सरकारी दफ्तरों में ठोकरें खाती रही जनता

Allahabad Updated Sat, 23 Nov 2013 05:40 AM IST
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इलाहाबाद। राज्यकर्मियों की हड़ताल लगातार 11वें दिन शुक्रवार को भी जारी रही। उस पर मुसीबत यह कि तहसीलदार राघवेंद्र की हत्या का खुलासा न होने से नाराज राजस्व प्रशासनिक अधिकारी भी कामकाज छोड़ धरने पर बैठ गए। व्यवस्था चलाने वालों ने अव्यवस्था से आजिज आकर व्यवस्था ठप कर दी तो आम जनता के लिए मुसीबत बढ़नी ही थी। तहसीलों में कामकाम पूरी तरह से ठप हो गया। तहसील स्तर पर न्यायालय की कार्यवाही भी नहीं हुई। सुबह दस से बारह बजे के बीच जो लोग अफसरों से मिलने उनके दफ्तर पहुंचे, उन्हें मौके पर सिर्फ ताला लटकता मिला। फिलहाल जनता के लिए बड़ी राहत यही है कि कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल वापस लेने का निर्णय लिया है और शनिवार से काम पर लौटने जा रहे हैं।
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राज्यकर्मियों की हड़ताल के कारण शुक्रवार को विकास भवन में तालाबंदी जैसा माहौला रहा और विधवा, विकलांग, वृद्धावस्था पेंशन एवं छात्रवृत्ति से जुड़े काम ठप रहे। वाणिज्य कर विभाग में व्यापारी अपने काम के लिए भटकते रहे तो आरटीओ दफ्तर से भी तमाम लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ा। गवर्नमेंट प्रेस में भी तालाबंदी के कारण मशीनें ठप पड़ी रहीं। वहीं, शिक्षा निदेशालय और माध्यमिक शिक्षा में दूसरे जिलों से आए लोगों का काम नहीं हुआ और उन्हें हताश होकर लौटना पड़ा।
तहसीलों में लेखपालों और रजिस्ट्रार कानूनगो के हड़ताल में शामिल होने के कारण कंप्यूटरीकृत खतौनियां जारी किए जाने , आय, जाति एवं निवास प्रमाणपत्र बनाए जाने का काम पहले से ठप रहा। शुक्रवार को जिले में तैनात सभी एसडीएम, तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों ने भी काम ठप कर दिया। सभी राजस्व प्रशासनिक अधिकारी सुबह दस से दोपहर दो बजे तक कलक्ट्रेट में धरने पर बैठे रहे। ऐसे में तहसीलों में न्यायालय की कार्यवाही पूरी तरह से ठप रही। तहसील सदर को छोड़ ग्रामीण इलाकों में स्थित अन्य तहसीलों में रजिस्ट्रियां भी नहीं हुईं। सभी तहसीलदार कलक्ट्रेट में आयोजित धरने में मौजूद थे, सो तहसीलों में डबल लॉक न खुलने के कारण स्टाम्प की बिक्री ठप रही। प्रतिदिन सुबह दस से दोपहर 12 बजे तक जनता से मिलने का समय निर्धारित है लेकिन अफसरों की ओर से काप ठप कर दिए जाने के कारण जनता को तहसीलों से खाली हाथ लौटना पड़ा।
तहसीलदार राघवेंद्र की हत्या का खुलासा न होने और तहसीलदार के पीड़ित परिवार को शासन की ओर से अब तक किसी तरह की राहत प्रदान न किए जाने से नाराज राजस्व प्रशासनिक अधिकारी शुक्रवार को कामकाज ठप कर सुबह दस से दोपहर दो बजे तक कलक्ट्रेट में धरने पर बैठे रहे। अफसरों ने तय किया था कि शनिवार को भी धरना देंगे लेकिन एडीएम सिटी के आश्वासन पर उन्होंने धरना स्थगित करने का निर्णय लिया। हालांकि इस बात पर अड़े हुए हैं कि शासन ने उनकी मांगें पूरी नहीं की तो जल्द ही प्रांतीय स्तर पर आंदोलन का निर्णय लिया जाएगा।
उत्तर प्रदेश राजस्व प्रशासनिक अधिकारी संघ की ओर से शासन को ज्ञापन प्रेषित कर मांग की गई है कि तहसीलदार की हत्या का जल्द खुलासा कर कातिल की गिरफ्तारी की जाए। तहसीलदार के परिवार को एक करोड़ रुपये आर्थिक सहायता और राघवेंद्र की पत्नी को ओएसडी या समकक्ष पद पर नियुक्ति दी जाए। साथ ही तहसीलदार के परिवार को सुरक्षा मुहैया कराई और अन्य राजस्व प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए भी अलग से प्रबंध किए जाएं। संघ की ओर से की गई मांगों में अब तक कोई पूरी नहीं हुई। धरने पर बैठे अफसरों ने कहा कि सरकार इतनी संवेदनहीन हो चुकी है कि उसका कोई प्रतिनिधि पीड़ित परिवार के घर शोक संवेदना जताने तक नहीं पहुंचा। राजस्व मंत्री भी इस पर चुप्पी साधे रहे। धरने पर बैठे अफसरों को एडीएम सिटी अशोक कुमार और एडीएम प्रशासन आरएन गुप्ता से जब आश्वासन मिला तो अफसरों ने 23 नवंबर को प्रस्तावित धरना स्थगित करते हुए निर्णय लिया कि डीएम के इलाहाबाद लौटने पर उनसे वार्ता की जाएगी। अगर मांगों पर अपेक्षित निर्णय नहीं लिया गया तो प्रांतीय स्तर पर आंदोलन का निर्णय लिया जाएगा। धरने में एसडीएम सदर शत्रोहन वैश्य, एसडीएम मेजा विपिन कुमार मिश्र, एसडीएम बारा सत्य प्रकाश श्रीवास्तव, एसडीएम करछना विवेक श्रीवास्तव, तहसीलदार केशवदस गुप्ता, नंद प्रकाश मौर्या, सुशील कुमार चौबे, हरीराम यादव, मोहन लाल गुप्ता, श्रीप्रकाश गुप्ता, राममूर्ति त्रिपाठी, नायब तहसीलदार आरके शुक्ला आदि शामिल रहे।
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