यमुना में मिलते जहर पर कोई नियंत्रण नहीं

Allahabad Updated Thu, 08 Nov 2012 12:00 PM IST
इलाहाबाद। गंगा-यमुना में गंदे पानी को जाने से रोकने के सख्त आदेश के बावजूद इसकी लगातार अनदेखी हो रही है। यमुना की स्थिति ज्यादा खराब है, जिसमें प्रतिदिन बड़ी मात्रा में गंदा पानी जा रहा है। नैनी के पुराने पुल से गुजर रही पाइप लाइन (राइजिंग मेन) जगह-जगह से क्षतिग्रस्त होने के कारण ऊपर से जहरीला पानी सीधे यमुना में जा रहा है, जबकि चाचर और घाघर नाले से भी बड़ी मात्रा में पानी यमुना में मिल रहा है। इससे पानी में बीओडी की मात्रा भी बढ़ गई है। हालांकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का दावा है कि फिलहाल यमुना में बीओडी की मात्रा मानक के मुताबिक है लेकिन महाकुंभ के पहले क्षतिग्रस्त पाइप की मरम्मत और नालों पर नियंत्रण न लगाया गया तो स्थिति खराब हो सकती है।
शहर के बड़े हिस्से का गंदा पानी पंपों केजरिए बलुआघाट स्थित पंपिंग स्टेशन पहुंचता है, जो नैनी के पुराने पुल से गुजर रही सीवर लाइन के जरिए नैनी स्थिति एसटीपी में जाता है, जहां इसे शोधित करके यमुना में छोड़ा जाता है लेकिन पिछले तकरीबन पांच माह से पुल से गुजर रही पाइप लाइन क्षतिग्रस्त है। पहले पाइप कम क्षतिग्रस्त था लेकिन वर्तमान में इसमें आधा दर्जन से ज्यादा स्थानों पर बड़े-बड़े छेद हो गए हैं जिसकी वजह से हजारों लीटर जहरीला पानी ऊपर से सीधे यमुना में समा रहा है। बची कसर चाचर और घाघर नाला पूरी कर दे रहे हैं। इन नालों से भी प्रतिदिन हजारों लीटर गंदा पानी सीधे यमुना में गिर रहा है।
एनजीआरबीए अनुश्रवण समिति के सदस्य कमलेश सिंह का आरोप है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यमुना में बीओडी की जांच नियमित नहीं कर रहा है, जबकि इसकी मात्रा लगातार बढ़ रही है। पिछले कुछ दिनों में यमुना के पानी में चिकनाहट ज्यादा हो गई है।
‘पुल के ऊपर से गुजर रही क्षतिग्रस्त पाइप लाइन से गिर रहा पानी यमुना के लिए खतरनाक है। वैसे यमुना में बीओडी की मात्रा मानक के मुताबिक 2 और 2.2 के बीच में ही है। इसकी नियमित जांच भी कराई जा रही है।’
-डॉ.मोहम्मद सिकंदर, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
‘पुल के समानंतर स्टील का ढांचा खड़ा करके उसके ऊपर से नई पाइप लाइन बिछाई जानी है। 24.5 करोड़ की इस योजना के लिए कमिश्नर रेलवे सेफ्टी से अब तक अनुमति नहीं मिल सकी है जिस वजह से दिक्कत आ रही है। क्षतिग्रस्त पाइप से यमुना में पानी न गिरे इसके लिए उसकी मरम्मत कराई जा रही है।’
जेपी मणि, परियोजना प्रबंधक, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई

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