कुंभ में भी उपेक्षित हैं प्रयाग के गणतंत्र के वाहक

Allahabad Updated Sat, 26 Jan 2013 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। प्रयाग महाकुंभ के लिए केन्द्र और प्रदेश 1400 करोड़ रुपए की भारी भरकम धनराशि मिलने के बाद भी शहर के ऐतिहासिक महत्व के स्थल स्थानीय प्रशासन की नजर में नहीं आ सके। पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण इन स्थलों की उपेक्षा के कारण महाकुंभ में आने वाले तीर्थ यात्रिायों का ध्यान इन स्थानों की ओर नहीं जा रहा है।
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आजादी के दीवानों के लिए तीर्थ जैसे प्रयाग के महत्वपूर्ण स्थलों मलाका जेल, फांसी इमली, चौक का ऐतिहासिक नीम का पेड़ ,लोकनाथ स्थित रमेशदत्त मालवीय का शहीदी स्थल, आजाद पार्क की ओर इस कुंभ के दौरान विकास की एक भी किरण नहीं गई। गणतंत्र दिवस पर एक बार पहले जैसे ही उपेक्षित इन ऐतिहासिक स्मारकाें को याद कर हम अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेंगे।
‘यूं तो जर्रे-जर्रे में खुदा बसता है मलंग। पर मै सिजदा करता हूं उस जगह को जहां कोई शहीद हुआ हो’। इस बात को भूलकर हमारे सरकारी अधिकारी आज भी शहीदों के स्मारकों की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
मलाका जेल
0 स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल परिसर स्थित ऐतिहासिक मलाका जेल में काकोरी कांड के अमर शहीद रोशन सिंह को फांसी दी गई थी। इस जेल में इलाहाबाद एवं आसपास क्षेत्र के कई जिलों के आजादी के दीवानों को कैद करके रखा गया था। आजादी के दीवानों के लिए तीर्थ स्थल के समान मलाका जेल आज भी उपेक्षा का शिकार है। स्थानीय लोगों के बार-बार आग्रह के बाद भी मलाका जेल का आज भी विकास से दूर है।
चौक नीम का पेड़
चौक स्थित ऐतिहासिक नीम के पेड़ जहां पर 1857 की गदर के बाद अनगिनत लोगों को आजादी के आंदोलन से सहानुभूति के नाम पर बिना कारण फांसी पर लटका दिया गया था। यह स्थल सरकारी उपेक्षा का शिकार है। इस स्मारक पर मात्र स्वाधीनता दिवस और गणतंत्र दिवस आयोजन के बाद ही हम अपने कर्तव्यों की पूर्ति मान लेते हैं।
फांसी इमली
चौफटका के आगे जीटी रोड पर सुलेम सरांय से पहले ऐतिहासिक फांसी इमली सरकारी उपेक्षा के कारण सूख गई है। आसपास अतिक्रमण के कारण यह ऐतिहासिक स्थल लोगों की पहुंच से दूर है।
रमेशदत्त मालवीय का शहीदी स्थल
आजादी के आंदोलन के दौरान सीएवी के नौवीं के छात्र रमेश दत्त मालवीय को अंग्रेजी सरकार के विरोध के कारण लोकनाथ चौराहे के पास गोली मार दी गई थी। इस शहीद का स्मारक आज भी उपेक्षा का शिकार है।
लाल पद्मधर का शहीदी स्थल
भारत छोड़ो आंदोलन के बाद देश भर में छिडे़ आंदोलन के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों की अगुवाई कर रहे लाल पद्मधर को जिला मुख्यालय के सामने अंग्रेजी सरकार ने गोली मार दी थी। विवि के छात्रों की ओर से भले ही अपने आंदोलनों के दौरान पद्मधर को याद कर लिया जाता है परंतु सरकार की ओर से इस ऐतिहासिक स्थल की उपेक्षा जारी है।
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