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शासन में अटकी दृष्टि बाधित छात्रों की फाइल

अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Mon, 26 Mar 2018 12:36 AM IST
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अन्य भर्ती संस्थाओं की तरह उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की परीक्षाओं में भी 40 फीसदी से अधिक दृष्टिबाधित छात्र-छात्राओं को राइटर उपलब्ध कराए जाएं और पेपर सॉल्व करने के लिए बड़े फॉन्ट की बुकलेट दी जाए, दृष्टि बाधित छात्रों की यह मांग मुख्यमंत्री तक पहुंच गई है और सीएम कार्यालय ने इस पर आवश्यक कार्रवाई के लिए छात्रों से ओर मिला पत्र कार्मिक विभाग को भेज दिया है। हालांकि यूपीपीएससी ने काफी पहले ही इस बाबत एक प्रस्ताव शासन को भेजा था, जो अब तक लंबित पड़ा हुआ है। छात्र कह रहे हैं कि उनकी मांगें आरओ-एआरओ प्रारंभिक परीक्षा के आयोजन से पहले पूरी की जाए।
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राष्ट्रीय दृष्टिबाधित छात्रावास रहने वाले आदित्य तिवारी, संताष पटेल समेत कुछ छात्रों ने पिछले दिनों आयोग के सचिव से मिलकर अपनी समस्या बताई थी। छात्रों का कहना था कि यूपीपीएससी केवल 100 फीसदी दृष्टिबाधित होने पर ही परीक्षा में राइटर साथ ले जाने की अनुमति देता है जबकि अन्य भर्ती संस्थाएं 40 फीसदी से अधिक दृष्टिबाधित होने पर राइटर ले जाने की मंजूरी देती हैं। इसके अलावा परीक्षा से पहले पूछा जाता है कि परीक्षार्थी को छोटी या बड़ी, किस फॉन्ट की बुकलेट चाहिए। सवाल सुनकर जवाब बताने में वक्त लगता है, सो अन्य भर्ती संस्थाएं पेपर हल करने के लिए 20 मिनट का अतिरिक्त समय देती हैं, जबकि यूपीपीएससी यह सुविधा नहीं देता है।


अभ्यर्थियों की इस मांग पर सचिव ने उन्हें बताया था कि इस बाबत एक प्रस्ताव काफी पहले शासन को भेजा गया था, लेकिन उस पर अभी निर्णय नहीं हुआ है। सचिव से वार्ता के बाद छात्र मुख्यमंत्री से मिलने लखनऊ गए और वह अपनी समस्या के बारे में बताया। इसके बाद छात्रों ने प्रमुख सचिव कार्मिक विभाग के प्रतिनिधि को भी ज्ञापन सौंपा। सीएम कार्यालय से छात्रों के पास मैसेज आया है कि आवश्यक कार्रवाई के लिए उनका पत्र कार्मिक विभाग में भेज दिया गया है। छात्रों का कहना है कि उन्हें आश्वासन नहीं चाहिए। उनकी मांग है कि शासन शीघ्र ही इस मामले में कोई निर्णय ले ताकि आठ अप्रैल को प्रस्तावित आरओ-एआरओ प्रारंभिक परीक्षा में उन्हें यह सुविधाएं मिल सकें।
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