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भीड़ निकालने को नहीं थी कोई योजना

Allahabad Updated Tue, 12 Feb 2013 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 1200 करोड़ रुपये मिले, भारी भरकम प्रचार कर करोड़ों की भीड़ जुटा ली गई। स्टेशन, बस अड्डे, झूंसी, प्रयाग, नैनी से उन्हें सुरक्षित महाकुंभ क्षेत्र पहुंचा भी दिया गया लेकिन भारी भीड़ से गदगद मेला प्रशासन और रेलवे प्रशासन यह भूल गया कि मौनी पर जुटे करोड़ों श्रद्धालुओं को सुरक्षित उनके घर तक कैसे भेजा जाएगा। महाकुंभ में जुटी करोड़ों की भीड़ को बाहर निकालने की कोई योजना ही नहीं थी। भीड़ को मेला क्षेत्र तक पहुंचाने के लिए रास्तों पर तमाम व्यवस्था, योजना, डायवर्जन दिखा लेकिन भीड़ निकालने का वक्त आया तो बस मानो वहां से खदेड़ दिया गया। संगम क्षेत्र पर रविवार को पूरे दिन एनाउंस कर लोगों को वहां से हटाया जाता रहा लेकिन एक बार भी किसी को नहीं बताया गया कि उन्हें किस रास्ते से जाना है।
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मेला क्षेत्र से इस तरह रेलवे स्टेशन के रास्ते पर डाल दिया गया कि दूसरी तरफ के क्षेत्र यानी झूंसी, हंडिया, नैनी, मेजा, मांडा, जारी की तरफ जाने वाले भी जंक्शन के सामने भीड़ में फंसे बस अड्डे का पता पूछते रहे। भीड़ स्टेशन पर पहुंच गई तो पूरे परिसर में अफरातफरी सी फैल गई। लाखों की भीड़ जगह न मिलने पर पटरियों के बीच खाली जगहों में बैठ गई। भीड़ बढ़ने के बाद हादसा कई सवाल छोड़ गया। डीआरएम हरींद्र राव कह रहे हैं कि रेलवे स्टेशन के जिस साइड से लाखों की अनियंत्रित भीड़ पहुंची, वहां से श्रद्धालुओं को आना ही नहीं था। यानी जिस तरफ भीड़ के लिए कोई तैयारी ही नहीं थी, वहीं लाखों लोग पहुंचे और दबाव में भगदड़ मच गई। सवाल यह है कि इतनी भीड़ वहां पहुंच कैसे गई।

तैयारियों पर नहीं हुआ अमल
हादसे के बाद पुलिस के इंतजाम पर भी सवाल उठ रहे हैं। माना जा रहा है कि पुलिस भीड़ को नियंत्रित कर लेती तो स्टेशन के अंदर ऐसा रेला न उमड़ता लेकिन आईजी आलोक शर्मा का कहना है कि मेले से पहले रेलवे अधिकारियों के साथ बैठक में जो योजना बनी थी उसका पालन रेलवे ने नहीं किया। नैनी, झूंसी स्टेशनों पर पहुंची भीड़ को वहां से भगाया गया। जंक्शन पर गेट पर बैठे रेल कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी चाहते तो भीड़ को ओवरब्रिज से सिटी साइड भेज देते। इसके अलावा तय किया गया था कि जो यात्री स्नान को आएंगे, उन्हें एक पर्चा दिया जाएगा कि वापसी के लिए ट्रेन से कहां से मिलेगी। ऐसा नहीं हुआ और भीड़ स्टेशन पर एक तरफ पहुंच गई। स्टेशन पर पहुंची भीड़ को भी एक ही पुल की तरफ झोंक दिया गया जिससे दबाव बढ़ा।

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