परिसर का बदला माहौल

Allahabad Updated Sat, 23 Nov 2013 05:40 AM IST
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इलाहाबाद। नामांकन के साथ ही इलाहाबाद विश्वविद्यालय और कालेजों का माहौल पूरी तरह से बदल गया है। अलग-अलग ग्रुप में समर्थकों ने परिसर में जुलूस निकाला तो कक्षाओं में भी जनसंपर्क किया। प्रचार अभियान के दौरान आचार संहिता के उल्लंघन का क्रम शुक्रवार को भी जारी रहा। प्रतिबंध के बावजूद कई प्रत्याशियों ने परिसर के अंदर प्रिंटेड सामग्री से प्रचार किया और शहर में जगह-जगह वाहन जुलूस निकाला। इतना ही नहीं बघाड़ा, सलोरी, गोविंदपुर, कर्नलगंज आदि मोहल्लों में नेताओं ने नुक्कड़ सभाएं भी की। जबकि, इन सभाओं के दौरान कई बार मारपीट हो चुकी है और तनाव बना हुआ है। इसके बाद भी कोई रोकटोक नहीं है।
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छात्रसंघ चुनाव प्रचार में प्रत्याशियों के पिता, भाई, बहन तथा अन्य रिश्तेदार भी शामिल हैं। अध्यक्ष पद के एक प्रत्याशी के पिता ने तो पूरे प्रचार अभियान की कमान ही संभाल ली है। महामंत्री के एक प्रत्याशी के समर्थन में भी पूरा परिवार जुटा है। परिसर में छेड़खानी बड़े मुद्दे के रूप में सामने आया है। खास यह कि सबसे अधिक छींटाकशी छात्रसंघ भवन के सामने ही होती है। ऐसे में छात्र नेता छवि सुधार की कवायद में भी जुट गए हैं। परिसर में प्रचार के दौरान अधिकतर प्रत्याशी छात्राओं से अकेले ही मिलते दिखे। समर्थकों को कुछ दूरी पर खड़ा कर देते।
छात्रसंघ चुनाव में प्रत्याशी के लिए खर्च की अधिकतम सीमा मात्र पांच हजार रुपये निर्धारित है। लेकिन इसका कितना पालन हो रहा है इसका अनुमान छात्रावासों में देखा जा सकता है। अधिकतर छात्रावासों में नामांकन के दिन से भंडारे शुरू हो गए हैं और दिन भर पूड़ी छन रही है। इसके लिए हलवाई और उनकी मदद केलिए दो-दो हेल्पर भी लगाए हैं। इतना ही नहीं खाना खिलाने के लिए भी लड़के बुलाए गए हैं। ये भंडारे अधिकतर छात्रावासों में चल रहे हैं। नामांकन के दिन तो एक-एक भंडारे में एक हजार से अधिक लोगों ने खाना खाया।
इन दिनों हास्टल रात में अधिक गुलजार रह रहे हैं। छात्र नेताओं ने अलग-अलग हास्टल भी बांट रखा है। रात में सभी जुटकर हार-जीत की गुणा-गणित में लगे ही रह रहे हैं। हॉस्टल में प्रचार के लिए भी नेताओं के पहुंचने का क्रम तेज हो गया है। शुक्रवार को रात तकरीबन साढ़े 11 बजे अध्यक्ष पद का एक प्रत्याशी और उसके समर्थक एक दर्जन बड़ी गाड़ियों में विश्वविद्यालय के पास स्थित छात्रावास में घुसे। तकरीबन आधा घंटा रहने के बाद वे वहां से निकल लिए। इसके तत्काल बाद अध्यक्ष के पद का ही एक अन्य उम्मीदवार और उसके समर्थक पहुंच गए। उनके साथ भी गाड़ियों का काफिला था। सभी काफी देर तक डटे रहे। यह केवल एक छात्रावास का हाल नहीं है। अधिकतर छात्रावासों में कमोवेश यही स्थिति है। अधिकतर छात्रों के प्रचार में निकल जाने के कारण छात्रावासों में दिन में तो अपेक्षाकृत माहौल शांत रहता है लेकिन रात बढ़ने के साथ वहां का माहौल अचानक बदल जाता है।
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