कपिल पर ‘हां-ना’ में फंसा रहा शीट!

Allahabad Updated Wed, 27 Nov 2013 05:40 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। ओएमआर शीट पहुंचने की देरी के पीछे कपिल यादव की दावेदारी को लेकर अनिर्णय की स्थिति को प्रमुख कारण माना जा रहा है। इस संबंध में हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद ही शीट की छपाई का आर्डर दिए जाने की बात कही जा रही है।
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कपिल यादव ने नामांकन रद्द होने के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। इस पर हाईकोर्ट ने सोमवार को सुनवाई की। ऐसे में कपिल का नाम ओएमआर शीट में शामिल किया जाए या नहीं इसको लेकर अनिश्चितता बनी रही। बताया जा रहा है कि रात में फैसला आने के बाद अफसरों की बैठक में निर्णय लिया गया कि कपिल का नाम प्रत्याशियों की सूची में नहीं रहेगा। इसके बाद दिल्ली स्थित प्रेस के संचालक से छपाई के लिए कहा गया। दिल्ली से ओएमआर शीट लेकर आए प्रेस के कर्मचारियों ने बताया कि वे वहां से निजी वाहन से रात 11 बजे चले थे। उनका यह भी कहना था कि वे रास्ते में कहीं रुके भी नहीं। फिर भी सुबह साढ़े दस बजे पहुंच पाए।
इसके विपरीत चुनाव अधिकारी प्रोफेसर राम कृपाल का कहना है कि ओएमआर शीट आ गई थी लेकिन कर्मियों को बाहर ही रोक दिया गया था। उनका कहना था कि सुबह साढ़े दस बजे हाईकोर्ट के आदेश की कापी उन्हें मिली। इसके बाद ओएमआर शीट की गाड़ी अंदर आने दी गई। इस दौरान ओएमआर शीट प्रेस के कर्मियों के पास ही थी। वे इस दौरान कहां रुके थे इसकी भी जानकारी चुनाव अधिकारी को नहीं थी। यदि ऐसा था तो मत पत्रों की सुरक्षा भी सवालों में रही।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में प्रशासन की लापरवाही प्रत्याशियों पर भी भारी पड़ी। मंगलवार को हुए मतदान में 21933 में से मात्र 9470 छात्र-छात्राओं, यानी 43.17 फीसदी, ने हिस्सा लिया। वोट डालने वाली छात्राओं की संख्या तो मात्र 1680 रही। जबकि वोटर लिस्ट में कुल 7172 छात्राओं का नाम शामिल है। इतने कम मतदान के पीछे तीन घंटे की देरी को प्रमुख कारण बताया जा रहा है।
समय से ओएमआर शीट नहीं पहुंचने के कारण सुबह आठ के बजाय 11 बजे से मतदान शुरू हुआ। हालांकि मतदान के लिए दो के बजाय पांच बजे तक मौका दिया गया लेकिन सुबह ही मतदान देने के लिए पहुंच गए छात्र-छात्राओं को काफी परेशानी उठानी पड़ी। मुश्किल यह कि सुबह ही मतदान के लिए पहुंचे छात्र-छात्राओं को परिसर में प्रवेश भी नहीं दिया गया। इसकी वजह से बड़ी संख्या में विद्यार्थी वापस हो गए और फिर वोट देने के लिए नहीं आए। बिना वोट दिए वापस होने वाले विद्यार्थियों में छात्राओं की अधिक संख्या रही। छात्राओं के वोटिंग में कमी के पीछे मात्र यही कारण नहीं रहा। महिला छात्रावास गेट पर समर्थकों की काफी भीड़ थी। वोट मांगने के चक्कर में धक्का-मुक्की भी हुई। इसके अलावा प्रवेश वाले स्थान पर पानी भी लगा हुआ था। इसकी वजह से छात्राओं को काफी मुसीबतें झेलनी पड़ीं। सुबह वोट देने पहुंचीं बीए की छात्रा रश्मि सोनकर का कहना था कि उसे गेट पर ही रोक दिया गया। जबकि बाहर पूरी तरह से अराजकता का माहौल रहा।

‘पूरी तरह से अव्यवस्था हावी रही। छात्राओं को अंदर नहीं आने दिया गया। जबकि बाहर जो माहौल है उसमें छात्राओं के लिए कुछ देर भी वहां रुकना कठिन रहा। इसलिए बड़ी संख्या में छात्राएं वापस हो गईं। छात्र तो फिर भी दोबारा आए लेकिन छात्राएं नहीं आईं। विश्वविद्यालय प्रशासन से इसकी शिकायत की जाएगी।’
अनुपमा चौधरी, महामंत्री पद की प्रत्याशी

‘चुनाव की शुरुआत ही अव्यवस्था से हुई। काफी छात्राएं वापस हो गईं। हालांकि इससे यह नहीं कहा जा सकता कि मेरा वोट कम हो गया है। कई छात्र भी मेरे साथ प्रचार में जुटे हैं। इसलिए मेरी जीत-हार का फैसला इससे नहीं होने जा रहा लेकिन वोट देना लोकतांत्रिक अधिकार है और वह सभी को मिलना चाहिए।’
रोशनी यादव, अध्यक्ष पद की प्रत्याशी
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