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मिलावट रोकने के लिए सरकार के पास नहीं ठोस तंत्र

इलाहाबाद Updated Tue, 23 May 2017 01:54 AM IST
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खाद्य सामग्रियों की बिक्री करने वाले व्यापारियों और दुकानदारों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। नियंत्रक महालेखाकार की रिपोर्ट कुछ इसी ओर इशारा कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार खाद्य कारोबारियों की वास्तविक संख्या कितनी है इसका 2011 से कोई सर्वे नहीं कराया गया है। एक चौथाई से अधिक दुकानें तो बिना लाइसेंस के ही चल रही हैं। गौर करने वाली बात यह है कि 50 फीसदी से अधिक कारोबारियों को बिना निरीक्षण के ही लाइसेंस दे दिया गया।
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प्रधान महालेखाकार पीके कटारिया ने सोमवार को प्रेसवार्ता में बताया कि  खाद्य पदार्थों की बिक्री के लिए लाइसेंस लेने तथा पंजीकरण का निर्धारित मानक है लेकिन हर स्तर पर इसकी अनदेखी की गई। विभाग की ओर से उपलब्ध सूची में से 1250 प्रकरणों की लेखा परीक्षा की ओर से जांच कराई गई। इसमें पाया गया कि 335 कारोबारी बिना लाइसेंस या पंजीकरण के ही खाद्य सामग्रियों की बिक्री कर रहे हैं। कटारिया ने बताया कि खाद्य सुरक्षा के अभिलेखों में पाया गया कि 31 मार्च 2016 तक कुल 45868 कारोबारियों को लाइसेंस निर्गत किया गया था। इनमें से 25678 को लाइसेंस देने से पहले निरीक्षण नहीं किया गया। 10 जिलों में निर्गत लाइसेंस की जांच की गई तो उनमें से आठ जिलों में 71 से 99 प्रतिशत प्रतिष्ठानों का निरीक्षण नहीं किया गया था। इनमें से वाराणसी, आगरा, लखीमपुर खीरी, सीतापुर में 90 प्रतिशत प्रतिष्ठान हैं, जिन्हें बिना निरीक्षण के लाइसेंस दे दिया गया।

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