जीवन को एक सूत्र में बांधने की कोशिश है कुंभ डायरी

Allahabad Updated Tue, 18 Dec 2012 05:30 AM IST
इलाहाबाद। कुंभ के भावपूूर्ण एवं जीवंत बिंबों को समेटे पत्रकार-छायाकार प्रभात की ‘कुंभ एक फोटोग्राफर की डायरी’ का विमोचन उर्दू के विख्यात शायर समालोचक पद्श्री शमसुर्रहमान फारुकी और हिन्दी के समालोचक प्रो. राजेन्द्र कुमार ने किया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दृश्यकला विभाग एवं बैकस्टेज की ओर से सोमवार को संयुक्त रूप से आयोजित विमोचन समारोह में वक्ताओं ने डायरी में लेखक की रचनाधर्मिता को सराहने के साथ उसके महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर प्रकाश डाला। डायरी में उन बातों का प्रोजेक्शन है, कुंभ जिनकी वजह से होता है।
मुख्य अतिथि पद्श्री शमसुर्रहमान फारुकी ने कहा कि मेरे जेहन में 60 साल के दौरान आयोजित कुंभ मेलों की स्मृतियां हैं, उनके चिन्ह इस डायरी में मिलते हैं। उन्होंने कहा कि प्रभात की किताब में उन लोगों का चित्रण है जो मेले में अनजान चेहरों के रूप में दिखाई पड़ते हैं। विमोचन समारोह की अध्यक्षता कर रहे जाने माने समालोचक प्रो. राजेन्द्र कुमार ने कहा कि शब्दों से भी किसी वस्तु या प्रसंग की तस्वीर खींची जा सकती है, यह डायरी के लेखक ने साबित कर दिया है। महाकुंभ के ठीक पहले इस डायरी का लोकार्पण इसको अर्थपूर्ण बनाता है। इस डायरी को गद्य में लिखा मुक्तक कहा जो आकार में छोटी है लेकिन असर गहरा करती है। लेखक ने डायरी में मनुष्य की आकृति, प्रवृत्ति और विकृति तीनों को बड़ी सावधानी के साथ जस का तस सौंपा है।
स्वागत इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दृश्यकला विभाग के अध्यक्ष डॉ. अजय जैतली ने किया। उन्होंने डायरी को रंगकर्म के साथ-साथ शब्दकर्म से जुड़ी प्रतिबद्घता का संगम बताया। प्रो. अनिता गोपेश ने डायरी में आमजन की पक्षधरता की सराहना की। कवि एवं पत्रकार अजामिल ने कहा कि प्रभात की डायरी में गहरी जीवन दृष्टि है, उन्होंने सामान्य बातों को असाधारण ढंग से प्रस्तुत किया है। आधार वक्तव्य एवं संचालन डॉ. सूर्य नारायण ने किया। उन्होने कुंभ एक फोटोग्राफर की डायरी को विशिष्ट शैली में रची गई महत्वपूर्ण कृति बताया। कार्यक्रम के अंत में आभार ज्ञापन बैक स्टेज के निदेशक प्रवीण शेखर ने किया। इस मौकेपर प्रो. संतोष भदौरिया, सुनील उमराव, संजय कुमार, अरूण आदित्य, अवधेश गुप्ता, नंदल हितैषी, रतन दीक्षित सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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