंह की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ किसी प्रकार की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई करने पर भी रोक लगा दी है। कोर्ट ने सीएमओ के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने वाले न्यायिक अधिकारी की भी निंदा करते हुए गंभीर टिप्पणी की है। 

डा. हर गोविंद की याचिका पर न्यायमूर्ति के जे ठाकर और न्यायमूर्ति अजीत सिंह की पीठ ने सुनवाई की। सीएमओ के खिलाफ कोतवाली खलीलाबाद थाने में 26 दिसंबर 2020 को मुकदमा दर्ज कराया गया। याची का कहना है कि उसने आरोपी एमएलए के कोविड पॉजिटिव होने की रिपोर्ट दी थी जो प्रदेश सरकार की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

न्यायिक अधिकारी ने इसकी जांच किए बिना याची के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश दे दिया जबकि याची मौजूदा समय में अपने जिले में टीकाकरण अभियान चला रहा है। कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने पहले ही राजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से सभी न्यायिक अधिकारियों को निर्देश दिया है कि महामारी के मौजूदा दौर में किसी को भी समन जारी कर तलब न किया जाए। इसके बावजूद न्यायिक अधिकारी ने न सिर्फ आरोपी एमएलए को समन जारी किया बल्कि जब उसने कोविड पॉजिटिव होने का सर्टिफिकेट दिखाया तो बिना की किसी ठोस आधार के उसे फर्जी मानते हुए मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। 

कोर्ट ने सीएमओ के खिलाफ दर्ज मुकदमे की कार्यवाही व विवेचना पर रोक लगाते हुए गिरफ्तारी नहीं करने का निर्देश दिया है। साथ ही मुकदमे में दर्ज अन्य अभियुक्तों के खिलाफ भी उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। प्रदेश सरकार को याचिका पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका की अगली सुनवाई एक जुलाई को होगी।
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उदयभान और सूरजभान करवरिया को मिली जमानत, कागज अपूर्ण होने पर कपिलमुनि की रिहाई रुकी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने करवरिया बंधुओं को 13 मई से पांच जून तक अल्पकालिक जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। इन्हें 10 लाख रुपये का व्यक्तिगत बंधपत्र जमा करना होगा और छह जून को समर्पण करना होगा। कोर्ट ने सूर्यभान करवरिया, पूर्व सांसद कपिल मुनि करवरिया व पूर्व विधायक उदयभान करवरिया को जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया है।

यह जमानत सूर्यभान करवरिया की बेटी की 19 मई को होने वाली शादी में शामिल होने के लिए दी गई है। यह आदेश न्यायमूर्ति डा. केजे ठाकर तथा न्यायमूर्ति अजीत सिंह की खंडपीठ ने करवरिया बंधुओं की अर्जी को स्वीकार करते हुए दिया है। अर्जी पर अधिवक्ता सुरेश द्विवेदी भुवनराज, अभिषेक यादव, पीके राय ने बहस की। तीनों भाइयों को सत्र न्यायालय इलाहाबाद ने जवाहर यादव की हत्या के आरोप में सजा सुनाई है। जिसके खिलाफ अपील विचाराधीन है। कोर्ट ने जेलर को करवरिया बंधुओं की रिहाई करने का निर्देश दिया है।

पेरोल के बाद भी कपिल मुनि नहीं हुए रिहा।

एमएलसी सूरज भान करवरिया की पुत्री की शादी में शामिल होने के लिए इलाहाबाद हाइकोर्ट ने जवाहर हत्या कांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे करवरिया बंधु को बृहस्पतिवार को 5 जून तक पेरोल पर रिहा करने का आदेश दिया था। शाम को सेंट्रल जेल नैनी में इस बाबत कागज आया तो, उन्हें पेरोल पर छोड़े जाने की तैयारियां शुरू हुई।

कागजी करवाई ने शुरू हुई तो पूर्व सांसद कपिल मुनि करवरिया के कागज पूर्ण नहीं मिले। कागज अपूर्ण होने के कारण उनको रिहा नहीं किया जा सका। जिसके बाद पूर्व विधायक उदय भान करवरिया ओर एमएलसी सूरज भान करवरिया को छोड़ा गया। पूर्व विधायक उदय भान करवरिया ने बताया कि कुछ कागज अपूर्ण थे जिसके कारण कपिल की रिहाई नही हो सकी है। काल ईद का अवकाश है शनिवार को कागज पूर्ण होने पर उनकी भी रिहाई हो जाएगी।

जेल से बाहर आते ही अपने अंदाज में दिखे उदयभान

पेरोल पर रिहा होने के बाद पूर्व विधायक ओर भाजपा नेता उदय भान करवरिया अपने पुराने अंदाज में दिखे। बाहर आते ही सूरज भान तुरंत गाड़ी पर बैठ गए लेकिन उदय भान पहले मीडिया से रूबरू हुए ओर उनको चाय का निमंत्रण भी दे दिया। साथ ही कुछ लोगो से उनका ओर उनके परिवार का हालचाल भी पूछा। पूर्व विधायक के इस व्यवहार को देखकर वहां मौजूद लोग काफी खुश दिखे।
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रोटोमैक कंपनी के मालिक राहुल कोठारी की जमानत अर्जी खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर नगर की रोटोमैक ग्रुप ऑफ कंपनीज के मालिक राहुल कोठारी को जमानत पर रिहा करने की अर्जी खारिज कर दी है।कोठारी पर सरकारी बैंक के 4168 करोड़ रुपये धोखे से लेने और एनपीए कराकर सरकारी धन की हानि कराने का आरोप है। सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। कोर्ट ने आरोप को गंभीर आर्थिक अपराध मानते हुए कोठारी को जमानत देने से इंकार कर दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति ओम प्रकाश ने दिया है।अर्जी पर प्रतिवाद सीबीआई के वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश व संजय कुमार यादव ने किया। कोठारी का कहना था कि वह अपने मां-बाप की इकलौती संतान है। पिता दुर्घटना में घायल है।मां-बाप को कोरोना संक्रमण हो गया है।उनकी देखभाल करने वाला दूसरा कोई नहीं है। इसलिए अंतरिम जमानत दी जाए।कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अंतरिम जमानत अर्जी और डिफाल्ट जमानत अर्जी सीबीआई कोर्ट से खारिज होने के बाद हाईकोर्ट में दाखिल जमानत अर्जी दोनों निरस्त कर दी है।
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होमगार्ड जवान ने दिखाई मानवीय संवेदना, एडीजी ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर की तारीफ

नियम-कानून अपनी जगह हैं लेकिन मानवता सबसे ऊपर है। ड्यूटी के दौरान एक राहगीर की मदद कर होमगार्ड जवान नानबाबू ने ऐसा ही संदेश दिया। घटना का वीडियो एडीजी जोन ने ट्वीट कर जवान की हौसलाआफजाई की तो तारीफों के ढेर लग गए। 24 घंटे के भीतर सैकडों लोगों ने इसे लाइक और रीट्वीट किया। 

घटना बुधवार सुबह लोकसेवा आयोग चौराहे के पास की है। चौराहे पर होमगार्ड जवान नानबाबू ट्रैफिक ड्यूटी पर तैनात था। इसी दौरान एक कोरियर कंपनी का डिलीवरीब्वॉय वहां से गुजरा। उसकी बाइक पर बहुत ज्यादा कोरियर पैकेट लदे थे और इसी दौरान पार्सल से भरी उसकी एक बोरी नीचे गिर पड़ी। फोर्स को देखकर वह हड़बड़ाहट में आगे बढ़ गया। इसी दौरान जवान दौडक़र पहुंचा और पार्सल भरी बोरी उठाकर बाइक पर रखने के बाद डिलीवरीब्वॉय को जाने के लिए कह दिया।

घटना के वक्त एडीजी जोन प्रेमप्रकाश भी वहीं से गुजर रहे थे जिन्होंने पूरा दृश्य अपने मोबाइल कैमरे से रिकॉर्ड किया और जवान की हौसलाआफजाई करते हुए इसे ट्वीट कर दिया। जिस पर सैकड़ों लोगों ने होमगार्ड जवान की तारीफ की। सभी का कहना था कि मानवता नियम-कानून से ऊपर है और होमगार्ड ने बिल्कुल ठीक किया। एडीजी जोन ने कमेंट करने वाले यूजरों को वीडियो जारी कर धन्यवाद दिया। साथ ही यह भी आश्वस्त किया कि भविष्य में कार्यशाला या गोष्ठी के आयोजन की दशा में जवानों से अपील की जाएगी कि वह ड्यूटी के दौरान मानवीय संवेदनाओं का जरूर ध्यान रखें।
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#LadengeCoronaSe : प्रयागराज में एक ही परिवार के 26 लोगों ने दी कोरोना को मात, सब स्वस्थ

कोरोना की दूसरी लहर में प्रयागराज में हजारों की संख्या में लोग चपेट में आए। इनमें से कई लोगों की जान भी चली गई, तो बहुत से ऐसे रहे जिन्होंने मजबूत इच्छाशक्ति दिखाते हुए इस बीमारी से जंग लड़ी और स्वस्थ भी हुए। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राघवेंद्र प्रसाद मिश्र का उदाहरण लें तो उनके परिवार में एक-एक करके 26 लोग कोरोना से संक्रमित हुए, लेकिन इन सभी ने होम आइसोलेट रहते हुए कोरोना को शिकस्त दे दी। अब सभी स्वस्थ हैं। 

आजाद नगर निवासी राघवेंद्र मिश्र के छोटे पुत्र सबसे पहले 11 अप्रैल को कोरोना संक्रमित हुए। इसके बाद परिवार में एक-एक करके 26 सदस्य कोरोना पॉजीटिव हो गए। संयुक्त परिवार होने की वजह से इनके घर में कुल 31 सदस्य हैं। महज दस दिन के अंतराल में 26 सदस्यों के संक्रमित होने से परिवार के लोग काफी चिंतित रहे। इस दौरान 87 वर्ष के राघवेंद्र मिश्र भी संक्रमित हो गए। उनके परिवार के लोग राघवेंद्र मिश्र के संक्रमित होने से ज्यादा परेशान हो गए। क्योंकि वर्ष 2012 में उन्होंने अपनी एक किडनी अपने पुत्र को दान कर दी थी, लेकिन राघवेंद्र मिश्र ने हिम्मत नहीं हारी।

परिवार के सभी संक्रमित लोगों का वह लगातार उत्साहवर्धन करते रहे। उनके पुत्र एवं खेल शिक्षक रविंद्र मिश्र ने बताया कि इस अवधि में हम सभी ने चिकित्सक के परामर्श के अनुसार दवाओं का सेवन तो किया ही, साथ ही नियमित रूप से योग, भाप, काढ़ा एवं हल्दी वाला दूध भी पीया। अब घर में सभी लोग स्वस्थ हैं। इस दौरान बड़े भाई एवं अधिवक्ता रघुराज किशोर मिश्र, डा. मुनीर किशोर मिश्र, कंदर्प किशोर मिश्रा, 13 वर्ष के अनघ मिश्रा समेत सभी 26 लोग स्वस्थ हो गए हैं। बीच में भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. मुरली मनोहर जोशी ने राघवेंद्र मिश्र को फोन कर उनका हालचाल लिया।
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नहीं रहे कवि-आलोचक डॉ.क्षमाशंकर पांडेय, छतनाग घाट पर अंतिम संस्कार

कवि-आलोचक डॉ.क्षमाशंकर पांडेय नहीं रहे। एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान बुधवार की दोपहर उन्होंने अंतिम संास ली। दोपहर बाद छतनाग घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। दर्जनों पुस्तकों के लेखक डॉ.क्षमा शंकर ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षा हासिल करने के बाद काशी हिंदू विश्वविद्यालय से साहित्यकार डॉ.शिव प्रसाद सिंह के निर्देशन में शोध पूरा किया। वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में रिसर्च एसोसिएट भी रहे। मिर्जापुर स्थित एक राजकीय महाविद्यालय में हिंदी अध्यापन के दौरान वह एसोसिएट प्रोफ़ेसर होकर रिटायर हुए।

उनकी प्रमुख किताबों में मुक्तिबोध की काव्य भाषा, शताब्दी बदल रही है, उग्र विमर्श, तुलसीदास: एक अध्ययन, नए सवाल मिले, पांय न पांख, भारतीय नारीवाद: स्थिति और संभावना, धूमिल, रामकथा विविध संदर्भ, हर गवाही आपकी, संदर्भ 1857, महिला सशक्तिकरण: उपलब्धियां और भविष्य, हमीरपुर और महोबा जनपदों का फाग, हिंदी का बाज़ार:बाज़ार की हिंदी, 1857 स्मृति और यथार्थ तथा कारागार के अतिरिक्त गांधी का देश, हंसी खो गई है एवं समय संवादी उग्र (यंत्रस्थ) आदि शामिल हैं।

सम्मान-पुरस्कार
  • उ.प्र. हिंदी संस्थान का आलोचना के लिए रामचंद्र शुक्ल पुरस्कार.
  • हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग से साहित्य महोपाध्याय की उपाधि

रचनाकारों ने निधन पर जताया शोक

वरिष्ठ पत्रकार गोपाल रंजन ने कहा, सेवानिवृत्ति के बाद भी वह झूंसी के सरायतकी स्थित मकान में रहकर स्वतंत्र रूप से हिंदी की सेवा में तत्पर थे। साहित्य भंडार के विभोर अग्रवाल ने भी उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। कहा, साहित्य भंडार से उनकी दो किताबें धूमिल, संदर्भ-1857 प्रकाशित हुई हैं। साहित्यकार रविनंदन सिंह ने कहा, डॉ.क्षमाशंकर का जाना साहित्य जगत पर बज्रपात है। वह नवगीत के सशक्त हस्ताक्षर थे।
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