छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ पर हाईकोर्ट सख्त

Allahabad Updated Sun, 09 Dec 2012 05:30 AM IST
इलाहाबाद। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2013 मेें हजारों छात्रों के भविष्य से गंभीर खिलवाड़ किया गया है। इसकी वजह से इन छात्रों के परीक्षा में बैठ पाने पर संशय पैदा हो गया है। मामला हाईकोर्ट के संज्ञान में आने के बाद न्यायालय ने इस पर सख्त रुख अपनाया है। सचिव माध्यमिक शिक्षा को निर्देश दिया है कि वह पूरे मामले की जांच कर गाजीपुर डीआईओएस और क्षेत्रीय निदेशक के खिलाफ कार्रवाई करें। सचिव को यह भी कहा है कि इस कार्रवाई से न्यायालय को व्यक्तिगत हलफनामे के जरिए अवगत कराएं। मामला गाजीपुर और अन्य जिलों से जुड़ा है।
गाजीपुर के श्रीदुर्गा हिंदू-मुस्लिम इंटर कालेज के प्रधानाचार्य जियारत हुसैन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इस मामले को उठाया है। जियारत हुसैन ने याचिका माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षा सभा की ओर से दाखिल की है। उनका कहना है कि वर्ष 2011 में उनके विद्यालय सहित गाजीपुर के 712 विद्यालयों को कक्षा 9 और 11 के छात्रों का अग्रिम पंजीकरण कराने के लिए काफी विलंब से फार्म दिया गया। विद्यालयों को फार्म 23 अक्तूबर 2011 को मिले जबकि बोर्ड द्वारा फार्म जमा करने की निर्धारित तिथि एक अक्टूबर है। इन फार्मों को विद्यार्थियों से भराने के बाद 15 नवंबर को डीआईओएस कार्यालय में जमा किया गया। मगर कार्यालय ने यह कहते हुए फार्म अस्वीकार कर दिए कि बोर्ड द्वारा फार्म जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ाए जाने के बाद ही इसे स्वीकार किया जाएगा। लिहाजा वर्ष 2011 में किसी भी छात्र को अग्रिम पंजीकरण नहीं हो सका। पंजीकरण न होने की स्थिति में इन छात्रों द्वारा वर्ष 2013 की बोर्ड परीक्षा हेतु परीक्षा फार्म भी नहीं भराया जा सकेगा। याचिका के मुताबिक जियारत हुसैन ने 7 अक्तूबर 2011 को निदेशक माध्यमिक शिक्षा को पत्र लिखकर इस स्थिति से अवगत भी कराया था। क्षेत्रीय सचिव द्वारा पूरे क्षेत्र के विद्यालयों को फार्म समय से उपलब्ध नहीं कराए गए। गाजीपुर और बलिया सहित जिलों में इस प्रकार की समस्या होने की शिकायत याचिका में की गई है।
याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति अरुण टंडन ने अधिकारियों के इस लचर रवैये पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि फार्म जमा करने की तिथि निदेशक द्वारा इसलिए तय की गई है कि बोर्ड परीक्षा में आवंक्षित लोग प्रवेश न कर सकें। खुद उनके अधिकारी इस नियम की धज्जियां उड़ा रहे हैं। कोर्ट ने सचिव माध्यमिक शिक्षा को निर्देश दिया है कि वह इस मामले की जांच कर इस स्थिति के लिए जिम्मेदार डीआईओएस गाजीपुर और क्षेत्रीय निदेशक के खिलाफ कार्रवाई कर न्यायालय को अवगत कराएं।
कहां कराएंगे कार्यरत शिक्षकों की ट्रेनिंग
इलाहाबाद। कार्यरत अध्यापकों के लिए भी टीईटी अनिवार्य करने के मामले में सुनवाई करते हुए न्यायालय पूरी जानकारी उपलब्ध न कराने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट के आदेश पर इस मामले में मुख्य सचिव की ओर से हलफनामा दाखिल कर बताया गया कि कार्यरत अध्यापकों को 31 अगस्त 2015 तक टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। मगर हलफनामे में इस बात की जानकारी नहीं दी गई थी कि परीक्षा किस प्रकार से कराई जाएगी। प्रशिक्षण कहां और कैसे दिया जाएगा। ऐसी तमाम जानकारियों का ब्यौरा उपलब्ध न होने पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने मुख्य सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। इंद्रासन सिंह द्वारा दाखिल याचिका पर अब कोर्ट बुधवार 12 दिसंबर को सुनवाई करेगी। उल्लेखनीय है कि टीईटी की गाइड लाइन के मुताबिक सभी शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। कार्यरत शिक्षकों के लिए सरकार ने अलग से नियम बनाया है।

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