‘भइया हमकेत पनियइ पियइ के नाहीं मिलत’

Allahabad Updated Thu, 08 May 2014 05:30 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। दिन में तकरीबन 11 बजे। 65 वर्ष की कुंवरी देवी। तेज धूप में लाल हो चुके पथरीले राह पर तकरीबन डेढ़ किलोमीटर की दूरी तय करके कोरांव के पिसरी बूथ पर वोट देने पहुंची। उन्हें देखकर सहज ही अनुमान लगाया जा सकता था कि विकास के नारों और उनके लिए शुरू बड़ी-बड़ी योजनाओं से वह अछूती हैं। पैर में चप्पल भी नहीं। वोट डालने का मकसद बताकर उन्होंने बड़ी मार्मिक तस्वीर सामने रखी। एक सवाल के जवाब में सांवली ने कहा, ‘भइया हमके त अबहीं तक पनियइ पियइ के नाहीं मिलत। बस दू जून क रोटी और पियै क पानी मिल जाय। एही खातिन ओट दिहा।’ यमुनापार में यह दर्द सिर्फ सांवली का नहीं है। पाठा क्षेत्र के हजारों लोगों ने इस चुनाव में शराब और दावत पर करोड़ों खर्च कर देने वाले नेताओं से अपने बच्चों के लिए दो वक्त की रोटी और पानी की उम्मीद में वोट डाला।
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कोरांव के ही सुभाष मतदान केंद्र पर वोट देने पहुंची श्यामा का कहना था, ‘देख.. भइया, यहां तो कुछ नाहीं बा। का बताई काहे खातिर वोट दिहा। चुनाव बा त नहरियौ में पानी बा। नहीं त गोरू पानी बिन मरि जात हैन।’ तकरीबन एक किलोमीटर कोरांव की तरफ बढ़ने पर शमलीपुर गांव में वोट देने पहुंचे तकरीबन 70 साल के देवी प्रसाद ने भी कुछ इसी तरह से अपना दर्द बयां किया। बड़ोखर, मांडा खास की स्थिति तथा वहां के लोगों की सोच भी इससे जुदा नहीं थी। हां, कोरांव बाजार से मेजा की तरफ बढ़ने पर कुछ विकास दिखने लगा। इसका असर लोगों, खासतौर पर युवाओं की सोच तथा वोट डालने के नजरिए पर भी दिखा।
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