कुंभ में बसेगा नया महामंडलेश्वर नगर

Allahabad Updated Wed, 12 Dec 2012 05:30 AM IST
इलाहाबाद। कुंभ में महामंडलेश्वरों की संख्या इस बार दोगुनी हो गई है। मेला प्रशासन के लिए नए महामंडलेश्वरों को जमीन देना सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। मंगलवार को मेला प्रशासन के कार्यालय में अखाड़ों के प्रतिनिधियों और अफसरों के बीच हुई बैठक में तय हुआ कि नए महामंडलेश्वरों को भी मेले में जमीन दी जाएगी। इसके लिए अलग से महामंडलेश्वर नगर बसाया जाएगा। मेला प्रशासन और संतों के बीच सहमति बनने के बाद अब विचार किया जा रहा है कि नए महामंडलेश्वरों को जमीन कहां दी जाए।
अर्धकुंभ में तकरीबन 125 महामंडलेश्वरों को मेले में जमीन दी गई थी लेकिन इस बार कुंभ में 327 महामंडलेश्वरों ने जमीन के लिए दावा कर दिया। शुरुआत में मेला प्रशासन ने नए महामंडलेश्वरों को जमीन देने में आनाकानी की तो संतों ने विरोध शुरू कर दिया। अखाड़े अड़ गए कि सभी महामंडलेश्वरों को कुंभ में जमीन दी जाए। मामला बढ़ता चला गया। बवाल की आशंका पर मेला प्रशासन ने मंगलवार को अखाड़ों की बैठक बुला ली। मेलाधिकारी मणि प्रसाद मिश्र की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी कि पुराने महामंडलेश्वरों को अर्धकुंभ 2006-07 की तर्ज पर पूर्व निर्धारित स्थान पर जमीन दी जाएगी जबकि नए महामंडलेश्वरों के लिए अलग से महामंडलेश्वर नगर बसाया जाएगा। हालांकि यह अभी तय नहीं हुआ है कि महामंडलेश्वर नगर किस सेक्टर में बसाया जाएगा। मेला प्रशासन के सूत्रों के मुताबिक नए महामंडलेश्वरों को सेक्टर-सात में जमीन देने की योजना बनाई जा रही है लेकिन इसे अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। हालांकि यह तय माना जा रहा है कि अखाड़े सेक्टर-सात में जमीन नहीं लेंगे, क्योंकि यह सेक्टर मेला के मध्य क्षेत्र से कई किलोमीटर दूर है और इसका क्षेत्र बदरा सोनौटी तक फैला है। उधर, निरंजनी अखाड़े के सचिव नरेंद्र गिरी, जूना आखाड़ा के राष्ट्रीय महासचिव हरि गिरी और निर्वाणी अड़ी के महंत धर्मदास मेला प्रशासन के निर्णय से संतुष्ट हैं। उनका कहना है कि अभी तय नहीं हुआ कि नया महामंडलेश्वर नगर कहां बसाया जाएगा लेकिन उम्मीद यही है कि मेला प्रशासन नए महामंडलेश्वरों को बेहतर जगह मुहैया कराएगा। उन्होंने मेला संबंधी तैयारियों पर भी संतुष्टि जताई।
जमीन देना मेला प्रशासन की मजबूरी
मेला प्रशासन सभी महामंडलेश्वरों को जमीन देने के लिए मजबूर है, भले ही इसके लिए कल्पवासियों को मेला के दूर-दराज क्षेत्र में बसा दिया जाए। दरअसल, मेला प्रशासन ने अब तक एक ही काम किया और वह यह कि संत किसी तरह खुश रहें। अफसरों को मालूम है कि तैयारियां भले ही आधी-अधूरी रह जाएं, मेला चौपट हो जाए, अव्यवस्था बनी रहे लेकिन संत खुश रहेंगे तो विरोध करने वाला कोई नहीं होगा और अफसर आराम से अपना काम करते रहेंगे। अफसर यह भुला बैठे हैं कि मेला कल्पवासियों का है। उनके लिए भी कुछ करना है। कम से कम सही समय पर जमीन और सुविधाओं का आवंटन तो हर हाल में हो जाना चाहिए लेकिन एक करोड़ 99 लाख 70 हजार 670 वर्ग मीटर जमीन पर आयोजित होने वाले कुंभ मेले में अब तक एक भी कल्पवासी को नहीं बसाया जा सका है जबकि मेला शुरू होने में एक माह से भी कम समय शेष रह गया है।

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