आरक्षण के मसले पर सवर्ण-ओबीसी आमने सामने

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Allahabad Published by: Updated Sat, 13 Jul 2013 05:30 AM IST

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इलाहाबाद। लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में आरक्षण के प्रावधानों को लागू करने के तरीके को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा हैै। लड़ाई सवर्ण और ओबीसी में तब्दील होती जा रही है। बुधवार को ओबीसी को ज्यादा लाभ देने के खिलाफ प्रतियोगी छात्रों ने प्रदर्शन और चक्काजाम किया तो शुक्रवार को आरक्षण प्रावधानों के समर्थन में कई छात्रनेता सामने आ गए। छात्रनेताओं ने आयोग की नीतियों का समर्थन किया तथा सवर्ण नेताओं के आंदोलन के खिलाफ प्रदर्शन किया। आयोग में पहले भी ऐसा हो चुका है। आयोग के सदस्यों ने आरक्षण के गलत प्रस्ताव का विरोध भी किया था। छात्रों के विरोध के बाद ही साक्षात्कार केसमय सदस्य एवं बोर्ड के अध्यक्ष उसकी जाति न जान सकें इसके लिए कोडिंग व्यवस्था लागू की गई। इस बार विवाद को जल्द ही न रोका गया तो सवर्ण और पिछड़ा की लड़ाई खतरनाक रंग ले सकती है।
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आरक्षण प्रावधानों के समर्थकों ने शुक्रवार को प्रदर्शन किया और विरोध करने वालों को आयोग के विरोध से बाज आने की चेतावनी दी। लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष से मिलकर 27 मई को आरक्षण के संबंध में किए गए उनके फैसले का समर्थन किया और बधाई भी दी। लोक सेवा आयोग ने परीक्षाओं में आरक्षण की नई व्याख्या करते हुए 27 मई को फैसला किया कि परीक्षा के हर चरण में आरक्षण का लाभ दिया जाएगा। छात्रों का आरोप है कि इस फैसले के लागू होने के बाद आयोग की ओर से घोषित पीसीएस मुख्य परीक्षा 2011 के रिजल्ट मेें बड़ी संख्या में ओबीसी और एक जाति विशेष के अभ्यर्थी साक्षात्कार के लिए सफल हो गए। इस नई व्यवस्था के खिलाफ 10 जुलाई को प्रतियोगी छात्रों ने दिनभर आयोग के सामने प्रदर्शन किया। छात्रों के दबाव के बाद अंत में आयोग के अध्यक्ष ने प्रतियोगी छात्रों के प्रतिनिधि मंडल से बात की। इसके साथ उन्होंने छात्रों की मांग पर विचार करने की बात कही। इसके बाद आरक्षण समर्थकों ने शुक्रवार को एकजुट होकर प्रदर्शन किया।

लोक सेवा आयोग के फैसले के समर्थन में आरक्षण समर्थकों का एक प्रतिनिधि मंडल छात्रनेता दिनेश सिंह यादव के नेतृत्व में आयोग के अध्यक्ष डॉ. अनिल यादव से मिला। समर्थकों ने आयोग के अध्यक्ष एवं आरक्षण का प्रस्ताव लाने वाले सदस्य को भी बधाई दी। अध्यक्ष से मिलने वालों में अजीत यादव, मनोज, लालाराम सरोज शामिल रहे। इससे पहले इन छात्रों ने बैंक रोड चौराहे से जुलूस निकालकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। आइसा के सुनील मौर्य ने भी आयोग के फैसले का समर्थन किया। न्यायवादी छात्र संगठन ने भी आरक्षण के नाम पर भ्रम फैलाने वालों की निंदा की है।
प्रतियोगी छात्र मोर्चा के अध्यक्ष डॉ. राजेश सिंह का कहना है कि आयोग के अधिकारी लोक सेवा आयोग को पार्टी कार्यालय बनाने पर उतारू हैं। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले लोक सभा चुनाव में इस बात का खामियाजा प्रदेश सरकार को भुगतना पड़ेगा।
लोक सेवा आयोग के फैसले के खिलाफ इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के सांस्कृतिक मंत्री देवमणि मिश्र के नेतृत्व में चार छात्र रितेश राणा, प्रिंस चौबे, जाकिर हुसैन एवं शोभित राय शुक्रवार को आयोग के गेट पर अनशन पर बैठ गए। देवमणि का कहना है कि जब तक सरकार और आयोग उनकी बात नहीं सुनेगा, उनका संघर्ष जारी रहेगा। धरनास्थल पर बड़ी संख्या में आरक्षण विरोधी प्रतियोगी छात्र मौजूद रहे।

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