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पुलिस ने दिहाड़ी मजदूरों को बनाया निशाना

Allahabad Bureauइलाहाबाद ब्यूरो Updated Wed, 29 Jan 2020 02:27 AM IST
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प्रयागराज। सीएए और एनसीआर के विरोध में हुए प्रदर्शन को दबाने के लिए पुलिस ने उन मुस्लिम बस्तियों को निशाना बनाया, जो समाज के सबसे निचले तबके से थे और आर्थिक रूप से बहुत कमजोर, कूड़ा बीनने वाले, दिहाड़ी मजदूर, छोटे ढाबों में काम करने वाले थे। ये आरोप उन छात्रों ने लगाए हैं, जिन्होंने सीएए और एनआरसी के विरोध में भड़की हिंसा के बाद 15 प्रभावित जिलों का दौरा किया और एक सर्वे के तहत महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाए।
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इस सर्वे में इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) समेत बीएचयू, डीयू, जेएनयू, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, आईआईटी दिल्ली, आईआईएमसी, एनएलयू, आईआईएम अहमदाबाद जैसे संस्थानों के छात्र शामिल थे। इविवि छात्रसंघ के निवर्तमान उपाध्यक्ष अखिलेश यादव, राजनीति विज्ञान की शोधार्थी मृदुला मंगलम, बीएचयू छात्रसंघ के पूर्व मामंत्री विकास सिंह और बीएचयू के छात्र नेता रजत सिंह ने सोमवार को इविवि के निराला सभागार में हुई प्रेस कांफ्रेस में 25 पन्नों की सर्वे रिपोर्ट मीडिया के समक्ष रखी।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मेरठ, कानपुर, बिजनौर, फिरोजबाद, सहारनपुर, भदोही, कानपुर, लखनऊ, मऊ, वाराणसी, फैजाबाद, संभल, शामली में जब छात्रों ने जाकर जमीनी हकीकत देखी तो पुलिस की बर्बरता को सच सामने आया। छात्रों का आरोप है कि पुलिस की गोलीबारी में मारे गए प्रदर्शनकारियों के शवों को घर ले जाने की अनुमति नहीं दी गई। सभी को पैर के ऊपर गोली मारी गई। बहुत से लोगों को अस्पतालों में इलाज कराने से रोक दिया गया, जिससे उनकी मौत हो गई। जिन्हें इलाज मिला, उनकी एक्सरे एवं अन्य रिपोर्ट अस्पतालों ने अपने पास रख ली। महीने भर बाद भी मृतकों के परिजनों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं दी गई।
छात्रों का यह आरोप भी है कि पुलिस ने झूठी कहानी बनाई कि जो लोग घायल हुए या मारे गए, या तो वे मुस्लिम समुदायों के बीच गैंगवार में शामिल थे या प्रदर्शनकारियों द्वारा को खुद को घायल किया गया। इसके अलावा पुलिस ने यह कहते हुए मौतों के लिए एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया कि उन्होंने किसी को गोली नहीं मारी। छात्रों की मांग है कि इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज से कराई जाए। सभी फर्जी मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएं। पीड़ित परिवारों को पोस्टमार्ट रिपोर्ट सौंपी जाए। नुकसान की भरपाई के लिए वसूली का नोटिस जारी करने से रोका जाए और जो नोटिस जारी हुए हैं, उन्हें वापस लिया जाए।
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