संभलिए, वरना जान पर बन आएगी

Allahabad Updated Thu, 27 Dec 2012 05:30 AM IST
इलाहाबाद। शरीर को अंदर तक भेदने वाली तीखी सर्दी बेहद खतरनाक हो चली है। पारा तीन डिग्री तक नीचे पहुंच गया है। भोर में बिस्तर छोड़ना जान से खेलने जैसा है। दिन में सूरज दिखने के बाद भले ही धूप में थोड़ा सुकून महसूस हुआ लेकिन शाम ढलते ही मौसम ने ऐसी पलटी मारी कि शाम सात बजे तक सड़क और बाजार में सन्नाटा पसर गया। शाम सात बजे पारा सात डिग्री से भी कम हो गया था। बाहर खुले में खड़े होना भी मुश्किल है। सर्दी मानों ऊपर से झर रही है।
ब्लडप्रेशर और दिल केरोगियों के लिए यह मौसम बेहद खतरनाक है। खानपान और दिनचर्या बिगड़ी तो जान के लिए खतरा हो सकता है। दिल की परेशानी हो या सांस संबंधी दिक्कत हो तो डॉक्टरों के संपर्क में रहें। मंगलवार सुबह का पारा छह डिग्री से ऊपर था। ऐसे में तीन डिग्री गिरकर 3.5 तक टिकना खतरनाक है। वातावरण में जो बदलाव दिख रहा, सर्दी और तीखी होने की आशंका है।
हड्डियां कंपा देने वाली सर्दी ने शहरियों का सिस्टम बिगाड़ दिया है। सुबह दस बजे तक घर से निकलना मुश्किल है और शाम छह बजे ही लोग घरों में कैद हो जा रहे हैं। मंगलवार को आधी रात के बाद कोहरे के कारण आवागमन प्रभावित रहा और बुधवार सुबह नौ बजे भी सड़कों पर इक्का दुक्का वाहन ही नजर आए। सुबह तीखी ठंड के बाद भी किसी जरूरत से जो बाहर निकले, उनकी हालत देखने लायक थी। दोपहिया सवार तो मुश्किल से कांपते-कांपते गंतव्य तक पहुंचे। बुधवार सुबह डरावनी सर्दी रही। लोग देर तक अलाव लगाकर उसके सामने बैठे रहे। बच्चों, बूढ़ों को बिस्तर से निकलने में परेशानी हुई। दफ्तर का काम प्रभावित हुआ तो नौवीं से बारहवीं तक के जो स्कूल खुले रहे, उनमें उपस्थिति 50 फीसदी से भी कम रही।
चिकित्सकों का कहना है कि सर्दी से बचने के लिए दिन भर रजाई में दुबकेरहे तो भी खतरा है। शरीर में गर्मी लाने के लिए जॉगिंग जरूरी है तो तापमान सामान्य रखने के लिए अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए। अधेड़ों और बुजुर्गों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ.एनपी सिंह, डॉ.शिवकेश त्रिपाठी के मुताबिक पानी, आंवला, गुड़ शरीर का प्रयोग कर सर्दी से बचा जा सकता है। डॉ.आशुतोष गुप्ता का कहना है कि ऐसे मौसम में दमा रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ती है। उन पर अतिरिक्त ध्यान देने की जरूरत है।
कोयला और लकड़ी की कीमतें आसमान पर
शीतलहरी से बचने के लिए घर घर में अलाव जल रहे हैं। अलाव के लिए लकड़ी हो या कोयला, सबकी कीमतें आसमान छू रही हैं। लकड़ी का कोयला 35 से 40 रुपए तो पत्थर का 18 से 20 रुपए किलो में बिक रहा है। साधारण जलाऊ लकड़ी दस से बारह रुपए किलो में बिक रही है। थोड़े दिन पहले ही लकड़ी का कोयला 25 रुपए तो लकड़ी आठ रुपए किलो में बिक रही थी।

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