बेनतीजा रही शंकराचार्य-मेला अधिकारी वार्ता

Allahabad Updated Fri, 28 Dec 2012 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। महाकुंभ मेला में शंकराचार्य चतुष्पद का मामला प्रशासन, सधु संत, सरकार सबके गले की हड्डी बन गया है। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद बगैर शंकराचार्य चतुष्पद के मेला में बसने को तैयार नहीं है और मेला प्रशासन उसे बनाने पर फिलहाल सहमत नहीं हुआ है। सरकार की तरफ से लोकनिर्माण मंत्री शिवपाल यादव के हस्तक्षेप के बाद भी बात नहीं बनी। शंकराचार्य और मेला प्रशासन जिस कदर अपनी बातों पर कायम हैं, उससे यह आशंका बढ़ गई है कि महाकुंभ बगैर शंकराचार्य के ही होगा। बृहस्पतिवार को पीडब्ल्यूडी मंत्री शिवपाल ने शंकराचार्य स्वरूपानंद से बात की और वादा किया कि उनकी मांगे मानी जाएंगी। उनके फोन के बाद मेला अधिकारी स्वामी स्वरूपानंद से मिलने पहुंचे लेकिन बातचीत का मुद्दा वही रहा जो बुधवार रात तक था। स्वामी स्वरूपानंद ने दोटूक शब्दों में कहा कि शंकराचार्य चतुष्पद नहीं बना सकते तो बात नहीं हो सकती। मेला अधिकारी ने फिलहाल इसमें असमर्थता जताई लिहाजा कोई नतीजा नहीं निकला। शंकराचार्य का शिविर उखड़ चुका है और स्वामी स्वरूपानंद जबलपुर के निकट परमहंसी आश्रम जा रहे हैं। आगे क्या होगा, मेला में वह और अन्य शंकराचार्य आएंगे या नहीं, कुछ भी साफ नहीं है। शंकराचार्यों को मनाने की कोशिशें न हुईं तो अन्य साधु- संतों की भी नाराजगी बढ़ने की आशंका है।
मनकामेश्वर मंदिर पर बृहस्पतिवार देर रात शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती से मिलने गए कुंभ मेला अधिकारी और एसएसपी कुंभ मेला बिना किसी आश्वासन लौट गए। कुंभ मेला अधिकारी मणि प्रसाद मिश्र के पास शंकराचार्य को मनाने का कोई नया प्रस्ताव नहीं था। उन्होंने स्वामी स्वरूपानंद से मेले में लौटने का अनुरोध किया लेकिन शंकराचार्य चतुष्पद पर खामोशी के कारण बात नहीं बनी।
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के मुताबिक, मेले में चारों ही शंकराचार्यों के एक जगह होने से श्रद्धालुओं को होती, इसी नजरिए से यह प्रस्ताव तैयार किया गया था। इसे खारिज करने की बात समझ से परे है। उन्होंने दो टूक कहा कि प्रस्ताव न माना गया तो मेले में आना संभव न होगा। मेला अधिकारी बिना किसी आश्वासन चले गए लेकिन कहा कि फिर आएंगे। बातचीत के दौरान मौजूद अग्नि अखाड़े के स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी बीच का रास्ता निकालने के लिए प्रयासरत रहे लेकिन कोई सर्वमान्य हल नहीं निकला।
बातचीत के दौरान एक बार फिर शृंगेरी पीठ की भूमि का मुद्दा ही अटका रहा। शंकराचार्य के प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ ही शृंगेरी के प्रतिनिधि रमणी शास्त्री ने भी मेला क्षेत्र छोड़ दिया था। उसी रात उस शिविर में अखिल भारतवर्षीय धर्मसंघ के सदस्य दाखिल हो गए थे, जहां अब बाकी तैयारियां जारी हैं। ऐसे में उन्हें वहां से हटाना संभव नहीं होगा।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के मुताबिक शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से बातचीत के बाद पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने भी शंकराचार्य चतुष्पद के प्रस्ताव पर सहमति और समर्थन व्यक्त किया है। पुरी के शंक राचार्य का 29 जनवरी को कुंभ मेले में आने का कार्यक्रम है।
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती इलाहाबाद से मुंबई मेला से श्रीधाम पहुंचेंगे जहां से जबलपुर के करीब परमहंसी आश्रम जाएंगे। फिलहाल उम्मीद है कि वह एक-दो रोज इलाहाबाद रुकेंगे।

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