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हद है! पैरों तले रौंदी गई जिंदगियों का जिम्मेदार कोई नहीं

Allahabad Updated Tue, 12 Feb 2013 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। मौनी अमावस्या स्नान के लिए आए श्रद्धालुओं की जिंदगियां जंक्शन रेलवे स्टेशन पर पैरों तले रौंदी गई। 24 घंटे बीत गए लेकिन हद दर्जे की इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन है, यह तय नहीं हो सका। बड़े अधिकारी, मंत्री पहुंचे, निरीक्षण किया, पूछताछ की लेकिन किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। मौत का खेल खेलने वालों को फिलहाल क्लीन चिट ही मिल रही है। शर्मसार करने वाली लापरवाही पर रेलवे ने चुप्पी साध ली है। गैर जिम्मेदारी के सारे साक्ष्यों को दरकिनार कर आला हाकिम महज जांच की बात कर रहे हैं। आस्था के इस कुंभ में अपनी जान गंवाने वालों की चीखें थम नहीं रहीं। इलाज के अभाव में प्लेटफार्म पर तड़प कर मरने वालों की चीखें शासन, प्रशासन को सुनाई ही नहीं दे रही हैं। हादसे के दूसरे दिन भी अफसर एक दूसरे को बचाने का खेल खेलते रहे। मौके का मुआयना, मृतकों के घरवालों से मुलाकात, घायलों का हालचाल और अफसरों संग बैठक का ड्रामा सोमवार को दिन भर चला।
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महाकुंभ में पुण्य कमाने आए 36 श्रद्धालु लापरवाही की वजह से काल के गाल में समा गए। 40 से अधिक लोग जिंदगी से जंग लड़ रहे हैं। जंक्शन रेलवे स्टेशन पर जो कुछ भी हुआ वह पूरी व्यवस्था को शर्मसार करने वाला है। एक दर्जन यात्री राहत कार्य न मिलने की वजह से दो घंटे तक तड़प कर मर गए। गंभीर लापरवाही पर रेलवे ने पर्दा डालने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के दूत बनकर आए पंचायती राज मंत्री बलराम यादव, परिवहन मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव महज बयानबाजी तक ही सीमित रह गए। दोनों मंत्रियों को असल घटनाक्रम की जानकारी ही नहीं थी। लापरवाही को लेकर हुए सवालों पर वह मुंह ताकते रहे। मुख्य सचिव जावेद उस्मानी, डीजीपी एसी शर्मा और रेलवे केआला अधिकारी पहुंचे लेकिन कार्रवाई से पहले घटना की तह में जाने का बहाना बनाते रहे। 24 घंटे बाद तक 36 जिंदगियों को दफन करने वाले लापरवाह अफसरों पर कार्रवाई नहीं की गई। यहां तक कि प्लेटफार्म नंबर छह पर तैनात रहे सिपाहियों से पूछताछ तक नहीं हुई।

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कौन देगा इन सवालों के जवाब
0 भीड़ को नियंत्रित करने को लाठी क्यों चलाई गई।
0 तीन घंटे तक घायलों को अस्पताल क्यों नहीं पहुंचाया गया।
0 लाशों को उठाने वाला कोई नहीं था
0 डीआरएम और डीआईजी तीन घंटे बाद क्यों पहुंचे
0 कहां थी एंबुलेंस, स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं थे
0 रेलवे अस्पताल के डॉक्टर, स्टाफ कहां थे
0 सभी घायलों को क्यों भेजना पड़ा स्वरूपरानी

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