शिविर को लेकर शंकराचार्य आमने-सामने

Allahabad Updated Mon, 24 Dec 2012 05:30 AM IST
इलाहाबाद। कुंभ क्षेत्र में भूमि आवंटन को लेकर मेला प्रशासन से तो विवाद चल ही रहा है, अब शंकराचार्य खुद आमने सामने आ गए हैं। शंकराचार्य स्वरूपानंद के प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद लगातार एक हफ्ते से शंकराचार्य चतुष्पद के मुताबिक जमीन को लेकर अड़े हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि मंगलवार तक मेला प्रशासन ने समस्या का हल न निकाला तो समर्थकों साथ मेला छोड़ देंगे। मेला प्रशासन उन्हें मनाने में जुटा है लेकिन दो शंकराचार्यो ने उनके अभियान की मुखालफत कर दी है। शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती और शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने ‘शंकराचार्य चतुष्पद’ को पूरी तरह से अवैध करार दिया। उनका कहना है कि किसी को भी नई परंपरा शुरू करने का अधिकार नहीं है। अलोपीबाग आश्रम में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान शंकराचार्य वासुदेवानंद ने साफ कहा कि वर्ष 2007 के अर्धकुंभ में जिसे जहां बसाया गया था, इस बार भी उसे वहीं भूमि दी जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी भी दी कि टीकरमाफी आश्रम के स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी को उनके स्थान से बेदखल किया गया तो मेले का माहौल बिगड़ेगा। फिर न सिर्फ वह बल्कि कई और लोग भी वहां से हट जाएंगे। उन्होंने शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद से मेले का माहौल न बिगड़ने देने सहित मेले की कुशलता में सहयोग करने का सुझाव दिया।
दंड के अधिकारी नहीं अविमुक्तेश्वरानंद
स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर मेले का माहौल बिगाड़ने सहित जातिसूचक आरोप लगाया। उनके मुताबिक वह जिस जाति से संबंध रखते हैं, उसे न दंड लेने और न ही शंकराचार्यों के बारे में बोलने का अधिकार है। उनकी ओर से शंकराचार्य चतुष्पद के लिए हठधर्मिता ठीक नहीं है। उनके मुताबिक शंकराचार्य परंपरा में असली और नकली की बात कहना व्यवस्था का अपमान है।
तो दंडी संन्यासी भी होंगे बेदखल
दंडी संन्यासी प्रबंध समिति ने भी शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद से अपने प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से दंड वापस लेने की अपील की है। साथ ही चेतावनी भी दी कि हरिचैतन्य ब्रह्मचारी को बेदखल किया गया तो दंडी संन्यासी समाज भी बेदखल हो जाएगा।

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