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किसी संगठन के अध्यक्ष बने तो कैसे दूर करेंगे भ्रष्टाचार

Allahabad Bureauइलाहाबाद ब्यूरो Updated Mon, 21 Oct 2019 12:42 AM IST
UPPSC PCS 2018 Main's
UPPSC PCS 2018 Main's - फोटो : CITY DESK
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अफसर बनने से पहले पीसीएस मेंस के अभ्यर्थियों से पूछा गया सवाल
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चौथे पेपर में परिस्थिति आधारित रोचक सवालों में उलझ गए परीक्षार्थी
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) में इस साल तीन सबसे बड़ी बातें हुईं। आयोग के नए अध्यक्ष डॉ. प्रभात कुमार ने कार्यभार संभाला, एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती में पेपर लीक मामले में पूर्व परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार को जेल जाना पड़ा और पीसीएस मुख्य परीक्षा पहली बार संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा की तर्ज पर आयोजित की गई है। बदले पैटर्न पर रविवार को सामान्य अध्ययन के तीसरे और चौथे प्रश्नपत्र की परीक्षा हुई। इसमें 89 फीसदी अभ्यर्थी उपस्थित रहे। चौथे प्रश्नपत्र में पूछे गए परिस्थिति एवं नैतिकता आधारित सवालों में अभ्यर्थी उलझे रहे।
सवाल आया कि अभी हाल ही में एक सरकारी संगठन के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार ग्रहण किया है। अपने कार्यालय में पहले ही दिन आ पाते हैं कि संगठन में कई अनियमितताएं विद्यमान हैं। स्टाफ समय का पाबंद नहीं है, स्टाफ व्यर्थ बातचीत में अपना समय नष्ट करता है, जन शिकायतों पर कोई त्वरित कार्रवाई नहीं होती है, संगठन में सभी स्तरों पर भ्रष्टाचार व्याप्त है, संगठन द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ता निम्न स्तर की है। आप अपने स्टाफ को किस प्रकार से प्रेरित करेंगे जिससे संगठन की उपर्युक्त कर्मियों का निदान हो सके? आठ नंबर के इस सवाल की 125 शब्द सीमा में विवेचना करने को कहा गया। परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों ने बताया कि परिस्थिति आधारित तीन सवाल पूछे गए। तीनों ही सवाल रोचक थे लेकिन, जवाब देना कठिन था।
दूसरा सवाल 12 नंबर का था और 200 शब्दों में इसकी विवेचना करनी थी। निशांत सामाजिक रूप से संवेदनशील, समाजवादी विचार के बुद्धिजीवी एवं प्रोफेसर हैं। वे अपने लेखों, भाषणों एवं मीडिया के माध्यम से मजदूरों, अल्पसंख्यकों, दलितों, महिलाओं एवं जनजातियों के स्वर को मुखरित करते हैं। एक पार्टी भी उन्हें अपने थिंक टैंक में रखे हुए है। वह आह्वान करते हैं कि सम्राटजनों, प्रबुद्धों, राजनीतिज्ञों एवं अधिकारियों को अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में प्रवेश दिलाना चाहिए। पता चलता है कि निशंात स्वयं अपने बच्चों को एक अभिजात्य स्कूल में प्रवेश दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। उनके इस कृत्य की आलोचना भी होती है। क्या निशांत को अपने बच्चे को सरकारी स्कूल में प्रवेश दिला देना चाहिए? क्या निशांत को बौद्धिक विमर्श त्याग देना चाहिए? क्या उन्हें अपनी पार्टी के लोगों को अपने समर्थन में खड़ा करना चाहिए या अपने बच्चे का प्रवेश अभिजात्य स्कूल में करा देना चाहिए?
तीसरा सवाल भी 12 अंकों का था और 200 शब्दों में तर्कपूर्ण ढंग से इसकी व्याख्या करनी थी। पूछा गया कि एक जन सूचना अधिकारी को ‘सूचना का अधिकार अधिनियम’ के तहत एक आवेदन मिलता है। वांछित सूचना एकत्र करने पर पता चलता है कि वह सूचना खुद उसी के द्वारा लिए गए निर्णयों से संबंधित है, जो पूर्ण रूप से सही नहीं थे। इन निर्णयों में अन्य कर्मचारी भी सहभागी थे। सूचना सामने आने पर उनके एवं अन्य सहयोगियों पर कार्रवाई हो सकती है और सजा मिल सकती है। सूचना सामने न आने पर कम सजा या उससे मुक्ति भी मिल सकती है। जनसूचना अधिकारी ईमानदार एवं कर्तव्यनिष्ठ वयक्ति हैं, लेकिन जो निर्णय के लिए आरटीआई के तहत निर्णय लिया गया वह गलत था। वह अधिकारी आपके पास सलाह के लिए आता है। ऐसी स्थिति में आप उस क्या सलाह देंगे?
तीसरे पेपर में प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल
सामान्य अध्ययन के तीसरे पेपर में उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था से जुड़ा सवाल पूछा गया। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में कानून और व्यवस्था के लिए चुनौतियां तथा उनके समाधान पर 200 शब्दों में टिप्पणी करने को कहा गया। यह सवाल 12 अंक का था। उत्तर प्रदेश से जुड़े कुछ अन्य महत्वपूर्ण और समसामयिक विषयों से जुड़े सवाल पूछे गए। उत्तर प्रदेश के अर्थिक विकास में अंतर-क्षेत्रीय असमानताओं को स्पष्ट करने तथा पिछड़े क्षेत्र के बाधक कारकों का 200 शब्दों में उल्लेख करने को कहा गया। यह सवाल भी 12 अंक का था। इसके अलावा 12 अंक के एक अन्य सवाल में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के प्रमुख प्रावधानों का परीक्षण करने और इसके क्रियान्वयन की प्रस्थिति का 200 शब्दों में उल्लेख करने को कहा गया।
पहली बार नैतिकता से जूझे अभ्यर्थी
प्रतियोगी परीक्षाओं एवं दर्शनशास्त्र विषय के विशेषज्ञ डॉ. अतुल मिश्र ने बताया कि पीसीएस मेंस में पहली बार नैतिकता से जुड़े सवालों से जूझे। हालांकि एथिक्स की केस स्टडी कम होने से अभ्यर्थियों को थोड़ी राहत मिली लेकिन अभ्यर्थियों से उच्च स्तरीय प्रश्न पूछे गए। पीसीएस मेंस में पहली बार नैतिकता का प्रश्नपत्र पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है, जिसे लेकर परीक्षार्थियों में उत्सुकता रही।
दार्शनिक पृष्ठभूमि के अभ्यर्थियों को राहत
दार्शनिक पृष्ठभूमि के अभ्यर्थियों के लिए चतुर्थ प्रश्नपत्र राहत वाला रहा, जिसमें गांधी, कांट के चिंतन, मूल्य, नैतिकता, अंतरात्मा, सत्यनिष्ठा के दार्शनिक आधार पर सीधे सवाल पूछे गए। इसके साथ ही चौथा प्रश्नपत्र वर्तमान में घट रही घटनाओं पर अधिकारियों और अन्य वरिष्ठ के कार्यों के मूल्यांकन पर आधारित रहा।
कल ऐच्छिक विषय के साथ पूरी होगी परीक्षा
पीसीएस-2018 के तहत सोमवार को कोई परीक्षा नहीं है। ऐच्छिक विषय की परीक्षा 22 अक्तूबर को आयोजित की जाएगी। पूर्व की व्यवस्था में दो वैकल्पिक विषय होते थे लेकिन पैटर्न बदलने के बाद अभ्यर्थियों को अब केवल एक वैकल्पिक विषय की परीक्षा देनी होगी। मंगलवार को ऐच्छिक विषय के पहले पेपर की परीक्षा सबह 9.30 से 12.30 बजे और दूसरे पेपर की परीक्षा अपराह्न दो से शाम पांच बजे तक आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही सोमवार को पीसीएस मुख्य परीक्षा पूरी हो जाएगी।
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