जमीन आवंटन में घपला, हुआ बवाल

Allahabad Updated Sun, 02 Dec 2012 05:30 AM IST
इलाहाबाद। आखिर वही हुआ, जिसकी आशंका थी। मेला प्रशासन ने जमीन आवंटन के नाम पर ‘खेल’ शुरू कर दिया है। अखाड़ों को जमीन आवंटन के दौरान शनिवार को संतों के कंधों पर हाथ रखकर घूम रहे कुंभ मेलाधिकारी काफी खुश नजर आए। हालांकि इस खुशी के पीछे छिपा राज बाद में सामने आया तो बखेड़ा खड़ा हो गया। अखाड़ों को सेक्टर चार में जो जमीन आवंटित की गई, उसे लेकर विवाद हो गया। प्रयागवाल सभा ने दावा किया कि यह जमीन उसे मिलनी चाहिए। उनका दावा है कि यह जमीन पहले उन्हें मिलती रही है। प्रयागवाला सभा के प्रतिनिधियों का कहना है कि पुराने दस्तावेज देखे जाएं तो इस जमीन पर कल्पवासियों का अधिकार है। जमीन आवंटन में इस गड़बड़ी के खिलाफ प्रयागवाल सभा के प्रतिनिधियों ने मेला कार्यालय के सामने आमरण अनशन करने का निर्णय लिया है।
शनिवार सुबह दस बजे से अखाड़ों को जमीन बांटने की प्रक्रिया शुरू की गई। इस दौरान मेलाधिकारी मणि प्रसाद मिश्र, एडीएम कुंभ एसके शर्मा, सभी अखाड़ों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स मौजूद थी। सभी 13 अखाड़ों को सेक्टर चार में जमीन आवंटित की गई लेकिन शाम को नया विवाद पैदा हो गया। प्रयागवाल सभा के प्रतिनिधियों ने जमीन आवंटन में घोटाले का आरोप लगाया। कहा कि अधिकारी और बाबुओं ने आवंटन में गड़बड़ी की है। दोपहर तक जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी हो गई लेकिन जब प्रयागवाल सभा के प्रतिनिधियों को सूचना मिली तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। प्रयागवाल सभा की जमीन अखाड़ों को दी जा चुकी थी। सभा के अध्यक्ष अजय कुमार पांडेय ने आरोप लगाया कि मेलाधिकारी ने कुछ संतों के दबाव में गलत तरीके से जमीन आवंटित कर दी है। उनका दावा है कि कुंभ-2001 और अर्धकुंभ 2006-07 के दौरान सेक्टर चार में प्रयागवाल सभा को जमीन मिली थी और उनके पास इसका लिखित प्रमाण भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि आवंटन से संबंधित फाइलें जिन बाबुओं ने तैयार की हैं, उन्होंने भारी गड़बड़ी की है। आरोप है कि बाबुओं ने पुराने दस्तावेजों से छेड़छाड़ की। इसके बावजूद उन्हें दोबारा महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपकर फिर अनियमितता करने का मौका दिया गया।
मेला प्रशासन ने प्रयागवाल को नहीं दिया नक्शा
मेला प्रशासन ने भले ही जमीन आवंटन का नक्शा तैयार कर लिया हो लेकिन उसे सार्वजनिक करने से कतरा रहा है। प्रयागवाल सभा के प्रतिनिधियों ने एक हफ्ते पहले मेला प्रशासन को आवेदन देकर प्रस्तावित नक्शा मुहैया की मांग की थी लेकिन सभा को नक्शा उपलब्ध नहीं कराया गया। जमीन आवंटन में गड़बड़ी का खुलासा न हो, सो संस्थाओं के नाम और मेला का नक्शा भी ऑनलाइन नहीं किया गया। संस्थाओं की फाइलों पर भी कुछ बाबुओं ने कब्जा कर रखा है। कमिश्नर और खुद मेलाधिकारी भी मान चुके हैं कि पूर्व में हुए कुंभ, अर्धकुंभ और माघ मेला के दौरान जमीन आवंटन में गड़बड़ी होती रही है।
कल्पवासियों को दूर-दराज मिलेगा ठौर
कहने को मेला कल्पवासियों को होता है लेकिन शनिवार जो कुछ हुआ, उसके बाद यही लगता है कि मेला में आने वाले कल्पवासियों को संगम से काफी दूर ठिकाना मिलेगा। सूत्रों के मुताबिक प्रयागवाल सभा को नागवासुकि से उत्तर की ओर सलोरी और पुरानी जीटी रोड से इब्राहिमपुर की ओर जमीन दिए जाने की तैयारी है। प्रयागवाल सभा के अध्यक्ष का कहना है कि अखाड़ों को मेला के मध्य में कभी जमीन नहीं दी जाती थी। कल्पवासियों की जमीन अखाड़ों को देकर मेला प्रशासन ने आम लोगों की श्रद्धा के साथ खिलवाड़ किया है।
‘जमीन आवंटन में गड़बड़ी की मुझे कोई जानकारी नहीं है। इस बारे में जांच की जाएगी और जो उचित होगा, किया जाएगा।’
मणि प्रसाद मिश्र, कुंभ मेलधिकारी

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