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शंकराचार्य के विरोध में अखाड़ों ने ठोंकी ताल

Allahabad Updated Sat, 29 Dec 2012 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। महाकुंभ मेला प्रशासन और शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के बीच चतुष्पथ को लेकर बात बनते-बनते बिगड़ गई। सरकार के दबाव पर शुक्रवार सुबह प्रशासन और शंकराचार्य की बातचीत में लगभग तय हो गया था कि चतुष्पथ बनेगा और शंकराचार्य उसी जगह रहेंगे, जहां भूमि पूजा की है लेकिन शाम होते-होते पूरा मामला उलट गया। चतुष्पथ बनने को लेकर सहमति की खबरें फैलने के बाद अचानक अखाड़ों ने मोर्चा खोल दिया। अखाड़ों ने ऐलान कर दिया कि यदि शंकराचार्य चतुष्पथ बना तो वे शाही स्नान का बहिष्कार करेंगे। अखाड़ों के इस ऐलान से मामला फिर उलझ गया है। शंकराचार्य इस पर खामोश हैं, मेला प्रशासन भी कुछ बोलने से कतरा रहा है। इस ऊहापोह में मेले से जुड़े दूसरे लोगों को जमीन के आवंटन में दिक्कतें हो रही हैं।
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चतुष्पथ का मामला शुक्रवार सुबह हल होता दिखने लगा था। सुबह शंकराचार्य खेमे से खबर आई कि बृहस्पतिवार आधी रात के बाद सरकार के दबाव में मेलाधिकारी मणि प्रसाद मिश्र शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद से मिलने मनकामेश्वर मंदिर पहुंचे। बंद कमरे में अग्नि अखाड़े के श्रीमहंत कैलाशानंद के सामने शंकराचार्य स्वरूपानंद से मिले। साधु संतों का दावा है कि मेला अधिकारी ने सबके सामने चतुष्पथ बनाने का वादा किया। शंकराचार्य ने शर्त रखी कि उन्हें लिखित आश्वासन दें तभी आगे बात होगी। साधु संतों की मानें तो मेलाधिकारी यह कह निकल गए कि आश्वासन पत्र लेकर दोपहर में पहुंचेंगे। मेलाधिकारी पहुंचते इससे पहले नया बखेड़ा हो गया। लिखित आश्वासन से पहले ही अखाड़ों तक यह खबर पहुंच गई कि शंकराचार्य चतुष्पथ पर सहमति बन रही है। आननफानन में अखाड़ों की बैठक हुई। मठ बाघम्बरी गद्दी में बुलाई गई अखाड़ों की आपात कालीन बैठक में भारद्वाज ने अध्यक्षता की। जूना अखाड़े के महामंत्री महंत हरिगिरी ने प्रस्ताव रखा कि यदि मेला प्रशासन शंकराचार्य की मांग मान कर शंकराचार्य चतुष्पथ स्थापित करता है तो अखाड़े शाही स्नान का बहिष्कार करेंगे। प्रस्ताव का वहां मौजूद सभी अखाड़ा प्रतिनिधियों ने एक स्वर में समर्थन किया। अखाड़ों ने शंकराचार्य को इस बात के लिए भी आगाह किया कि वह मेले का स्वरूप बिगाड़ने की कोशिश न करें। अखाड़े की बैठक में पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के श्रीमहंत रवींद्र पुरी, निरंजनी अखाड़े के श्रीमहंत नरेंद्र गिरि, बड़ा उदासीन अखाड़े के मुखिया मंहत दुर्गादास, नया उदासीन के जगतार मुनि, आवाहन अखाड़े के सचिव श्रीमहंत सत्यगिरि, निर्वाणी अनी के श्रीमहंत धर्मदास, दिगंबर अनी के रामकिशोर दास, अग्नि अखाड़े के श्रीमहंत गोविंदानंद ब्रह्मचारी, श्रीमहंत कैलासानंद, जूना अखाड़े के श्रीमंत प्रेमगिरि, श्रीमहंत विद्यानंद सरस्वती, श्रीमहंत प्रेमपुरी, आनंद अखाड़े के शंकरानंद सरस्वती, धनराज गिरि, अटल अखाड़े के उदय गिरि आदि मौजूद रहे।
शाही स्नान अखाड़े ही करते हैं। महाकुंभ के शाही स्नान में अखाड़े शामिल न हों तो यह भी अधूरा। लिहाजा अखाड़ों के ऐलान को प्रशासन ने गंभीरता से लिया। बात बनने बनते बिगड़ गई। नया मोर्चा खुल जाने से हालात यह बन गए हैं कि यदि चतुष्पथ नहीं बना तो कुंभ मेला शंकराचार्यों के बिना होगा और यदि बना तो दुनिया भर के श्रद्धालुओं को शाही स्नान देखने को नहीं मिलेगा।
भूमि विवाद में अखाड़ों के मोर्चा खोल लेने के बाद बाकी दोनों पक्ष खामोश हैं। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि अखाड़ों के प्रस्ताव की उन्हें जानकारी नहीं है। पूरे मामले पर वह शनिवार दोपहर में अपने पत्ते खोलेंगे। शंकराचार्य खेमे के दावों के उलट मेला अधिकारी मणि प्रसाद मिश्र ने कहा कि उन्होंने चतुष्पथ बनाने का कोई आश्वासन नहीं दिया। मेला में चतुष्पथ बन ही नहीं सकता और जब चतुष्पथ नहीं बनेगा तो अखाड़ों के शाही स्नान बहिष्कार का सवाल ही नहीं उठता। शंकराचार्य के बारे में कहा कि वह स्वामी स्वरूपानंद को मनाएंगे और लगातार कोशिश होगी कि मेला में वह बने रहें।

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