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पर्यावरण प्रदूषण पर हाईकोर्ट नाराज, प्रमुख सचिव को नोटिस

अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज Updated Wed, 20 Nov 2019 12:45 AM IST
Allahabad High Court
Allahabad High Court - फोटो : PTI
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पर्यावरण प्रदूषण की रोकथाम के लिए जारी निर्देशों का पालन न करने पर हाईकोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए प्रमुख सचिव पर्यावरण कल्पना अवस्थी और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव प्रशांत गंगवार, मेरठ के क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी आरके त्यागी को अवमानना का नोटिस जारी किया है।
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अदालत ईट भट्ठों में फ्लाई ऐश (बिजली उत्पादन इकाइयों से निकलने वाली राख) का इस्तेमाल नहीं किए से नाराज है। इन अधिकारियों से पूछा गया है कि क्यों न इनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही प्रारंभ की जाए।

उत्कर्ष पवार की अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने एक मई 2014 को पारित हाईकोर्ट के आदेश और 14 सितंबर 1999 की पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की अधिसूचना का पालन नहीं करने को अदालत की अवमानना माना है।

याची का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी, विभू राय, अनुभव गौड़ आदि का कहना था कि मई 2014 और दिसंबर 2014 में हाईकोर्ट ने दो अलग- अलग जनहित याचिकाओं पर ईट भट्ठों से पर्यावरण को हो रहे नुकसान की रोकथाम के लिए विस्तृत आदेश पारित किया था। इसमें भट्ठों की जांच, उनको लाइसेंस देने सहित तमाम शर्तें शामिल थीं।

इसी क्रम में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने 1999 में अधिसूचना जारी कर ईट भट्ठों में बिजली घरों से निकलने वाली राख का 25 प्रतिशत इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया। दिल्ली हाईकोर्ट ने 2004 में सभी राज्यों को इस अधिसूचना का पालन करने का निर्देश दिया।

इसके बावजूद पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में बिना पर्यावरण मानकों का पालन किए बड़ी संख्या में ईट भट्ठों के संचालन की अनुमति दी गई। कोर्ट ने याची के अधिवक्ता को प्रमुख सचिव पर्यावरण यूपी को याचिका में पक्षकार बनाने का आदेश देते हुए उनके सहित अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।

डीएम बदायूं को भी अवमानना नोटिस
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण हेतु ईट भट्टों को बिना लाइसेंस के संचालन की अनुमति नहीं देने संबंधी आदेश का पालन नहीं किए जाने पर गहरी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने जिलाधिकारी बदायूं को अवमानना नोटिस जारी कर चार सप्ताह में स्पष्टीकरण तलब किया है।

बदायूं के निष्कर्ष पवार की अवमानना याचिका और यह आदेश न्यायमूर्ति एम सी त्रिपाठी ने दिया। याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी, विधु विभु राय और अनुभव गौड़ ने पक्ष रखा।

याची अधिवक्ताओं का कहना था कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 3 दिसंबर 2014 और 1 मई 2014 को दो अलग-अलग जनहित याचिकाओं पर पारित आदेश का पालन नहीं किया जा रहे हैं। बिना पर्यावरण अनापत्ति के संचालित हो रहे भट्ठों से पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है।
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