प्रयागराज: सीएए के खिलाफ गांधी की पुण्य तिथि के दिन अधिवक्ता मंच ने किया प्रदर्शन

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: Abhishek Singh Updated Thu, 30 Jan 2020 10:10 PM IST
CAA PROTEST
CAA PROTEST - फोटो : पीटीआई (फाइल फोटो)
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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्य तिथि के अवसर पर अधिवक्ताओं की ओर से संविधान विरोधी नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के विरोध में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के क्रम में इलाहाबाद में हाई कोर्ट के सामने बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर की प्रतिमा के समक्ष सीएए, एनआरसी और एनआरपी विरोधी अधिवक्ता मंच की ओर से विरोध प्रदर्शन एवम सभा हुई।
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सभा की शरुआत में वरिष्ठ अधिवक्ता के. के. राय ने बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 संविधान के मूल भावना के खिलाफ है और यह धर्म के आधार पर भी भेद करता है जो कि संविधान के अनुच्छेद 14 का खुला उल्लंघन है।


उन्होंने एनआरसी, एनपीआर और सीएए के विरोध में चल रहे आंदोलनों का समर्थन करते हुए इलाहाबाद में जारी रोशन बाग के प्रदर्शन का समर्थन किया और साथ ही साथ पुलिस को अपनी सीमाओं में रहने की हिदायत देते हुए उन्होंने कहा कि आंदोलन के साथियों को झूठे मुकदमों में फंसाकर भय पैदा करने की कोशिश की जा रही है, जो निंदनीय है।

उन्होंने कहा कि पुलिस भी कानून से ऊपर नहीं है और सत्ता के दबाव में पुलिस द्वारा कानून के दुरुपयोग पर जबाबदेही पुलिस की होगी। उन्होंने रोशनबाग के प्रदर्शनकारी सारा सिद्दकी और उमर खालिद पर झूठी एफआईआर दर्ज करने के लिए खुल्दाबाद थानाध्यक्ष को आगाह करते हुए कहा कि तुम दरोगा नहीं रहोगे तब भी रोशन बाग रहेगा।

सभा को वरिष्ठ अधिवक्ता इन्द्रसेन सिंह, लालजी यादव, धीरेंद्र यादव, सीमा आज़ाद, राकेश प्रसाद, राम कुमार गौतम, इफ्तेदार अहमद बादशाह, इब्ने अहमद मो. आलम, रमेश यादव, महा प्रसाद, एम.पी.पाल, आशुतोष तिवारी, सईद अहमद, अनंत गुप्ता, नाथूराम बौद्ध, शमशुल इस्लाम, तथा नागरिक समाज की ओर से डॉ. आशीष मित्तल आदि ने संबोधित किया, जबकि सभा का संचालन राजवेन्द्र सिंह ने किया।

सभा में महात्मा गांधी के जीवन संघर्षों और उनके योगदान को याद करते हुए देश को एक रंग में रंगने और धार्मिक जातीय आधार पर बांटने की कोशिशों की निंदा करते हुए विभाजनकारी सीएए, एनआरसी और एनपीआर को रद्द करने की मांग की गई। देश की आर्थिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके लिए सरकार की पूंजीपरस्त नीतियों को जिम्मेदार ठहराया गया। अभिव्यक्ति की आजादी को सीमित करने की कोशिशों और पुलिस के राजनैतिक स्तेमाल की नींद की गई।

सभा के बाद सभी अधिवक्तागण उच्च न्यायालय के गेट नंबर 3 के सामने खड़े होकर भारतीय संविधान की प्रस्तावना का पाठ किया और  महात्मा गांधी की याद में दो मिनेट का मौन रखा गया। इस दौरान गांधी के हत्यारे मुर्दाबाद, साम्प्रदायिक ताकतें मुरादाबाद, सीएए, एनआरसी और एनआरपी रद्द करो आदि  नारे  लगाए गए। इस दौरान इमरान, नियाज अहमद खान, कशान अहमद, सुनील मौर्य, अमित, राकेश यादव, घनश्याम मौर्य, प्रमोद कुमार गुप्ता, वहाज अहमद, मो. सरफराज, राशिद अली, जफर, चंद्रपाल, बुद्ध प्रकाश, चार्ली प्रकाश, उपेंद्र पुष्कर, हरेंद्र राम, आदि  बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित नागरिक समाज की ओर से प्रदर्शन के समर्थन में अविनाश मिश्र, मनीष उपस्थित रहे।

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