उदयभान का मामला स्पेशल सीजेएम से हटाने की मांग

Allahabad Updated Thu, 24 Oct 2013 05:38 AM IST
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इलाहाबाद। सत्रह साल पुराने चर्चित जवाहर पंडित हत्याकांड में आरोपी भाजपा के पूर्व विधायक उदयभान करवरिया की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। उनके खिलाफ जिला न्यायालय द्वारा जारी गैरजमानती वारंट के मामले में नया मोड़ आ गया है। प्रदेश सरकार ने उदयभान के खिलाफ प्रक्रिया का विलोप कर देने पर नाखुशी जताते हुए मामले को स्पेशल सीजेएम की कोर्ट से हटाने की मांग की है। जिला जज को अर्जी देेकर कहा है कि स्पेशल सीजेएम कोर्ट द्वारा अपनी ही अदालत द्वारा पूर्व में जारी आदेशों की उपेक्षा की है जबकि कोई स्थगनआदेश नहीं है।
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दरअसल 1996 के इस मामले में हाईकोर्ट ने कपिल मुनि करवरिया आदि के खिलाफ निचली अदालत में चल रही प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी, मगर इसमें उदयभान का नाम नहीं था। हाईकोर्ट ने 19 अप्रैल 2012 के आदेश में इस बात को स्पष्ट किया कि उदयभान के लिए स्थगनआदेश नहीं है। इसके बाद निचली अदालत में उनकी उपस्थिति के लिए प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई। दो जून 2012 से 22 अगस्त 2012 के बीच उदयभान को कई सम्मन, नोटिस, वारंट और गैरजमानती वारंट जारी किए गए। स्पेशल सीजेएम की अदालत ने वारंट का तामीला कराने के लिए एसएसपी और जिला जज को पत्र भी लिखा। पूर्व स्पेशल सीजेएम प्रीति श्रीवास्तव ने एसएसपी को इस मामले में कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था।
प्रदेश सरकार की अर्जी में कहा गया है कि स्पेशल सीजेएम प्रीति श्रीवास्तव के हटने के बाद 17 सितंबर 2013 को उदय भान ने तत्कालीन स्पेशल सीजेएम के समक्ष के एक प्रार्थनापत्र दिया जिसके बाद पूरे मामले में नया मोड़ आ गया। 17 सितंबर और 19 सितंबर को न्यायालय द्वारा पूर्व में चली आ रही कार्रवाई का विलोप कर दिया। दरअसल उदय भान ने अपनी अर्जी में हाईकोर्ट के एक आदेश का हवाला दिया जिसमें उनकी 482 सीआरपीसी की अर्जी को हाईकोर्ट ने कपिल मुनि की उस अर्जी से संबद्ध करने का निर्देश दिया जिसमें अभियुक्तों के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाई है। सरकार का कहना है कि अर्जी संबद्ध करने के आदेश का अर्थ स्थगन आदेश प्राप्त होना नहीं लगाया जा सकता है। अर्जी में सरकार ने उदयभान का मामला स्पेशल सीजेएम के न्यायालय से किसी अन्य न्यायालय को स्थानांतरित करने की मांग की है।
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