नमी से न्यूमोनिया में बदला बुखार, सैकड़ों बीमार

Allahabad Updated Mon, 20 Jan 2014 05:43 AM IST
इलाहाबाद। सर्दी के मौसम में बारिश होना अचरज की बात नहीं लेकिन गंगा के मैदान में पिछले कुछ दिनों से जो माहौल बना है, वह सेहत के लिहाज से बेहद खतरनाक है। वातावरण में पिछले एक माह से लगातार सौ फीसदी नमी और खतरनाक हो चली है। नतीजा है कि अस्पतालों में सांस रोगियों, कोल्ड डायरिया, न्यूमोनिया से पीड़ित बच्चों, स्पांडिलाइटिस, कमर-बदन दर्द, सर्दी जुकाम से पीड़ित मरीजों की लंबी कतार है। सरकारी अस्पतालों के अलावा नर्सिंगहोम में मरीजों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम में यही क्रम जारी रहा तो मुसीबतें और अधिक बढ़ सकती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि ठंड और बारिश से बचाव कर ही बीमारियों से बचा जा सकता है।
बारिश, ठंड के चलते शरीर की मांसपेशियों में खिंचाव होने से कास्पोकोंडारायटिस, स्पांडिलाइटिस, गठिया से पीड़ित मरीजों का दर्द और बढ़ गया है। अकेले बेली अस्पताल के आर्थोपेडिक्स विभाग में तीन सौ से अधिक मरीज इन बीमारियों का इलाज कराने पहुंच रहे हैैं। आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. एपी सिंह के मुताबिक ओपीडी में पहुंचने वाले तीन सौ मरीजों में से 75 फीसदी मरीज इन बीमारियों से पीड़ित है। मरीजों को सांस लेते समय सीने की पसलियों में दर्द हो रहा है। इसके अलावा कमर दर्द, बदन दर्द, घुटनों का दर्द, हाथ की अंगुलियों के जोड़ों के दर्द से परेशान मरीज इलाज कराने पहुंच रहे हैं। आर्थोपेडिक सर्जन के मुताबिक गुनगुने पानी में स्नान, हाथ पैरों की तेल लगाकर सिंकाई करने से परेशानियों से बचा जा सकता है।
बारिश और ठंड केचलते कोल्ड डायरिया का खतरा बढ़ गया है। बीमारी का असर बच्चों और साठ साल से अधिक उम्र के बुजुगाें पर ज्यादा है। बेली, काल्विन, एसआरएन में कोल्ड डायरिया से ग्रसित सैकड़ों बच्चे, बुजुर्ग इलाज करा रहे हैं। काल्विन अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. एके श्रीवास्तव के मुताबिक ओपीडी में औसतन 150 से अधिक कोल्ड डायरिया, न्यूमोनिया से पीड़ित मरीज पहुंच रहे हैं। डॉ. श्रीवास्तव के मुताबिक ठंड से बचाव कर ही बीमारियों से बचा जा सकता है।
ठंड का सबसे अधिक असर बच्चों पर दिखायी दे रहा है। न्यूमोनिया से पीड़ित सैकड़ों बच्चे सरोजनी नायडू बाल चिकित्सालय समेत विभिन्न अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। अकेले बाल चिकित्सालय में ही साठ के करीब बच्चे भर्ती हैं जिन्हें न्यूमोनिया का गंभीर संक्रमण है। इन बच्चों में नवजात से लेकर पांच साल तक के बच्चे शामिल है। विभागाध्यक्ष डॉ. डीके सिंह के मुताबिक अस्पताल में भर्ती सभी बच्चों का इलाज किया जा रहा है। कई गंभीर बच्चों को आईसीयू में रखा गया है।
वायुमंडल में आर्र्दता सौ फीसदी होने और आक्सीजन की कमी के चलते सांस रोगियों की भी परेशानी बढ़ गई है। अस्थमा विशेषज्ञ डॉ. आशीष टंडन के मुताबिक उनके पास तमाम ऐसे मरीज आ रहे हैं जिन्हें सांस लेने में दिक्कतें आ रही है। क्रोनिक मरीजों को दवा लेने की सलाह दी जा रही है।

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