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आखिर कैसे और किसके खिलाफ होगी कार्रवाई

Allahabad Updated Wed, 05 Nov 2014 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। कार्यपरिषद की बैठक में इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर में अराजकता के लिए जिम्मेदार छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्णय तो ले लिया गया लेकिन कार्रवाई किसके खिलाफ और कैसे हो यह अब भी बड़ा सवाल है। स्थिति यह है कि कुलपति के साथ दुर्व्यवहार करने वाले छात्र के खिलाफ भी कोई कार्रवाई होने नहीं जा रही। इस मामले में अभी लिखित शिकायत का इंतजार है। जबकि परिसर की अराजकता पर पहली बार बुलाई गई आकस्मिक बैठक में कुलपति ने उनके साथ हुई घटना का जिक्र किया था।
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गौर करने वाली बात यह है कि जिस घटना के परिप्रेक्ष्य में विश्वविद्यालय अध्यापक संघ (आटा) फिर कार्यपरिषद की बैठक बुलाई गई। उस मामले में भी कोई कार्रवाई नहीं होने जा रही। बुधवार को गेस्ट फैकेल्टी के लिए साक्षात्कार के दौरान डीन आर्ट्स कार्यालय में कुछ छात्रों ने शिक्षकों के साथ बदसलूकी की थी। उस दौरान उनका व्यहवहार काफी अमर्यादित रहा। इसके एक दिन बाद मध्यकालीन विभाग में कुछ छात्रों ने अध्यक्ष को बंधक बना लिया। इन घटनाओं के मद्देनजर आटा की बैठक हुई, जिसमें अराजकता की स्थिति दूर नहीं होने पर विश्वविद्यालय बंद कर देने तक के सुझाव दिए गए। इसके बाद कार्यपरिषद की बैठक में भी अराजकता फैलाने वाले छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्णय गया लेकिन इन बैठकों में जोर-शोर से व्यथा बताने वाले शिक्षक शिकायत लिखाने तक के लिए आगे नहीं आए। इनमें से सिर्फ मध्यकालीन इतिहास विभाग में शोध छात्र के खिलाफ कार्रवाई हुई है लेकिन उसमें भी भेदभाव के आरोप लग रहे हैं। ऐसे में परिसर की अराजकता के खिलाफ पूरी कवायद औपचारिक बनकर रह गई है।
शिक्षकों पर हमले के कई अन्य घटनाएं भी हैं लेकिन किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। पिछले साल नवंबर में ही जेके इंस्टीट्यूट में कुछ अराजक तत्वों ने शिक्षकाें को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा था। नाराज शिक्षकों ने 15 दिन तक शैक्षिक कार्य बाधित रखा। रोड शो भी किया लेकिन कार्रवाई के नाम पर एक छात्र को निलंबित कर खानापूर्ति कर ली गई। पीड़ित शिक्षकों ने हमला करने वाले छात्रों को पहचानने से मना कर दिया। ऐसे में निलंबन की कार्रवाई का भी आधार खत्म हो गया। इस तरह के अन्य मामले हैं जिनमें कोई लिखित शिकायत न होने को आधार बनाकर मामले को रफा-दफा कर दिया गया। चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर आरके उपाध्याय का कहना है कि कुलपति ने बैठक में सिर्फ अपनी बात रखी थी। उस मामले में कोई शिकायत उनके पास नहीं पहुंची है। डीन ऑफिस में हंगामे की बाबत प्रोफेसर उपाध्याय का कहना है कि उसमें काम बाधित होने की बात आई थी लेकिन कोई शिकायत नहीं मिली है। वे लोग पहुंचे तो छात्रों के बीच आपस में ही विवाद की बात सामने आई। उन्हें सिर्फ मध्यकालीन इतिहास विभाग में हुई घटना की शिकायत मिली है। उसमें कार्रवाई की जा रही है। छात्र को निलंबित करने के साथ सोमवार को चार्जशीट भी भेज दी गई।
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