ठंड से मासूमों की सेहत पर संकट

Allahabad Updated Wed, 22 Jan 2014 05:43 AM IST
इलाहाबाद। ठंड ने नवजात बच्चों, मासूमों की सेहत को करारा झटका दिया है। पिछले कई दिनों से मौसम में आए बदलावके चलते कोल्ड डायरिया, न्यूमोनिया से पीड़ित चार सौ से अधिक बच्चे सरोजनी नायडू बाल चिकित्सालय, बेली, काल्विन, एसआरएन के अलावा नर्सिंगहोमों में इलाज करा रहे हैं। कई बच्चों की हालत गंभीर बताई जा रही है। चिकित्सा विशेषज्ञों की मानें तो पिछले कई दिनों में बीमार बच्चों की संख्या बढ़ी है। ठंड से पीड़ित सबसे अधिक बच्चे सरोजनी नायडू बालरोग चिकित्सालय में भर्ती है। अस्पताल में शहरी क्षेत्र के अलावा गंगापार, यमुनापार के विभिन्न इलाकों, आसपास के जिलों मिर्जापुर, सोनभद्र, कौशाम्बी, फतेहपुर से कई बच्चे इलाज करा रहे है। मेडिकल कालेज के बालरोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. डीके सिंह के मुताबिक अस्पताल में 90 बच्चों का इलाज किया जा रहा है, जिसमें से ज्यादातर कोल्ड डायरिया, न्यूमोनिया से पीड़ित हैं। इसके अलावा 15 से 20 ऐसे बच्चों का इलाज किया जा रहा है जिन्हें पैदा होते ही पीलिया जैसी बीमारी ने जकड़ लिया है। मोतीलाल नेहरू अस्पताल के बालरोग विभाग की ओपीडी में भी बच्चों की भीड़ है। अस्पताल के प्रत्येक बालरोग विशेषज्ञों की ओपीडी में औसतन दो सौ बच्चे इलाज कराने पहुंच रहे हैं। बालरोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज मित्तल के मुताबिक ओपीडी में ज्यादातर में कोल्ड डायरिया, खांसी, जुकाम की शिकायत मिल रही है। सरोजनी नायडू बाल चिकित्सालय में बिजली कटौती से परेशानी बढ़ गई है। खासकर गंभीर हालत में भर्ती नवजात बच्चों को लेकर। यह स्थिति तब है जबकि अस्पताल में चौबीस घंटे बिजली आपूर्ति के प्रावधान है। समुचित बिजली आपूर्ति के लिए अस्पताल प्रबंधन की ओर से विशेष फीडर से कनेक्शन भी लिया गया है। जिसके लिए प्रबंधन की ओर से सात लाख की धनराशि जमा कराई गई है। विभागाध्यक्ष डॉ. डीके सिंह के मुताबिक बिजली आपूर्ति के लिए जेनरेटर सेट लगाया गया है लेकिन उसकी क्षमता इतनी नहीं है कि पूरे अस्पताल को बिजली आपूर्ति के साथ ही ठंड में हैवी ब्लोअर को संचालित कर सके । बालरोग चिकित्सालय परिसर में वैसे तो सफाई व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम है लेकिन अस्पताल के एक कोने में कूड़ा करकट का अंबार लगा है। जिसका असर बच्चे की सेहत भी पड़ता है। अस्पताल प्रबंधन की मानें तो इस संबंध में नगर निगम प्रशासन से कई बार वार्ता की गई। महीनावार एकमुश्त 15 सौ रुपये की धनराशि जमा कराने की बात कही गई लेकिन कूड़ा नहीं हटाया गया। वार्ड के पास जमा इस कूड़े का नवजात बच्चों की सेहत पर असर पड़ रहा है। बीमारियों से कैसे करें बचाव?
00 नवजात एवं बेहद छोटे बच्चों को गर्म कपड़े पहनाकर रखें।
00 कमर का हिस्सा किसी भी सूरत में न खुलने पाएं।
00 बच्चों को प्यास लगने पर गुनगुना पानी पिलाएं।
00 नहलाने में गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें।
00 परिवार में यदि किसी को जुकाम है तो बच्चों को उससे दूर रखें।
00 डायरिया या बीमार होने पर बच्चों को तत्काल बालरोग विशेषज्ञ को दिखाएं।
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