मिशन कामयाब, आराम से निपटे विवाद

Allahabad Updated Sun, 24 Nov 2013 05:40 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। महीनों की मशक्कत आखिरकार रंग लाई। एक दिन में सर्वाधिक मुकदमों का निस्तारण करने के अब तक के सबसे बड़े लक्ष्य को पूरा करने में अदालतें कामयाब रहीं। सुप्रीमकोर्ट के निर्देश पर देश भर में इस शनिवार को लोक अदालत का आयोजन किया गया था। इलाहाबाद में भी हाईकोर्ट सहित जिला कचहरी, तहसीलों और अधिकरणों में मेगा लोक अदालत का आयोजन किया गया। लक्ष्य के अनुरूप यहां मुकदमों का निस्तारण किया गया। वादकारियों को करोड़ों रुपये के मुआवजे के साथ ही बैंकों को भी बकाया ऋण की वसूली में महत्वपूर्ण सफलता हासिल हुई। तमाम बैंकों को समझौते के तहत सात करोड़ रुपये से अधिक की बकाया धनराशि वसूलने में कामयाबी प्राप्त हुई।
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जिला न्यायालय में लोक अदालत का आयोजन काफी सफल रहा। यहां सूचीबद्ध किए गए मुकदमों में से 50 प्रतिशत से अधिक की कामयाबी मिली। कुल 11 हजार 475 मुकदमों का मौके पर निस्तारण कर दिया गया। पक्षकारों के बीच सुलह समझौते से सहमति बनाने के बाद 7689 लघुवादों का निस्तारण हुआ। इसमें सात लाख चार हजार 905 रुपये का अर्थदंड लगाया गया। मोटर वाहन दुघर्टना के तहत क्लेम पेटीशन के 52 केस निपटाए गए जिसमें एक करोड़ 42 लाख 84 हजार 578 रुपये का मुआवजा वादकारियों को दिलाया गया।
वैवाहिक वाद के 146 मुकदमे सूचीबद्ध थे। इसमें से 22 जोड़ों को सुलह समझौते से साथ रहने पर रजामंद कर लिया गया। इनकी विदाई अदालत से ही हुई। राजस्व के 1124 और चकबंदी 1059 मामले निस्तारित हुए। उत्तराधिकार के 83 मुकदमों का निस्तारण करते हुए दो करोड़ 61 लाख से अधिक का उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी किया गया।
लोक अदालत मेें सबसे अधिक सफलता बैंकों को मिली। बैंकों के प्री लिटेगेशन वाद में 982 मुकदमे सूचीबद्ध थे। इसमें चार करोड़ 76 लाख 79 हजार 550 रुपये का समझौता हुआ। बैंकों को कुल बकाया वसूली के तौर पर सात करोड़ 77 लाख, 72 हजार 360 रुपये का लक्ष्य हासिल हुआ जिसमें से दो करोड़ 53 लाख 51 हजार 507 रुपये मौके पर वसूल लिए गए। 83 बैंक रिकवरी के मामलों का सेटलमेंट कराते हुए तीन करोड़ 92 लाख रुपये का सेटलमेंट हुआ।
जिला जज ओपी वर्मा ने सर्वाधिक 33 मुकदमों का निस्तारण करते हुए एक करोड़, 18 लाख 69 हजार 391 रुपये के मुआवजे का निस्तारण कराया। लोक अदालत के सफल आयोजन में सिविल जज वरिष्ठ श्रेणी मो. रिजवान अहमद की भूमिका महत्वपूर्ण रही। जिला विधिक सेवा सेवा प्राधिकरण के सचिव के तौर पर उन्होंने पूरे आयोजन का संचालन किया।
ऋण वसूली अधिकरण (डीआरटी) ने भी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन सफल रहा। बैंकों के ऋण संबंधी मुकदमों का यहां सुलह समझौते से निपटारा किया गया। डीआरटी के निबंधक संजीव सिन्हा के मुताबिक लोक अदालत में कुल 182 मुकदमों का निस्तारण किया गया। इसमें करीब 80 करोड़ रुपये की बैंकों की वसूली सुनिश्चित की गई। लोकअदालत मेें पीठासीन अधिकारी विनय गोयल, सदस्य पूर्व प्रमुख सचिव न्याय एबी शुक्ला तथा अधिवक्ता कुशलकांत ने मुकदमों का निस्तारण किया। इस मौके पर अधिवक्ता वीके श्रीवास्तव, राकेश मिश्रा, पवन मिश्रा, सुनील श्रीवास्तव, संदीप अरोरा, श्यामधर मिश्र, आशुतोष शुक्ला आदि उपस्थित थे।
वर्षों से जो मुकदमे के लिए अदालतों का चक्कर काट रहे थे उनके लिए आज का दिन खास था। हाईकोर्ट में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत के मौके पर रिकार्ड मुकदमों का निस्तारण किया गया। मोटर दुघर्टना, बैंकों के ऋण मामले, पारिवारिक विवाद जैसे मुकदमों का आपसी सुलह समझौते के आधार पर निपटाया गया।
कार्यक्रम की शुरूआत में वरिष्ठ न्यायमूर्ति एसके सिंह और न्यायमूर्ति सुनील अंबवानी ने पीठासीन अधिकारियों और वादकारियों को अधिक से अधिक मुकदमे निस्तारित करने के लिए प्रोत्साहित किया। लोक अदालत में सूचीबद्ध किए गए वादों के निस्तारण हेतु सात बेंच बनाई गई। इनमें न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं की मदद से पक्षकारों के बीच सुलह समझौते की स्थिति बनाई गई। सूचीबद्ध मुकदमों में से 419 का निस्तारण कर दिया गया। पक्षकारोें को मुआवजे के तौर पर कुल छह करोड़, 94 लाख, 31 हजार 424 रुपये दिलाए गए। समझौता कराने वाले न्यायिक अधिकारियों में राजीव लोचन मेहरोत्रा, दिनेश कुमार सिंह, रामकृष्ण उपाध्याय, मो. एफए खान, विकास कुंवर श्रीवास्तव, वीके श्रीवास्तव, अजीत सिंह, जीके पांडेय, शमशेर चंद्र, आलोक कुमार त्रिवेदी, अनूप कुमार गोयल तथा एसएएच रिजवी थे। लोक अदालत में राज्य सड़क परिवहन निगम के यशवंत मिश्रा भी मौजूद थे। उनके प्रयासों से परिवहन निगम के 200 मुकदमों का निस्तारण किया गया। इसी प्रकार से हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में 50 मुकदमों का निस्तारण किया गया। हाईकोर्ट के महानिबंधक अनंत कुमार और विधिक सेवा समिति के सचिव आरके उपाध्याय ने लोक अदालत को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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