टीईटी मेरिट पर ही होगी सहायक अध्यापकों की भर्ती

Allahabad Updated Thu, 21 Nov 2013 05:39 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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इलाहाबाद। प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में 72825 सहायक अध्यापकों के चयन और नियुक्ति को लेकर चली लंबी अदालती लड़ाई का पटाक्षेप हो गया है। हाईकोर्ट ने इसे लेकर दाखिल विशेष अपील का निस्तारण करते हुए साफ कर दिया है कि शिक्षकों का चयन टीईटी की मेरिट के आधार पर ही किया जाएगा। अदालत ने 30 नवंबर 2011 के भर्ती विज्ञापन को सही ठहराते हुए सरकार के 31 अगस्त 2012 के उस शासनादेश को रद कर दिया है जिसमें टीईटी को मात्र अर्हता माना गया था और चयन का आधार शैक्षणिक गुणांक कर दिया गया था। कोर्ट ने बेसिक शिक्षा अध्यापक सेवा नियमावली 1981 के 15 वें संशोधन के नियम 14(3) को असंवैधानिक करार देते हुए उसे रद कर दिया है। साथ ही सहायक अध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया 31 मार्च 2014 तक पूर्ण कर लेने का निर्देश दिया है।
शिवकुमार पाठक और दर्जनों अन्य अभ्यर्थियों की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति विपिन सिन्हा की खंडपीठ ने प्रदेश सरकार के 26 जुलाई 2012 के शासनादेश को भी रद कर दिया है जिसमें उस्मानी कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर टीईटी प्राप्तांक को मेरिट नहीं बनाने की बात कही गई थी।
खंडपीठ के समक्ष एकल न्यायपीठ के 16 जनवरी 2013 के आदेश को चुनौती दी गई थी। प्रश्न यह था कि सहायक अध्यापकों की नियुक्ति 30 नवंबर 2011 और संशोधित विज्ञापन 20 दिसंबर 2011 के आधार होनी चाहिए या 31 अगस्त 2012 को जारी शासनादेश के आधार पर। 30 नवंबर 2011 के विज्ञापन में चयन का आधार टीईटी मेरिट को बनाया गया था। बाद में प्रदेश सरकार ने यह कहकर इस नियम को बदल दिया था कि टीईटी में धांधली हुई थी। 31 अगस्त 2012 के शासनादेश में टीईटी को केवल अर्हता मान, शैक्षणिक गुणांक को नियुक्ति का आधार बनाया गया। सरकार ने उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षक सेवा नियमावली 1981 में 15 वां संशोधन करते हुए नियम 14(3) लागू किया जिसके मुताबिक चयन का आधार शैक्षणिक गुणांक होगा।
अपील करने वालों के अधिवक्ता नवीन शर्मा की दलील थी कि एनसीटीई की गाइड लाइन के अनुसार टीईटी मेरिट को नजरअंदाज करना गलत है जबकि सरकार ने टीईटी को मात्र न्यूनतम अर्हता माना है। एकल पीठ ने अपने निर्णय में कहा था कि चयन प्रक्रिया प्रारंभ होने के बाद नियम नहीं बदला जा सकता है। लेकिन यह भी कहा कि पर्याप्त आधार के बिना 30 नवंबर 2011 के विज्ञापन पर चयन न किया जाए। एकलपीठ ने 30 नवंबर के विज्ञापन को इस आधार पर गलत माना था कि भर्ती प्रशिक्षु अध्यापकों की है न कि सहायक अध्यापकों की। प्रशिक्षु अध्यापकों पर 1981 की नियमावली लागू नहीं होती है। इस आदेश को अपील में चुनौती दी गई थी। जिस पर कोर्ट ने कहा कि प्रदेश के सवा लाख प्राथमिक विद्यालयों में दो लाख 70 हजार पद रिक्त हैं, लिहाजा शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत सरकार नियुक्ति के लिए बाध्य है।
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