फिर फेल हुआ वीसी का तंत्र

Allahabad Updated Wed, 27 Nov 2013 05:40 AM IST
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इलाहाबाद। लगातार विवादों में रहे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एके सिंह का तंत्र एक बार फिर फेल हो गया। अनिर्णय की स्थिति के कारण पूरी चुनावी प्रक्रिया ही विवादों में रही। मतदान की प्रक्रिया भी इससे अछूती नहीं रही और तीन घंटे देर से मतदान शुरू हो सका। निर्धारित अवधि के भीतर छात्रसंघ चुनाव नहीं कराने, चुनावी आचार संहिता का पालन नहीं होने तथा मतदान में देरी को लेकर कई अन्य छात्र नेता कोर्ट जाने की तैयारी में भी हैं। ऐसे में यह कहा जाने लगा है कि किसी तरह से मतगणना बिना विवाद के निपट जाए।
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पिछले साल नियमों की अनदेखी का हश्र सामने है। इस बार भी नामांकन रद्द होने को लेकर दो नेताओं ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इसके पीछे विश्वविद्यालय में अनिर्णय की स्थिति ही प्रमुख कारण है। लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार सत्र शुरू होने के छह से आठ सप्ताह में चुुनाव हो जाना चाहिए। लेकिन चुनाव अधिकारी की खोज में देरी, पैसे को लेकर विवाद आदि के कारण नवंबर में मतदान संपन्न हो सका। परिणाम कब घोषित होगा इस पर अभी अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। इस स्थिति के पीछे भी अनियमितता ही प्रमुख कारण है। पूर्व में एक और विषय में परास्नातक के लिए सशर्त प्रवेश दिया जाता था। इनके चयन के लिए कमेटी भी गठित की जाती थी। साथ में विद्यार्थी से हलफनामा भी लिया जाता था कि वे चुनाव नहीं लड़ेंगे लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ। इतना ही नहीं प्रवेश प्रक्रिया में धांधली के गंभीर आरोप लगे लेकिन कुलपति ने जांच तक की जरूरत नहीं समझी। नतीजा सामने है और कपिल यादव के फर्जी हलफनामा पर प्रवेश लेने की बात कही जा रही है। यह मामला भी तब सामने आया जब छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद के अन्य दावेदारों ने डबल एमए की बात कहते हुए कपिल के चुनाव लड़ने पर आपत्ति जताई। विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार पहले उसका नामांकन इसी आधार पर निरस्त किया गया था लेकिन बाद में विभागाध्यक्ष की आपत्ति पर हलफनामे का मामला सामने आया। इसके बाद भी अफसर नहीं चेते और मंगलवार को समय से ओएमआर शीट नहीं पहुंची।
छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी करने वाले कपिल यादव के मामले में इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन बुधवार को जवाब देगा। मंगलवार को मतदान था। मतदान भी पांच बजे तक चला। ऐसे में जवाब तैयार करना बड़ी चुनौती है। मतदान के दौरान भी अफसरों में इसी को लेकर चर्चा रही।
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