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कान्धे पे झोरा, कपारे पे बोरा

Allahabad Updated Sat, 09 Feb 2013 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। महाकुंभ के महास्नान मौनी अमावस्या पर डुबकी लगाने के लिए मेला क्षेत्र में उमड़ी भारी भीड़ उमड़ी
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स्टेशन से लेकर कुंभ नगर तक लगा रहा स्नानार्थियों का रेला, सभी रास्तों, पीपा पुलों, शिविरों में समाते रहे लोग
जिन्हें मेले में नहीं मिला स्थान, उन्होंने करीबी मोहल्लों में तीर्थपुरोहितों की धर्मशालाओं में ली शरण
महाकुंभ नगर। संगम की रेती पर आस्था का अद्भुत सैलाब उमड़ा। सिर्फ बारह ही नहीं बल्कि 147 वर्षों बाद बने दुर्लभ ग्रहीय संयोग और विशिष्ट योग में महाकुंभ के महास्नान पर्व मौनी अमावस्या पर संगम में डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं का रेला कुंभनगर पहुंचा। अब से पहले जनवरी 1865 में प्रयाग में ही अर्धकुंभ के दौरान ऐसा ही संयोग बना था।
ज्योतिर्विदों के मुताबिक नौ फरवरी को दोपहर 2.28 बजे से अमावस्या तिथि शुरू होकर 10 फरवरी को दोपहर 12.47 बजे तक रहेगी। शनिवार की रात 11.02 बजे से शुरू वरियान नामक योग रविवार की रात 8.34 बजे तक रहेगा। भोर से शुरू श्रेष्ठ धनिष्ठा नक्षत्र भी अनेक प्रकार से फलदायी है। इस योग-संयोग में पुण्य कमाने के लिए देश ही नहीं दुनिया के कोने-कोने से श्रद्धालुओं का हुजूम तंबुओं की नगरी में समाता दिखा। कुंभनगरी में भोर से शुरू हुआ सिलसिला देर रात तक जारी रहा। दारागंज, कीडगंज जैसे कुंभनगर के करीबी मोहल्लों में भी तीर्थपुरोहितों की धर्मशालाओं में श्रद्धालुओं का जुटना जारी रहा।

सभी रास्ते कुंभ नगर की ही ओर मुड़े। सभी प्रवेश रास्तों पर स्नानार्थियों का रेला ही दिखा। कुंभ नगरी की ओर आने वाले रास्तों से लेकर मेले के भीतर की सभी सड़कों, पीपा पुलों पर भी दो और चार पहिया वाहनों की कतारें लगीं रहीं। मन में आस्था और माथे पर पुण्य का प्रसाद पाने की चमक के साथ दूरदराज से आने वाले स्नानार्थी भी बड़ी संख्या में मेला क्षेत्र में पहुंचे। कांधे पर झोला और सिर पर बोरा रखे श्रद्धालु स्टेशन से लेकर संगम की रेती तक का रास्ता बिना रुके, बिना थके पूरा करते रहे।
दूर दराज से आने वाले स्नानार्थी मेले में पहुंचकर अपने तीर्थपुरोहितों, संतों-महंतों का शिविर तलाश करते रहे। ठौर मिला तो रास्ते की थकान काफूर हुई। मन निश्चिंत हुआ कि संगम में डुबकी की मनोकामना पूरी होगी। लोगों के पहुंचने के साथ ही कल तक खाली दिखने वाली कुटिया फुल हो गई। शिविरों में रात तक कहीं तिल रखने की जगह नहीं बची। मेला पहुंचे लोगों ने ठौर की तलाश कर ली तो संतों और अखाड़ों के शिविरों की तरफ रुख किया। अखाड़ों में तरह-तरह के बाबाओं के दर्शन और कुंभ की चकाचौंध, विहंगम मानव समाज उन्हें चकित, मुग्ध करता रहा। कई श्रद्धालुओं ने तो पहुंचने के साथ ही डुबकी भी लगाई।
इ लाहाबाद जंक्शन के साथ नैनी, झूंसी, फाफामऊ क्षेत्र की ओर से देर रात तक भीड़ का रेला उमड़ता रहा। मेले में भीड़ और अन्य असुविधाओं से बचने के लिए दूर से आने वालों ने आज ही कुंभनगरी में पनाह ली। संतों के शिविरों और अन्नक्षेत्रों के अतिरिक्त मेला क्षेत्र की दुकानों पर भी भीड़ जुटी।
संगम की रेती पर बसी तंबुओं की नगरी में भारत ही नहीं तकरीबन पूरा विश्व सिमट आया। अलग-अलग संप्रदाय, मत-मतांतर, भाषा, बोली, रीति-रिवाज, शैली और संस्कार वाले अनुयायियों की भीड़ जुटी। भले ही सबकी मान्यता अलग-अलग हो, पर सबका उद्देश्य एक है, मौनी अमावस्या पर डुबकी।
पौराणिक आख्यानों के मुताबिक ‘अश्वमेेध सहस्त्राणि वाजपेय शतानि च/ लक्षप्रदक्षिणा भूमे: कुंभस्नानेन तत्फलम’ अर्थात एक हजार अश्वमेध यज्ञ, सौ वाजपेय यज्ञ और एक लाख बार पृथ्वी की परिक्रमा करने से जो पुण्य फल प्राप्त होता है, वह एक बार कुंभ स्नान से मिलता है। मान्यता है कि कुंभ पर्व पर स्नान के लिए तैंतीस करोड़ देवता भी पधारते हैं सो संगम के पवित्र जल में बहने वाली अमृत की धारा में डुबकी से व्यक्ति पापमुक्त होकर पुण्य का भागी बनता है।
मौनी अमावस्या के मद्देनजर भारी भीड़ से पुराने शहर में शुक्रवार को जाम की स्थिति रही। इलाहाबाद जंक्शन रेलवे स्टेशन, प्रयाग, सिविल लाइंस बस अड्डा से श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भारी भीड़ की वजह से कई मार्गों पर वाहनों का आवागमन बंद करना पड़ा। स्टेशन से लेकर संगम तक हर चौराहे पर पुलिस का पहरा रहा। पुलिस के भारी बंदोबस्त से कई जगह छावनी के हालात हैं।
जगह-जगह श्रद्धालुओं का मजमा देखते हुए शहर को भी छावनी में तब्दील कर दिया गया है। भीड़ के बीच पुलिस अधिकारी बम डिस्पोजल स्क्वायड संग जांच करते फिर रहे हैं। गठरी, झोला, खाने-पीने का सामान से लेकर हर चीज की जांच होती रही। महिलाएं, पुरुष और बच्चे पैदल ही संगम की ओर चलते रहे। उन्हें कई जगह रोका गया। लीडर रोड और नवाबयुसुफ रोड पर श्रद्धालुओं की लाइन सुबह से लगी रही। स्टेशन से संगम तक जगह-जगह बैरिकेडिंग कर दी गई है। भीड़ को देखते हुए रेलवे स्टेशन चौराहे पर वाहनों का प्रवेश बंद कर दिया गया है। विक्रम और रिक्शा-ट्राली को जानसेनगंज से लीडर रोड के बीच खड़ा कराया जा रहा है, यहीं से श्रद्घालु संगम तक पहुंच रहे हैं। दूसरा रूट रेलवे स्टेशन केसामने से काटजू रोड, नखासकोहना, कोतवाली की तरफ से बनाया गया है। हालांकि एक रूट जाने और एक आने के लिए है। भीड़ का रेला और पुलिस का बंदोबस्त जीरो रोड बस अड्डा, खुसरोबाग, सिविल लाइंस और रामबाग बस अड्डे पर भी रहा।

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