मोनिरबा में रोजगार का पुल बनेंगे पुराछात्र

Allahabad Updated Sun, 04 Nov 2012 12:00 PM IST
इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (मोनिरबा) में शनिवार को आयोजित पुराछात्र सम्मेलन ‘अनुभूति-2012’ में देश के हर कोने से जुटे पुरनियों ने कालेजों के दिनों की यादें ताजा की। इस मौके पर उन्होंने छात्र-छात्राओं के साथ इंट्रैक्शन में संस्थान की परंपराएं तथा अनुभव भी साझा किए।
पुराछात्रों ने विद्यार्थियों को पढ़ाई तथा इसके बाद हर मोड़ पर मदद का आश्वासन दिया। मुख्य अतिथि लोहिया ग्रुप के उपाध्यक्ष राहुल सक्सेना ने छात्र-छात्राओं को एक अच्छा प्रबंधक बनने के नुस्खा बताने के साथ इस क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों से भी उन्हें अवगत कराया। उन्होंने कहा कि संस्थान के विद्यार्थियों के रोजगार में मदद के लिए हर स्तर पर प्रयास किया जाता है। अच्छे जगहों पर बैठे मित्रों और पुरानी कंपनियों में भी नौकरी के लिए प्लेसमेंट सेल की मदद की जाती है, जो आगे भी जारी रहेगी। इस मौके पर छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए। समारोह में 47वें बैच के विद्यार्थियों का प्लेसमेंट ब्रोसर और वार्षिक पत्रिका मोनिरबा टाइम्स का विमोचन भी हुआ। समारोह में पोलारिस इंडिया प्रालि के इंडिया हेड पंकज दुबे, एयरपोर्ट ऑथरिटी ऑफ इंडिया की डीजीएम एचआर तथा पंकज की पत्नी निवेदिता दुबे समेत 50 से अधिक पुराछात्र शामिल हुए। निदेशक प्रोफेसर रमेंदु राय और डीन प्रोफेसर एसए अंसारी ने अतिथियों का स्वागत किया। ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट ऑफिसर डॉ. एके सिंघल ने संचालन किया। आयोजन में प्रिया अरोड़ा और उनकी टीम का विशेष योगदान रहा।
जन्मदिन का उत्साह हुआ दोगुना
सम्मेलन में उन्हीं की बैच की सहपाठी तथा पत्नी निवेदिता के साथ बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित पंकज दुबे का शनिवार को जन्मदिन भी रहा। इससे उनका तथा समारोह में उत्साह दोगुना हो गया था। पंकज ने ‘मैं हूं झुम-झुम-झुम झुमरू’ गाना गाकर हमेशा आगे की सोचने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि इस संस्थान से शिक्षा के साथ जीवन साथी भी मिली। इसलिए यह संस्थान पूरे परिवार के लिए खास है।
एमबीए की वर्तमान स्थिति है गंभीर चिंता
मोनिरबा के पुराछात्र सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि शामिल राहुल सक्सेना ने एमबीए की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई संस्थान में मानक के अनुरूप शिक्षक नहीं है। शिक्षा का स्तर गिरने के साथ उस क्षमता के छात्र-छात्राएं भी नहीं हैं। कमजोर विद्यार्थी चुनौतियां का सामना नहीं कर पा रहे हैं। यही कारण है कि प्रबंधन कालेज भी बंद होने लगे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में अधिक काम सबसे बड़ी चुनौती है। पहले पांच से आठ घंटे काम करना पड़ता था लेकिन अब 10 से 12 घंटे आम बात है। शहर बड़े हो गए हैं लेकिन ऑफिसेज छोटे हो गए हैं। भागम-भाग अधिक है। एक प्रबंधन के सामने कम्प्यूटर ज्ञान भी एक बड़ी चुनौती है।
पुराछात्र सम्मेलन का विरोध
बीटेक छात्र ललित की मौत को लेकर प्रगतिशील समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं ने एमएनएनआईटी में पुराछात्र सम्मेलन का विरोध किया। सुनील कुशवाहा, रंजीत सिंह आदि ने बालसन चौराहे पर भूख हड़ताल भी की।

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