बागियों ने बिगाड़ा समीकरण

Allahabad Updated Sat, 23 Nov 2013 05:40 AM IST
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इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय का छात्रसंघ चुनाव कई दलों और दिग्गज नेताओं के लिए भी प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। चुनाव में बागियों की मजबूत दावेदारी ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है और पूरा समीकरण ही बिगड़ गया है। इस लड़ाई में पुराने नेता भी बंट गए हैं। आलम यह है कि खुलकर प्रचार में सामने आ जाने तथा उनके जुलूस में समर्थकों की बड़ी संख्या से यह भ्रम होने लगा है कि इनमें संगठन का असली पैनल कौन सा है। गौर करने वाली बात यह है कि अध्यक्ष पद के सभी प्रत्याशी इस समस्या से जूझ रहे हैं। उनकी लड़ाई इस पर भी निर्भर हो गई है कि दूसरे कितने मजबूती से लड़ रहे हैं।
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कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई का आंतरिक विरोध तो प्रत्याशियों के चयन के समय ही खुलकर सामने आ गया। नतीजतन दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में हुई बैठक में शेषनारायण को लड़ाने का निर्णय हुआ। लेकिन संगठन से टिकट मांगने वाले अश्वनी अवस्थी और मधुकर मिश्रा भी मैदान में हैं। खास यह कि अश्वनी और मधुकर प्रबल दावेदारों में भी शामिल हैं। त्रिस्तरीय आरक्षण व्यवस्था के समर्थन में सामाजिक न्याय मोर्चा दो गुटों में बंट चुका है। दोनों गुट के समर्थक खुद को असली मोर्चा का प्रतिनिधि साबित करने में जुटे हैं। ऐसे में आरक्षण के मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे इन संगठनों का वोट बंटना तय माना जा रहा है। दोनों मोर्चा के प्रत्याशियों की मजबूत दावेदारी तथा उनके कार्यक्रम में जुट रही भीड़ समाजवादी छात्रसभा के प्रत्याशियों को भी परेशानी में डाल रही है। दोनों मोर्चा का बड़ा वोट बैंक पिछले साल समाजवादी छात्रसभा के साथ है लेकिन अब इसमें सेंधमारी हो गई है। ऐसे में अंबुज के बगावती तेवर ने संगठन की परेशानी और बढ़ा दी है। रोशनी यादव के अलावा अंबुज ने भी छात्रसभा से अध्यक्ष के लिए आवेदन किया था लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला। अब वह मोर्चा के दिनेश यादव गुट के साथ खड़े हैं। त्रिस्तरीय आरक्षण व्यवस्था के विरोध में पूरे देश में आंदोलन चलाने वाले कुलदीप सिंह, एबीवीपी से राणा यशवंत सिंह समेत कई नेता अध्यक्ष पद के लिए मैदान में हैं। इनमें से कुछ खुलकर तो अन्य दबी जुबान में लड़ाई की सफलता का श्रेय लेने की दावेदारी कर रहे हैं। ऐसे में लड़ाई रोचक और बहुकोणीय हो गई है। छात्र राजनीति पर पकड़ रखने वाले भी यह आकलन नहीं कर पा रहे कि मुख्य मुकाबले में कौन-कौन रहेगा और सभी 13 प्रत्याशी जीत के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं।
महामंत्री पद पर मात्र सात दावेदार होने के कारण लड़ाई और रोचक हो गई है। इनमें छह संगठन से चुनाव लड़े रहें हैं। इनके साथ व्यक्ति समर्थक तो हैं ही विचारधारा के समर्थकों की भीड़ भी उनके साथ है। वहीं एक अन्य दावेदार के जुलूस में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने शामिल होकर सबको चौंका दिया है। ऐसे में कहा जा रहा है कि इस पद पर सातों प्रत्याशियों के बीच नजदीकी मुकाबला होगा।
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