यहां भी पहेली बनी कई मर्डर मिस्ट्री, बरसों गुजर गए लेकिन कई कत्ल का नहीं हो सका राजफाश,

Allahabad Updated Wed, 27 Nov 2013 05:40 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो) । आरूषि-हेमराज बहुचर्चित मर्डर केस में आखिरकार अदालत का फैसला आ गया मगर इस घटना में पुलिस के साथ ही सीबीआई की भी जांच पर सवाल उठते रहे। इलाहाबाद में भी कई सनसनीखेज हत्याकांड अब तक अनसुलझे हैं। पुलिस ने बहुत हाथ-पैर मारे लेकिन मर्डर मिस्ट्री को सुलझा नहीं सकी। सीआईडी भी हत्या की तह तक जाने में नाकाम रही। कत्ल के ऐसे कई केस हैं जिन्हें बाद में ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
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शहर में सनसनीखेज मर्डर मिस्ट्री की फेहरिस्त में कई घटनाएं शामिल हैं। वर्ष 2004 में 29 अप्रैल की रात का दोहरा हत्याकांड पुलिस की नाकामी बताने के लिए काफी है। रात करीब नौ बजे सिविल लाइंस में स्ट्रेची रोड पर पेट्रोल पंप मालिक और उनकी पत्नी की कार के भीतर गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी। पहले पुलिस ने छानबीन की। फिर तफ्तीश सीआईडी की अपराध शाखा को सौंप दी गई। मगर पुलिस के बाद सीआईडी भी कातिलों का पता लगाने में असफल रही। दरअसल, पुलिस में ही चर्चा थी कि हत्या का खुलासा नहीं होने के पीछे एक नेता का हाथ था। उसके दबाव पर ही जांच सिविल लाइंस थाने से छीनकर सीआईडी को सौंपी गई थी। इरादा केस का पर्दाफाश करना नहीं बल्कि ठंडे बस्ते में डालना था।
बीटेक छात्रा अंजली यादव की हत्या में भी पुलिस के साथ ही सीआईडी क्राइम ब्रांच की नाकामी सामने आ चुकी है। कानपुर देहात निवासी सिपाही अवध किशोर यादव की बेटी अंजली ने पिछले साल अगस्त में यहां यमुनापार के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया था। वह कॉलेज के हॉस्टल में रहती थी। 25 सितंबर को भोर में अंजली की हॉस्टल में हत्या कर दी गई। उसके सिर पर गहरी चोट की गई थी। छात्रों ने काफी बवाल काटा तब पुलिस ने कॉलेज के निदेशक, प्राचार्य, वार्डन और दो साथी छात्राओं के खिलाफ हत्या का मुकदमा लिखा। बड़े लोगों से जुड़ा मामला होने के कारण पुलिस ने जांच में दिलचस्पी नहीं ली तो पिता अवध किशोर की शिकायत पर जांच सीआईडी इलाहाबाद शाखा को सौंप दी गई। मगर सवा साल गुजरने के बाद भी सीआईडी हत्या का राजफाश नहीं कर सकी है। अंजली के माता-पिता मुख्यमंत्री से लेकर हाईकोर्ट तक की शरण में जा चुके हैं।
ऐसे कई और हत्याकांड अब तक पहेली बने हुए हैं। पांच महीने पहले सरायइनायत में आशनाई के चलते एक घर के बाहर युवक को मारकर फेंक दिया गया। पुलिस को एक युवती से रिश्ते के चलते कत्ल के सुबूत मिले पर ऐसा दबाव पड़ा कि जांच ही बंद कर दी गई। अब इस कत्ल में फाइनल रिपोर्ट लगाने की तैयारी है। छह महीने पहले अल्लापुर में पीडब्ल्यूडी के जेई छंगालाल की हत्या में भी क्राइम ब्रांच की नाकामी जाहिर हो चुकी है।
पांच महीने पहले तकरीबन 16 साल की एक नाबालिग लड़की को केपी कॉलेज के पीछे सुनसान में गैंग रेप के बाद गला घोंटकर मार डाला गया था। जार्जटाउन पुलिस कहती रही कि जांच की जा रही है लेकिन पुलिस उस बदनसीब लड़की की पहचान तक कराने में असफल रही।
पिछले हफ्ते करेली इलाके में तहसीलदार के भी कत्ल की घटना की जांच किसी सिरे नहीं पहुंच पा रही है। पुलिस कह रही हैं कि कत्ल के ठोस सुबूत ही नहीं हैं। ये भी नहीं पता कि तहसीलदार की मौत के पीछे किसका हाथ है। ऐसे में आशंका है कि यह भी मर्डर मिस्ट्री रह जाएगी।
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