शिमला से भी ठंडा हुआ शहर, कंबल, रजाई सब फेल

Allahabad Updated Fri, 28 Dec 2012 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। भारी रजाई, मोटा कंबल, ब्लोअर, हीटर सब फेल। सर्दी से धूप भी डरी सहमी है। भोर तो जानलेवा है ही, पूरे दिन एक पल भी ऐसा नहीं रहा कि लोग राहत महसूस करें। दिन भर कुहासा बरसता रहा। मौसम शिमला, मनाली सा रहा। केवल महसूस करने में नहीं, असल में भी सर्दी मनाली जैसी रही। बृहस्पतिवार को शहर में शिमला से भी अधिक सर्दी रही। शिमला में दिन का पारा 12 डिग्री तक चढ़ा लेकिन संगमनगरी में 10.8 पर ही अटक गया। यह अधिकतम तापमान रहा। रात का तापमान केवल 3.2 डिग्री रहा जबकि शिमला में 6.4 डिग्री रहा।
जानलेवा सर्दी के कारण पूरे दिन सड़क पर जो भी दिखा, कांपता ही लगा। भूल से भी जिसने टोपी या मफलर घर छोड़ दिया, वह सिकुड़ा ठिठका सा रहा। बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 10.8 रहा लेकिन भारी नमी के कारण लगा कि दिन में भी पारा पांच से अधिक नहीं है। सूरज तो दिखा ही नहीं। बस एहसास भर रहा कि दिन है। तेज सर्दी ने राहगीरों के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है। फेसियल पॉलसी के इतने मामले पिछले कई वर्षों में सामने नहीं आए। पिछले दो दिन में 50 से अधिक लोग तीखी सर्द हवाओं के शिकार हुए। ताज्जुब यह कि इसमें नैनी, फाफामऊ, झूंसी, सहसों, सोरांव के युवाओं की संख्या अधिक है।
आतंकित करने वाली सर्दी में बच्चों, बूढ़ों को खासी परेशानी हो रही है। ठंडे पानी को छूना मुश्किल है। मुंह धोने में लगता है मानो पिछली बर्फ चेहरे पर मली जा रही हो। भरी दुपहरी में भी लोग ऐसे लैस होकर निकल रहे मानों युद्ध पर जा रहे हों। बाहर ही नहीं, तीखी सर्द हवाएं बंद कमरे में भी परेशान कर रही हैं। दीवारें, कुर्सी मेज छूने से भी कंपकंपी छूटने लगती है। गद्दे-रजाई का पारा मानों बाहर से भी एक डिग्री नीचे रहता है। गहरी नींद आती हो तो भी ठंडे बिस्तर पर सोने में काफी वक्त लगता है। महीने भर पहले जो पूरी तरह फिट होने का दावा कर रहे थे, उनमें से भी ज्यादातर को खांसी, जुकाम की शिकायत है। पहले से ही जिन्हें कफ और श्वास की शिकायत है, उनके लिए सर्दी ने ढेरों मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। एक हफ्ते से चल रही शीतलहरी ने कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले बच्चों का सीना चोक कर दिया है। दमा की शिकायतें बढ़ी ही हैं, निमोनिया से मरने वाले मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
शरीर को चीरती सर्द हवाओं के कारण शहर की घनी बस्तियों और अधिक नमी वाले मोहल्लों में हर तीसरे घर में कोई न कोई बीमार है। शहर पश्चिमी के लगभग सभी मोहल्ले वायरल के रोगियों की संख्या बढ़ी है। वायरल साधारण नहीं है। दो से तीन दिन में ही यह निमोनिया में तब्दील हो जा रहा है। स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय, सरोजनी नायडू बाल चिकित्सालय और बेली अस्पताल में वायरल और निमोनिया के सौ से अधिक मरीज भर्ती हैं। बघाड़ा, नया पुरा, बेली, राजापुर, करेली, मम्फोर्डगंज, रोशनबाग, नुरुल्लारोड, दरियाबाद, कीडगंज मोहल्लों में वायरल के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. राजीव कुशवाहा ने सलाह दी कि बच्चों, बुजुर्गों के साथ युवाओं में भी जिनके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो, उन्हें बासी भोजन और ठंडे पानी से बचना चाहिए।
वरिष्ठ चिकित्साधिकारी और फिजिशियन डॉ.आरके मिश्र के मुताबिक तेज हवा के कारण कान के पास की मांसपेशियों में सूजन देखने को मिल रही है जिससे एक तरफ चेहरे से लेकर आंख तक का हिस्सा फूल जाता है। कई बार गले से दिमाग पर भी अटैक का खतरा रहता है। उनके पास फेसियल पॉलसी के 11 मरीज हैं। चिकित्सकों के मुताबिक फेसियल पॉलसी का सबसे बेहतर इलाज फिजियोथेरेपी है।
वरिष्ठ चिकित्साधिकारी और फिजिशियन डॉ.बीपी सिंह का कहना है कि यह मौसम बच्चों और बुजुर्गों पर अतिरिक्त ध्यान देने का है। सुबह और रात में बाहर निकलना खतरनाक है। जब तक बहुत मजबूरी न हो, बाहर कतई न निकलें और अगर इंमरजेसी में निकलें तो पूरा शरीर, सिर, कान ढंक के। ठंडी चीजें खाने से बचें, यह खतरनाक हो सकता है।

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