शंकराचार्यों के भूमि आवंटन पर बढ़ा बवाल

Allahabad Updated Sun, 23 Dec 2012 05:30 AM IST
इलाहाबाद। शंकराचार्यों को भूमि आवंटन के विवाद का हल शनिवार को भी नहीं निकाल सका। इससे मेला प्रशासन की शंकराचार्य चतुष्पद बनाने की योजना को भी ग्रहण लगता दिख रहा है। शंकराचार्यों के प्रतिनिधि भूमि पूजन के बाद अपना शिविर हटाने को तैयार नहीं हैं तो टीकरमाफी के महंत हरिचैत्यन भी इस बात पर अड़े हैं कि वह उसी भूमि पर रहेंगे, जो उनको आवंटित की गई है। मेला प्रशासन के अफसरों ने शनिवार को भी दोनों पक्षोें से बात कर रास्ता निकालने की कोशिश की लीेकिन बात बनी नहीं। चारों पीठ के शंकराचार्यों के प्रतिनिधि स्थान बदलने पर मेला छोड़ने की बात पर अड़े हैं।
भूमि आवंटन में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी अब मेला प्रशासन के गले का फांस बन गई है। शंकराचार्य चतुष्पथ बनाने और उसके चारों कोनों पर आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चारों पीठ के शंकराचार्यों को भूमि आवंटन करने पर विवाद गहराता जा रहा है। ज्योतिष पीठ एवं द्वारिका शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के उत्तराधिकारी शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के प्रतिनिधि राम कैलाश पांडेय शृंगेरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य भारती तीर्थ के प्रतिनिधि रमणी शास्त्री भूमि पूजन के बाद शिविर हटाने के बजाय मेला छोड़ने की बात पर डटे हैं। वहीं, टीकरमाफी मठ के महंत हरिचैतन्य ब्रह्मचारी उसी भूमि के लिए अड़े हैं। मेलाधिकारी मणिप्रसाद मिश्रा ने उनसे मेला न छोड़ने के लिए अनुरोध किया है और समाधान के लिए दो दिन की मोहलत मांगी है।

शंकराचार्य के शिष्य ने दी सफाई
शंकराचार्य के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का कहना है कि शंकराचार्य के शिष्यों द्वारा भूमि कब्जा किए जाने के आरोप निराधार हैं। मेला प्रशासन की ओर से भूमि आवंटित किए जाने के बाद ही 14 दिसंबर को भूमि पूजन हुआ। शनिवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि मेला प्रशासन को दो महीने पहले चतुष्पथ बनाने का प्रस्ताव दिया गया था। उसी के मुताबिक चारों शंकराचार्यों की भूमि आवंटित हुई। अगर जमीन से हटने की नौबत आई तो शंकराचार्यों के प्रतिनिधि सिर पर अपने गुरु का चित्र रखकर मेला छोड़कर चले जाएंगे।

स्वरूपानंद ने दी बहिष्कार की चेतावनी
मेले प्रशासन से रवैये से नाराज शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का कहना है कि वह महाकुंभ में नहीं आएंगे। काशी में प्रवास कर रहे शंकराचार्य ने मेलाधिकारी मणिप्रसाद मिश्रा से टेलीफोन पर कहा कि वह ऐसे स्थान पर नहीं आएंगे जहां सनातन धर्म के सर्वोच्च आचार्य का सम्मान न हो। उनके बयान का समर्थन पुरी एवं शृंगेरी पीठ के शंकराचार्यों ने किया है।

शिविर हटाया तो होगा भारी विरोध
शंकराचार्य सनातन धर्म के प्रतीक हैं और उनके सम्मान को कायम रखना मेला प्रशासन का दायित्व है। अगर उनके शिविर को हटाया गया तो जबरदस्त विरोध होगा। यह बातें विहिप के आचार्य कुशमुनि ने शुक्रवार को शंकराचार्य शिविर में कहीं। उन्होंने कहा कि चतुष्पथ की पहल स्वागत योग्य है। शंकराचार्यों के साथ करोड़ों हिंदुओं की आस्था जुड़ी हुई है। संगमनगरी में दुनिया भर से आने वाले श्रद्धालुओं को एक स्थान पर आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चारों पीठ के शंकराचार्यों के दर्शन होंगे।

...तो बसने से पहले उजड़ जाएगा कुंभ
रामानंद विश्व हितकारी परिषद के स्वामी राम कमलदास वेदांती ने कहा कि शंकराचार्यों का सम्मान सर्वोच्च है और उसको कायम रखना हर सनातनी संत का फर्ज है। उन्होंने अपील की कि संत समाज उनके मान की रक्षा को आगे आए। कहा कि अगर उनका शिविर हटा तो महाकुंभ क्षेत्र बसने से पहले ही उजड़ जाएगा।

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