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मालवीय जी न होते तो न होता पूना पैक्ट

Allahabad Updated Wed, 26 Dec 2012 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। ऑल इंडिया सेवा समिति, हिन्दी साहित्य सम्मेलन एवं हिन्दू छात्रावास की ओर से मंगलवार को महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की 152वीं जयंती मनाई गई।
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रामबाग स्थित सेवा समिति गार्डेन में ‘महामना के दर्शन एवं जीवन मूल्यों की प्रासंगिकता’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय गोष्ठी में विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि देश को चौतरफा सांस्कृतिक हमलों से बचाने के लिए महामना का दर्शन और जीवन मूल्य आज भी प्रासंगिक हैं। अगर मालवीय जी न होते तो पूना पैक्ट न होता। पूना पैक्ट न होता तो देश का एक और विभाजन तय था। उन्होंने धर्म, राजनीति, शिक्षा और समाज सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए। विशिष्ट अतिथि उच्चतर शिक्षा आयोग के पूर्व सदस्य प्रो. अमर सिंह ने कहा कि महामना ने हिंदुत्व की धारा की पुनर्र्पतिष्ठा की। वह प्रयाग की भूमि पर जन्म लेने वाले महानतम रत्न थे।
गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय ने कहा कि महामना दूरदर्शी थे और आजीवन शिक्षा एवं समाज की तरक्की के लिए प्रयासरत रहे। इस मौके पर महापौर अभिलाषा गुप्ता ने भी विचार व्यक्त किए। प्रारंभ में कार्यक्रम संयोजक प्रो.गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन डॉ. निरंजन सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन विजय वैश्य ने किया। इसमें प्रधानाचार्य बीके शर्मा, डॉ.योगेशचंद्र त्रिपाठी, डॉ.प्रमोद शुक्ल, अजय मिश्र आदि ने सहयोग किया।
साहित्य सम्मेलन में ‘हिन्दी पत्रकारिता में महामना मदन मोहन मालवीय का योगदान’ विषय पर गोष्ठी हुई। गोष्ठी में शिक्षक धनंजय चोपड़ा ने मालवीय जी की पत्रकारिता के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा करते हुए उनके योगदान को रेखांकित किया। प्रारंभ में उनके चित्र पर माल्यार्पण किया गया। धन्यवाद ज्ञापन प्रधानमंत्री विभूति मिश्र ने किया। इसमें नंदल हितैषी, हरिमोहन मालवीय, चेतनाथ झा, अरुण ओझा, आलोक चतुर्वेदी आदि उपस्थित थे। हिन्दू छात्रावास में हुई गोष्ठी में न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय ने कहा कि हिन्दू छात्रों की समस्याओं को देखते हुए महामना ने हिन्दू छात्रावास की स्थापना की और बाद में बीएचयू की स्थापना की। मुख्य वक्ता प्रो.रामशकल पांडेय ने उनके जीवन पर प्रकाश डाला। इविवि के परीक्षा नियंत्रक प्रो.एचएस उपाध्याय ने उनके जीवन को आदर्श दर्शन बताया, जबकि महापौर अभिलाषा गुप्ता ने उनके द्वारा प्रयाग में किए गए कार्यों को महत्वपूर्ण बताया। इसमें प्रो.जटाशंकर त्रिपाठी, केके मालवीय, डॉ.सुधाकर त्रिपाठी, डॉ.एपी ओझा, प्रो.एचएन दुबे ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन पद्ममणि दीक्षित ने किया।

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