Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj ›   Petition filed in Allahabad High Court for clinical trial of vaccine made from Gangajal

गंगाजल से बनी वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल की अनुमति की मांग में हाईकोर्ट में याचिका दायर

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 02 Jul 2021 12:22 AM IST
allahabad high court
allahabad high court - फोटो : social media
विज्ञापन
ख़बर सुनें

गंगा जल से बनी कोविड 19 की वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल की अनुमति देने की मांग में इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। कोर्ट ने याचिका पर इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च एवं भारत सरकार की इथिक्स कमेटी सहित अन्य सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। वरिष्ठ अधिवक्ता और गंगा मामले की जनहित याचिका में एमिकस क्यूरी अरुण गुप्ता की याचिका पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एमएन भंडारी तथा न्यायमूर्ति राजेन्द्र कुमार की खंडपीठ ने सुनवाई की। 



गुप्ता का कहना है कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डा. विजय नाथ मिश्र के नेतृत्व में डाक्टरों की टीम ने गंगा जल पर रिसर्च कर नोजल स्प्रे वैक्सीन तैयार की है। जो मात्र 30 रुपये में लोगों को कोरोना से राहत दे सकती है। इसकी रिपोर्ट तैयार कर इथिक्स कमेटी को भेजी गई है और क्लीनिकल ट्रायल की अनुमति मांगी गई है। किन्तु कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है। बीएचयू के डाक्टर का दावा है कि वायरो फेज थिरेपी से कोरोना का खात्मा किया जा सकता है।

 

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
अभी तक जितनी भी वैक्सीन हैं वे वायरस को डी ऐक्टीवेट करती है जब कि गंगा जल से प्रस्तावित वैक्सीन कोरोना को खत्म कर देगी। बी एच यू के डाक्टरों की टीम ने आईसीएमआर व आयुष मंत्रालय को  क्लिनिकल ट्रायल की अनुमति के लिए शोध प्रस्ताव भेजा है। इनके द्वारा कोई रूचि नहीं ली जा रही है। याचिका मे मांग की गई है कि आयुष मंत्रालय व आईसीएमआर को डॉ. वीएन मिश्र की टीम को क्लिनिकल ट्रायल की अनुमति देने का समादेश जारी किया जाए तथा पुणे के वायरोलाजी लैब में  गंगा जल से तैयार वैक्सीन का टेस्ट कराया जाए। शोध प्रस्ताव राष्ट्रपति को भी भेजा गया है, जिसमें दावा किया गया है कि गंगा जल का क्लिनिकल ट्रायल कर कोरोना को जड़ से खत्म करने की वैक्सीन तैयार की जा सकती है।
 

vaccine
vaccine
याची का कहना है कि 1896 मे ब्रिटिश  वैक्टीरियोलाजिस्ट अनेस्ट हाकिंस ने गंगा जल पर शोध किया था। उनकी रिपोर्ट ब्रिटिश मेडिकल जनरल मे छपी थी।गंगोत्री के जल मे सेल्फ प्यूरीफाइंग क्वालिटी पाई गई थी। अन्य कई देशों की मैग्जीन मे भी शोध पत्र छपे हैं। याची अरूण कुमार गुप्ता ने 28 अप्रैल 2020 को सभी शोधपत्र  नेशनल क्लीन गंगा मिशन को भेजा है और महानिदेशक आईसीएमआर को भी देकर क्लिनिकल ट्रायल की अनुमति देने की मांग की है। याची गंगा प्रदूषण मामले मे कायम जनहित याचिका मे न्यायमित्र है। वह गंगा जल की बेहतरी के लिए लगा हुआ है। ऐसी ही रिपोर्ट भरत झुनझुनवाला ने भी भेजी है। आईसीएमआर ने मनमाने पर सारी रिसर्च को नकार दिया है।

राष्ट्रपति के सचिव ने रिपोर्ट आयुष मंत्रालय को भेजी थी, जिसने साइंटिफिक अध्ययन के अभाव के कारण इस पर विचार ही नहीं किया। साइंटिफिक अध्ययन आयुष मंत्रालय व आईसीएमआर की अनुमति बगैर संभव नहीं है। जबकि बीएचयू के डॉक्टर की टीम ने जो नोजल स्प्रे वैक्सीन तैयार की। लगभग तीन सौ लोगों पर प्रयोग के सकारात्मक परिणाम आए हैं। एक लेख हिन्दी इंटरनेशनल जर्नल आफ माइक्रोबायोलॉजी मे 19 मार्च 2020 को प्रकाशित भी हुआ है। इस पर यह याचिका दाखिल की गई है और गंगा जल पर शोध से तैयार वैक्सीन का क्लिनिकल ट्रायल कराने की माग की गई है।
विज्ञापन

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
  • Downloads
    News Stand

Follow Us

  • Facebook Page
  • Twitter Page
  • Youtube Page
  • Instagram Page
  • Telegram
एप में पढ़ें

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00