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होली के हुड़दंग में खतरनाक हैं केमिकल रंग और भंग

Allahabad Updated Tue, 26 Mar 2013 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। होली की हुल्लड़ शहर में सोमवार से शुरू हो गई है। गली गली म्यूजिक के साथ मस्ती का रंग फैल रहा है। बुधवार-बृहस्पतिवार को यह रंग पूरे शबाब पर होगा। तमाम हिदायत, चेतावनी के बाद भी केमिकल रंग की बिक्री जोरों पर है। केवल केमिकल रंग ही नहीं, कीचड़ और पेंट से सराबोर होली में भांग को मौज का हिस्सा मान लिया गया है। अधेड़, बुजुर्ग और महिलाएं हुड़दंग के बीच ज्यादा रंग खेलने से हिचकती हैं लेकिन किशोरों को होलियारों की टोली और उनकी हुल्लड़ वाली हरकतें ज्यादा आकर्षित कर रही हैं। धारावाहिकों के होली स्पेशल एपीसोड में जिस तरह से भांग को महिमामंडित किया जा रहा है, उससे किशोरों-युवाओं में इसे चखने की ललक बढ़ गई। शहर में तमाम किशोर-युवा हुड़दंग में शामिल होने के मौके तलाश रहे हैं और ज्यादातर को लग रहा कि भांग की गोली के बगैर होली का मजा नहीं है।
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हैरानी यह है कि केवल युवक ही नहीं, धारावाहिकों की देखादेखी बड़ी संख्या में युवतियों में भांग पीने की ललक बढ़ी है। भांग वाली ठंडई के लिए लोकनाथ की गलियां खंगाली जा रही हैं लेकिन डॉक्टरों की हिदायत है कि स्वास्थ्य और परिवेश दोनों लिहाज से बच्चों, किशोरों, युवतियों को इससे दूर रखना जरूरी है।
मनोचिकित्सकों का कहना है कि भांग का असर सीधे दिमाग पर पड़ता है। कुछ लोगों को इससे मानसिक सुख का भ्रम होता है लेकिन यह बेहद खतरनाक है। क्योंकि थोड़े सुख के भ्रम में इसकी लत पड़ गई तो सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। वरिष्ठ चिकित्साधिकारी और फिजिशियन डॉ.बीपी सिंह ने हिदायत दी कि बच्चों, किशोरों, युवतियों को गुझिया, ठंडई या मिठाई के बहाने भांग देने की गलती कतई न करें। यह भारी पड़ सकता है। बच्चे हों या युवतियां, अक्सर भांग पचा नहीं पाते जिससे उल्टी दस्त या डायरिया भी हो सकता है। इसके अलावा युवतियों, किशोरियों पर भांग का असर होने से उनके व्यक्तित्व पर भी खराब असर पड़ सकता है। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ.जेके रस्तोगी, डॉ.विक्रम श्रीवास्तव का कहना है कि हुड़दंग में शामिल किशोरों, बच्चों को शारीरिक और मानसिक दिक्कतें हो सकती हैं। होली पर बस इतनी छूट हो कि पारिवारिक सदस्यों और दोस्तों के साथ मनोरंजन कर सकें।
ज्यादा रंग से पाचन पर प्रभाव
काले, लाल, गुलाबी, हरे रंग तो घर घर में पहुंच ही गए हैं। साथ में चिप्स, पापड़ भी तैयार हो गया है। होली जोश और उल्लास का त्योहार है लेकिन उत्साह बना रहे इसके लिए जरूरी है कि पेट ठीक रहे। चिकित्सकों की राय में ज्यादा चिप्स, पापड़ और भांग हाजमा बिगाड़ सकते हैं। इसके अलावा रंग की अधिकता से दिमाग पर जो असर होता है उससे शरीर के पाचक रस प्रभावित होते हैं।
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