बेहतर अनुभव के लिए एप चुनें।
INSTALL APP

धर्म की आड़ न लें: इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी, सिर्फ विवाह के लिए धर्म परिवर्तन स्वीकार्य नहीं

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: Vikas Kumar Updated Sat, 31 Jul 2021 07:42 PM IST

सार

कोर्ट ने कहा कि संविधान सबको सम्मान से जीने का भी अधिकार देता है। सम्मान के लिए लोग घर छोड़ देते हैं, धर्म बदल लेते हैं। कोर्ट ने कहा कि जब व्यक्ति को अपने धर्म में सम्मान नहीं मिलता है तो वह दूसरे धर्म की ओर झुकता है। धर्म के ठेकेदारों को अपने में सुधार लाना चाहिए।
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
ख़बर सुनें

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि भारत का संविधान प्रत्येक बालिग नागरिक को अपनी मर्जी से धर्म अपनाने व पसंद की शादी करने की आजादी देता है। इस पर कोई वैधानिक रोक नहीं है। मगर सिर्फ विवाह के लिए धर्म परिवर्तन करना स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के लिली थॉमस और इलाहाबाद हाईकोर्ट के नूरजहां बेगम केस में प्रतिपादित विधि सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि इस्लाम में विश्वास बिना  केवल शादी के लिए एक गैर मुस्लिम का धर्म परिवर्तन करना शून्य है।
विज्ञापन


जबरन धर्मांतरण कराकर हिंदू लड़की से निकाह करने के आरोपी जावेद की जमानत अर्जी खारिज करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने दिया है। कोर्ट ने कहा कि संविधान सबको सम्मान से जीने का भी अधिकार देता है। सम्मान के लिए लोग घर छोड़ देते हैं, धर्म बदल लेते हैं। कोर्ट ने कहा कि जब व्यक्ति को अपने धर्म में सम्मान नहीं मिलता है तो वह दूसरे धर्म की ओर झुकता है। धर्म के ठेकेदारों को अपने में सुधार लाना चाहिए। क्योंकि बहुल नागरिकों के धर्म बदलने से देश कमजोर होता है। विघटनकारी शक्तियों को इसका लाभ मिलता है। 


धर्म में कट्टरता, भय व लालच का कोई स्थान नहीं
कोर्ट ने कहा, इतिहास गवाह है कि हम बंटे, देश पर आक्रमण हुआ और हम गुलाम हुए। सुप्रीम कोर्ट ने भी धर्म को जीवन शैली माना है और कहा है कि आस्था व विश्वास को बांधा नहीं जा सकता। इसमें कट्टरता, भय लालच का कोई स्थान नहीं है। कोर्ट ने कहा कि शादी एक पवित्र संस्कार है। शादी के लिए धर्म बदलना शून्य व स्वीकार्य नहीं हो सकता। कोर्ट ने इच्छा के विरुद्ध झूठ बोल कर धर्मांतरण करा निकाह करने वाले जावेद उर्फ जावेद अंसारी को जमानत पर रिहा करने से इनकार कर दिया है।

पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया है कि उससे सादे व उर्दू में लिखे कागजों पर दस्तखत कराए गए। जावेद पहले से शादीशुदा था, उसने झूठ बोला और धर्म बदलवाया। बयान के समय भी वह डरी सहमी थी। याची का कहना था कि दोनों बालिग हैं। अपनी मर्जी से धर्म बदलकर शादी की है। धर्मांतरण कानून लागू होने से पहले ही धर्म बदल लिया गया था।

पीड़िता ने अपने बयान में कहा कि वह 17 नवंबर 20 को शाम पांच बजे जलेसर बाजार गई थी। कुछ लोगों ने जबरन गाड़ी में बैठा लिया। उसे कुछ खिलाया गया, जिससे वह बेहोश हो गई। दूसरे दिन जब कुछ होश आया तो खुद को वकीलों की भीड़ में कड़कड़डूमा कोर्ट में पाया, वहीं कागजों पर दस्तखत लिए गए। 18 नवंबर को धर्मांतरण कराया गया, फिर कई जगहों पर ले गए। 28 नवंबर को निकाह कराया गया। मौका मिलने पर पुलिस को बुलाया। 22 दिसंबर को पीड़िता को पुलिस ने बरामद किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X