प्रभावी रूप से जीवंत हुई अमर सिंह की गाथा

Allahabad Updated Mon, 05 May 2014 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। सांस्कृतिक केंद्र प्रेक्षागृह में रविवार को लोक नाट्यविद् अतुल यदुवंशी की परिकल्पना और निर्देशकीय कौशल में नौटंकी फिर फिर जीवंत हुई। संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से पंडित नथाराम शर्मा गौड़ की रचना पर आधारित प्रस्तुति ‘अमर सिंह राठौर’ के बहाने दर्शकों से विधा की खूबियों के साथ संवाद और जुड़ाव की सार्थक कोशिश की गई।
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दरअसल यह कहानी एक ऐसे रणबांकुरे की रही जो आगरा से लेकर नागौर तक ही नहीं बल्कि समस्त उत्तर भारत में कही सुनी जाती है। मेवाड़ के उत्तराधिकारी होने के बावजूद जब अमर सिंह को राज्य से निर्वासित कर दिया गया तो उन्होंने शहंशाह शाहजहां के दरबार में बतौर मंसबदार अपनी सेवाएं देकर कई युद्ध जीतकर मुगलिया सल्तनत को मजबूती दी। प्रस्तुति के बहाने मौजूदा माहौल में देश के दो मतों हिंदुत्व एवं इस्लाम की साझा संस्कृति का खास महत्व भी रेखांकित हुआ।
मंच पर नट-नटी की भूमिका में जहां सचिन और शालिनी ने प्रस्तुति को लयात्मक बनाया, वहीं नीरज अग्रवाल, सोनी कुमार गुप्ता, धीरज अग्रवाल, सोनाली चक्रवर्ती, ऋषिकेश, अमित, शिवकुमार, शीला, अतुल शुक्ला, सफलता, संदीप, विक्रांत, एजाज, बसंत लाल, रतिभान, धर्मेंद्र, आसिफ, रामचरन, अजय, शुभम, स्वाति, रमेश, अद्वितीय आदि ने अपनी भूमिकाओं से न्याय किया। प्रकाश व्यवस्था सुजॉय घोषाल ने संभाली। हारमोनियम पर दिलीप कुमार गुलशन, ढोलक पर नगीना और नक्कारा पर रामानंद ने संगत करके प्रस्तुति को प्रवाहपूर्ण बनाया।
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