प्रो.यूएस तिवारी ट्रिपआईटी के सीवीओ बने

Allahabad Updated Sat, 25 Jan 2014 05:43 AM IST
इलाहाबाद (ब्यूरो)। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान में मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) को लेकर विवाद फिलहाल थम गया है। मानव संसाधन मंत्रालय के आदेश पर प्रोफेसर यूएस तिवारी नए कार्यवाहक सीवीओ बनाए गए। इसी के साथ मंत्रालय ने इस पद पर स्थायी नियुक्ति के लिए संस्थान से तीन शिक्षकों का नाम भी मांगा है।
कार्यवाहक निदेशक प्रोफेसर जीसी नंदी ने चार्ज संभालने के अगले दिन ही डॉ.अनुरिका वैश्य की जगह प्रोफेसर यूएस तिवारी को सीवीओ बनाए जाने का आदेश जारी किया था लेकिन डॉ.अनुरिका ने चार्ज देने से मना कर दिया। चार्ज लेने पहुंचे प्रोफेसर तिवारी पर उन्होंने दुर्व्यवहार का भी आरोप लगाया था। इसी के साथ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। डॉ.अनुरिका का कहना था कि प्रोफेसर जीसी नंदी ने जब उन्हें हटाने आदेश दिया था तब डॉ.एमडी तिवारी ने उन्हें चार्ज नहीं दिया था। इसलिए प्रोफेसर नंदी का यह आदेश गलत है लेकिन डॉ.अनुरिका को हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। इसी परिप्रेक्ष्य में मंत्रालय ने स्थाई नियुक्ति होने तक प्रोफेसर यूएस तिवारी को सीवीओ पद पर कार्य करने का आदेश दिया है। मंत्रालय ने इस पद के लिए संस्थान से तीन नाम मांगे हैं। शिक्षकों का पैनल बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट से स्वीकृत होना चाहिए। मंत्रालय ने पैनल में शामिल शिक्षकों का पिछले पांच साल का ब्योरा भी मांगा है।
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान में प्रोफेसर जीसी नंदी के निदेशक का चार्ज संभालने के बाद बदलाव का क्रम जारी है। सभी हेड का अधिकार भी अब उनके पास आ गया है। इसके लिए उप कुलसचिव आशीष कुमार ने शुक्रवार को आदेश भी जारी कर दिया। संस्थान में अब हेड की नियुक्ति भी रोटेशन के तहत होगी। इसके लिए बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट की जल्द बैठक बुलाई जाएगी। इस पर फैसला होने तक प्रोफेसर नंदी के पास हेड का अधिकार होगा। शुक्रवार को हुए इस आदेश का यह भी आशय लगाया जा रहा है कि नई व्यवस्था लागू होने तक हेड का पद समाप्त हो गया है।
सभी विश्वविद्यालयों, ट्रिपलआईटी आदि संस्थानों में रोटेशन के तहत हेड और डीन की नियुक्ति होती है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हेड की नियुक्ति दो साल के लिए होती है। इसके लिए क्रम वरिष्ठता के आधार पर तय की जाती है। ट्रिपलआईटी में भी नियमानुसार यही व्यवस्था लागू होनी चाहिए लेकिन व्यवहार में एक बार हेड बनने के बाद शिक्षक रिटायरमेंट तक इस पद पर बने रहते हैं। शुक्रवार को अधिकार छिने जाने के आदेश के साथ संस्थान में नियमानुसार हेड की नियुक्ति की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई। संस्थान में शिक्षकों की वरिष्ठता सूची बनाई जा रही है। नियमावली तैयार करने के लिए भी कमेटी बनाई गई है। बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट की अनुमति के बाद रोटेशन के तहत हेड की नियुक्ति की व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।

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